नई दिल्ली, 09 फरवरी 2026। ईरान से आई एक खबर ने वैश्विक मानवाधिकार समुदाय का ध्यान फिर खींच लिया है। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी को ईरानी अदालत ने साढ़े सात साल की अतिरिक्त जेल सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद उनकी कुल सजा 44 साल तक पहुँचने की बात सामने आई है। 53 वर्षीय मोहम्मदी दशकों से महिलाओं के अधिकार, मृत्युदंड के विरोध और राजनीतिक दमन के खिलाफ आवाज़ उठाती रही हैं।
उनके वकील और समर्थकों का कहना है कि यह सजा उनके शांतिपूर्ण मानवाधिकार अभियान का परिणाम है, जबकि ईरानी अधिकारियों का आरोप है कि उन्होंने “राज्य के खिलाफ प्रोपेगेंडा”, “उत्तेजक बयानबाजी” और “कानून-व्यवस्था भंग” जैसी गतिविधियाँ कीं।
कौन हैं नरगिस मोहम्मदी?
- नरगिस मोहम्मदी एक इंजीनियर, लेखिका और ईरान की प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं।
- वह Defenders of Human Rights Center (डीएचआरसी) की उपाध्यक्ष रही हैं, जिसकी स्थापना नोबेल पुरस्कार विजेता शिरीन एबादी ने की थी।
- पिछले एक दशक का बड़ा हिस्सा उन्होंने जेल में बिताया है।
- 2023 में उन्हें Nobel Peace Prize से सम्मानित किया गया। उस समय वह तेहरान की जेल में थीं और उनके बच्चों ने उनकी ओर से पुरस्कार ग्रहण किया।
मोहम्मदी का काम विशेष रूप से ईरान में महिलाओं पर कथित अत्याचार, मृत्युदंड के विरोध और नागरिक स्वतंत्रताओं की वकालत पर केंद्रित रहा है।
साढ़े सात साल की नई सजा क्यों?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 12 दिसंबर 2025 को मशहद में मानवाधिकार वकील खोसरो अलीकोर्डी की शोकसभा में शामिल होने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। उन पर आरोप लगाए गए कि उन्होंने:
- भड़काऊ नारे लगाए,
- नियमों का उल्लंघन किया,
- और सार्वजनिक शांति भंग की।
ईरानी न्यायिक तंत्र के अनुसार, ये गतिविधियाँ “राज्य-विरोधी” श्रेणी में आती हैं। वहीं मोहम्मदी और उनके समर्थक कहते हैं कि यह एक शांतिपूर्ण सभा थी और उन पर लगाए गए आरोप मानवाधिकार आवाज़ों को दबाने की कोशिश हैं।
गिरफ्तारी, मुकदमे और लंबी कानूनी लड़ाई
नरगिस मोहम्मदी को अब तक 13 बार गिरफ्तार किया जा चुका है और 5 बार दोषी ठहराया गया है। 2021 से वह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े आरोपों में 13 साल की सजा काट रही थीं। नए फैसले के बाद उनके खिलाफ कुल सजा 44 साल तक पहुँचने की बात कही जा रही है।
यह मामला केवल एक व्यक्ति की सजा नहीं, बल्कि उस व्यापक बहस का हिस्सा बन गया है जिसमें ईरान में असहमति, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और महिलाओं के अधिकारों पर वैश्विक नजर रहती है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया क्यों तेज होती है?
नरगिस मोहम्मदी का नाम अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मंचों पर लंबे समय से लिया जाता रहा है। नोबेल सम्मान के बाद उनकी हर गिरफ्तारी और सजा वैश्विक सुर्खियाँ बनती हैं। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह मामला शांतिपूर्ण एक्टिविज़्म बनाम राज्यसत्ता की सख्ती के टकराव का प्रतीक बन गया है।












