लखनऊ, 18 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश में किसानों और खेतिहर मजदूरों के मेधावी बच्चों के लिए उच्च कृषि शिक्षा हासिल करने का रास्ता पहले से आसान होने जा रहा है। प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना के तहत छात्रवृत्ति की निर्धारित सीटें दोगुनी कर दी हैं। अब कृषि विश्वविद्यालयों एवं कृषि संस्थानों में 45 के बजाय 90 और कृषि महाविद्यालयों में 15 के स्थान पर 30 विद्यार्थियों को सालाना छात्रवृत्ति दी जाएगी। चयनित विद्यार्थियों को अब हर महीने 5,000 रुपये यानी सालाना 60,000 रुपये मिलेंगे।
राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद की इस योजना में सीटों की संख्या बढ़ने से अधिक पात्र विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता मिलने का अवसर मिलेगा। खासकर उन किसान परिवारों के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण है, जिनके प्रतिभाशाली बच्चे आर्थिक कठिनाइयों के कारण उच्च शिक्षा के खर्च को लेकर चिंतित रहते हैं।
मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना: 1,410 से बढ़कर 2,820 हुईं सीटें
मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत प्रदेश के 11 कृषि विश्वविद्यालयों एवं कृषि संस्थानों और 61 कृषि महाविद्यालयों में पढ़ने वाले पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी जाती है। सीटों में वृद्धि के बाद छात्रवृत्ति की कुल निर्धारित संख्या 1,410 से बढ़कर 2,820 हो गई है।
संशोधित व्यवस्था के अनुसार, प्रत्येक कृषि विश्वविद्यालय एवं कृषि संस्थान में अब 90 विद्यार्थियों और प्रत्येक कृषि महाविद्यालय में 30 विद्यार्थियों को मेरिट के आधार पर छात्रवृत्ति दी जाएगी।
इस विस्तार से कृषि, उद्यान, वानिकी, पशुपालन और संबंधित विषयों में पढ़ाई करने वाले पात्र विद्यार्थियों को लाभ मिलने की संभावना है। इससे कृषि शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ाने और भविष्य में कृषि क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञ तैयार करने में भी मदद मिल सकती है।
अब हर महीने 5,000 रुपये, सालाना 60 हजार की मदद
योजना के तहत छात्रवृत्ति की राशि में भी बढ़ोतरी की गई है। पहले चयनित विद्यार्थियों को हर महीने 3,000 रुपये यानी सालाना 36,000 रुपये मिलते थे। अब यह राशि बढ़ाकर 5,000 रुपये प्रतिमाह कर दी गई है।
| विवरण | पहले | अब |
|---|---|---|
| मासिक छात्रवृत्ति | ₹3,000 | ₹5,000 |
| वार्षिक छात्रवृत्ति | ₹36,000 | ₹60,000 |
| वार्षिक अतिरिक्त सहायता | — | ₹24,000 |
इस तरह प्रत्येक चयनित विद्यार्थी को पहले की तुलना में सालाना 24,000 रुपये अधिक मिलेंगे। यह सहायता पढ़ाई से जुड़े खर्चों को पूरा करने में उपयोगी हो सकती है।
अब तक 6,454 विद्यार्थियों को मिल चुकी है मदद
मंडी परिषद के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना के तहत कुल 6,454 विद्यार्थियों को लगभग 22.90 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति दी जा चुकी है।
अब सीटों की संख्या दोगुनी होने से अधिक विद्यार्थियों को योजना से जोड़ने का अवसर मिलेगा। हालांकि, वास्तविक लाभार्थियों की संख्या पात्रता, उपलब्ध सीटों और मेरिट के आधार पर तय होगी।
कृषि स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में भी बढ़ीं सीटें
छात्रवृत्ति की बढ़ी हुई संख्या को अलग-अलग पाठ्यक्रमों में भी लागू किया गया है। कृषि विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों में कृषि स्नातक की छात्रवृत्ति सीटें 25 से बढ़ाकर 50 कर दी गई हैं। गृह विज्ञान स्नातक की सीटें 6 से बढ़ाकर 12 की गई हैं।
इसी तरह कृषि स्नातकोत्तर की सीटें 10 से बढ़ाकर 20 और गृह विज्ञान स्नातकोत्तर की सीटें 4 से बढ़ाकर 8 कर दी गई हैं।
कृषि महाविद्यालयों में स्नातक स्तर पर छात्रवृत्ति सीटों की संख्या 10 से बढ़ाकर 20 और स्नातकोत्तर स्तर पर 5 से बढ़ाकर 10 कर दी गई है।
इस बदलाव का उद्देश्य विभिन्न कृषि-संबंधित विषयों में पढ़ने वाले अधिक पात्र विद्यार्थियों तक आर्थिक सहायता पहुंचाना है।
किन विद्यार्थियों को मिलेगी मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति?
योजना का लाभ उत्तर प्रदेश के निवासी कृषकों और खेतिहर मजदूरों के पुत्र-पुत्रियों तथा उन पर पूरी तरह आश्रित पात्र विद्यार्थियों को दिया जाता है। चयन में शैक्षणिक योग्यता और मेरिट को महत्व दिया जाता है।
निर्धारित शैक्षणिक योग्यता के अनुसार:
- स्नातक पाठ्यक्रम: यूपी बोर्ड से इंटरमीडिएट में न्यूनतम 70 प्रतिशत अंक आवश्यक हैं।
- अन्य बोर्ड के विद्यार्थी: इंटरमीडिएट में कम से कम 85 प्रतिशत अंक निर्धारित हैं।
- स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम: स्नातक स्तर पर न्यूनतम 70 प्रतिशत अंक जरूरी हैं।
- चयन प्रक्रिया: पात्र विद्यार्थियों का चयन मेरिट के आधार पर किया जाता है।
कृषि के अलावा उद्यान, वानिकी, पशुपालन और संबंधित विषयों में पढ़ने वाले पात्र विद्यार्थी भी इस योजना के दायरे में आते हैं। आवेदन करने से पहले विद्यार्थियों को संबंधित संस्थान या मंडी परिषद से मौजूदा पात्रता शर्तों और आवेदन प्रक्रिया की पुष्टि कर लेनी चाहिए।
किसान परिवारों के बच्चों को उच्च शिक्षा में मिलेगी मदद
मंडी परिषद के निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में किसानों और खेतिहर मजदूरों के मेधावी बच्चों को उच्च कृषि शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति की सीटों और धनराशि में वृद्धि से आर्थिक रूप से कमजोर किसान परिवारों के विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई जारी रखने में मदद मिलेगी।
ग्रामीण परिवारों के लिए उच्च शिक्षा का खर्च कई बार बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे में छात्रवृत्ति की राशि बढ़ना और अधिक विद्यार्थियों को इसमें शामिल करने की व्यवस्था बनना महत्वपूर्ण है। कृषि शिक्षा प्राप्त करने वाले युवाओं के लिए यह सहायता आगे चलकर शोध, तकनीकी ज्ञान और कृषि आधारित उद्यमों की दिशा में भी अवसर पैदा कर सकती है।
निष्कर्ष: उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना में सीटों और आर्थिक सहायता की बढ़ोतरी से किसान एवं खेतिहर मजदूर परिवारों के मेधावी विद्यार्थियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। अब सालाना 60,000 रुपये की छात्रवृत्ति और दोगुनी निर्धारित सीटों के साथ अधिक पात्र विद्यार्थियों को कृषि शिक्षा में आगे बढ़ने का अवसर मिल सकेगा।








