नई दिल्ली/26 अक्टूबर 2026: दांतों का इलाज कराने वाले मरीजों के लिए डॉक्टर की पर्ची अब पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण होने जा रही है। राष्ट्रीय दंत आयोग (NDC) ने दंत चिकित्सकों(डेंटिस्ट्स) के लिए पर्चे से जुड़े नौ जरूरी मानकों की जानकारी देते हुए उन्हें कागजी और डिजिटल, दोनों तरह के प्रिस्क्रिप्शन पर आवश्यक विवरण दर्ज करने की सलाह दी है। इसमें डॉक्टर का पूरा नाम, वैध पंजीकरण नंबर, मान्यता प्राप्त डिग्री, क्लिनिक का पता और मरीज की पहचान से जुड़ी जानकारी शामिल है। आयोग ने दवा कंपनियों की ओर से उपलब्ध कराए गए या प्रायोजित पर्चों के इस्तेमाल से भी बचने की सलाह दी है।
इस पहल का उद्देश्य दंत चिकित्सा में पर्चे लिखने की प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाना, इलाज का रिकॉर्ड बेहतर करना और मरीजों के हितों की सुरक्षा करना है। हालांकि, इन मानकों को लागू करते समय चिकित्सकों को आयोग की आधिकारिक एडवाइजरी में दिए गए निर्देशों का पालन करना होगा।
डेंटिस्ट्स के लिए नए नियम: पर्चे पर दर्ज करनी होंगी ये 9 जानकारियां
राष्ट्रीय दंत आयोग के एथिक्स एंड डेंटल रजिस्ट्रेशन बोर्ड की एडवाइजरी के अनुसार, दंत चिकित्सकों को अपने प्रिस्क्रिप्शन पैड, लेटरहेड और डिजिटल पर्चों का प्रारूप निर्धारित मानकों के अनुरूप रखने की सलाह दी गई है। इन नौ बिंदुओं में डॉक्टर और मरीज की पहचान से लेकर हस्ताक्षर तथा मुहर तक की जानकारी शामिल है।
1. डॉक्टर का पूरा नाम: पर्चे पर दंत चिकित्सक का नाम वही होना चाहिए, जो संबंधित राज्य दंत परिषद के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज है।
2. वैध रजिस्ट्रेशन नंबर: डॉक्टर को राज्य दंत परिषद की ओर से जारी सक्रिय और वैध पंजीकरण संख्या लिखनी होगी। इससे चिकित्सक की पेशेवर पहचान की पुष्टि करने में मदद मिल सकती है।
3. मान्यता प्राप्त डिग्री: पर्चे पर दंत चिकित्सा की मान्यता प्राप्त डिग्री का उल्लेख जरूरी है। जहां लागू हो, वहां विशेषज्ञता की जानकारी भी दी जानी चाहिए।
4. क्लिनिक का पूरा पता: डॉक्टर के क्लिनिक या कार्यस्थल का पूरा डाक पता और पिन कोड दर्ज होना चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर मरीज सही स्थान तक पहुंच सके।
5. आपातकालीन संपर्क नंबर: पर्चे पर ऐसा फोन नंबर होना चाहिए, जिस पर आवश्यकता पड़ने पर मरीज या उसके परिजन चिकित्सक से संपर्क कर सकें।
6. मरीज की व्यक्तिगत जानकारी: मरीज का नाम, उम्र और लिंग दर्ज करना होगा। इससे इलाज से जुड़े रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने में सहायता मिलती है।
7. पर्चे की तारीख: प्रत्येक बार मरीज के परामर्श या इलाज के लिए पर्चा जारी करते समय तारीख लिखना आवश्यक बताया गया है। इससे उपचार का क्रम समझने में आसानी होती है।
8. डॉक्टर के हस्ताक्षर: पर्चे पर चिकित्सक के हस्तलिखित हस्ताक्षर या कानूनी रूप से मान्य डिजिटल हस्ताक्षर होने चाहिए।
9. डॉक्टर की मुहर: यदि पर्चे पर डॉक्टर का नाम, मान्यता प्राप्त डिग्री और वैध पंजीकरण नंबर पहले से स्पष्ट रूप से मुद्रित नहीं हैं, तो इन विवरणों वाली साफ और पढ़ने योग्य मुहर लगानी होगी।
दवा कंपनियों के प्रायोजित पर्चों पर आयोग की सलाह
राष्ट्रीय दंत आयोग ने दंत चिकित्सकों को दवा कंपनियों की ओर से उपलब्ध कराए गए, छपवाए गए या प्रायोजित पर्चों का इस्तेमाल करने से बचने की सलाह दी है। इसके बजाय ऐसे प्रिस्क्रिप्शन पैड या लेटरहेड का उपयोग करने को कहा गया है, जो आयोग के निर्धारित मानकों को पूरा करते हों।
इसका व्यावहारिक महत्व इसलिए भी है कि डॉक्टर की पर्ची इलाज से संबंधित एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होती है। उस पर चिकित्सक की स्पष्ट पहचान और जरूरी संपर्क विवरण होने से मरीज को भविष्य में परामर्श लेने, पुराने उपचार का रिकॉर्ड संभालने और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से संपर्क करने में सुविधा हो सकती है। हालांकि, केवल पर्चे का प्रारूप बदलने से इलाज की गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं होती; इसके लिए चिकित्सकीय दक्षता, सही निदान और मरीज के साथ उचित संवाद भी जरूरी हैं।
मरीजों और दंत चिकित्सकों पर क्या पड़ेगा असर?
इन मानकों से मरीजों को यह समझने में आसानी हो सकती है कि उनका इलाज कौन-सा पंजीकृत चिकित्सक कर रहा है और जरूरत पड़ने पर उससे संपर्क कैसे किया जा सकता है। पर्चे पर तारीख तथा मरीज की जानकारी दर्ज होने से उपचार का रिकॉर्ड भी अधिक व्यवस्थित रखा जा सकता है।
दंत चिकित्सकों के लिए इसका अर्थ अपने पुराने प्रिस्क्रिप्शन पैड, लेटरहेड और डिजिटल पर्चों की समीक्षा करना हो सकता है। जिन पर्चों पर जरूरी विवरण उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें अपडेट करने की जरूरत पड़ सकती है। क्लिनिक चलाने वाले डॉक्टरों को भी यह देखना चाहिए कि उनके पर्चे पर सभी आवश्यक जानकारियां स्पष्ट, सही और पढ़ने योग्य हों।
ध्यान दें: इन निर्देशों की कानूनी स्थिति, लागू होने की तारीख और अनुपालन संबंधी किसी कार्रवाई के बारे में निष्कर्ष निकालने से पहले राष्ट्रीय दंत आयोग की मूल एडवाइजरी देखना जरूरी है। उपलब्ध समाचार सामग्री में इन विवरणों का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।
डेंटिस्ट्स के लिए जरूरी संदेश
दंत चिकित्सकों को अपने पर्चे का प्रारूप जांचना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसमें डॉक्टर की पहचान, पंजीकरण, डिग्री, क्लिनिक का पता, संपर्क नंबर, मरीज का विवरण, तारीख तथा आवश्यक हस्ताक्षर या मुहर मौजूद हों। साथ ही, दवा कंपनियों के प्रायोजित पैड के बजाय निर्धारित मानकों के अनुरूप पर्चे का इस्तेमाल करने संबंधी आयोग की सलाह पर ध्यान देना चाहिए। इससे मरीजों का भरोसा बढ़ाने और दंत चिकित्सा के रिकॉर्ड को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।











