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NEET पेपर लीक रोकने के लिए बड़ा प्रस्ताव, परीक्षा के दिन AI से तैयार हो सकता है प्रश्नपत्र

On: October 13, 2026
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NEET पेपर लीक रोकने के लिए बड़ा प्रस्ताव
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नई दिल्ली/13 अक्टूबर 2026: NEET-UG पेपर लीक की घटनाओं के बाद देश की प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था में बदलाव को लेकर नई पहल की तैयारी है। परीक्षा सुधार के लिए गठित हाईपावर कमेटी के प्रमुख और UIDAI के पूर्व चेयरमैन नंदन नीलेकणी ने प्रश्नपत्र लीक रोकने के लिए तकनीक आधारित समाधान का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत परीक्षा से काफी पहले प्रश्नपत्र तैयार करने की मौजूदा व्यवस्था के स्थान पर परीक्षा वाले दिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से प्रश्नपत्र तैयार करने पर विचार किया जा रहा है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रश्नपत्रों को पहले से लीक होने की आशंका कम करना है। हालांकि, इसे लागू करने के लिए प्रश्नों का एक बड़ा और व्यवस्थित बैंक तैयार करना होगा, ताकि निर्धारित पाठ्यक्रम, कठिनाई स्तर और परीक्षा के मानकों के अनुरूप प्रश्नपत्र बनाए जा सकें।

NEET पेपर लीक रोकने के लिए परीक्षा के दिन बनेगा प्रश्नपत्र?

नंदन नीलेकणी ने मंगलवार को ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम के एक सत्र में परीक्षा सुधारों पर चर्चा करते हुए कहा कि पेपर लीक की समस्या का समाधान तकनीक के माध्यम से तलाशा जा सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि उनकी अध्यक्षता वाली कमेटी इस दिशा में काम कर रही है और उसकी रिपोर्ट 28 अक्टूबर तक आ सकती है।

नीलेकणी के अनुसार, प्रश्नपत्र पहले से तैयार होने की व्यवस्था में बदलाव करना जरूरी है। उनका मानना है कि प्रश्नपत्रों के पहले से उपलब्ध रहने से उनके लीक होने और इस माध्यम से अवैध कमाई की आशंका बनी रहती है। यदि परीक्षा के दिन ही AI की सहायता से प्रश्नपत्र तैयार किए जाएं, तो पहले से प्रश्नपत्र हासिल करने की संभावना को कम किया जा सकता है।

हालांकि, केवल प्रश्नपत्र तैयार करने का समय बदलना ही पर्याप्त नहीं होगा। ऐसी व्यवस्था की सफलता के लिए प्रश्नों की गोपनीयता, AI से तैयार प्रश्नों की गुणवत्ता, समान कठिनाई स्तर और परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करना भी आवश्यक होगा।

AI आधारित प्रश्नपत्र प्रणाली के लिए बड़ा प्रश्न बैंक जरूरी

प्रस्तावित व्यवस्था में प्रश्नों का विशाल बैंक अहम भूमिका निभा सकता है। इसमें पाठ्यक्रम के अलग-अलग विषयों और अध्यायों से पर्याप्त संख्या में प्रश्न शामिल करने होंगे। AI की मदद से इसी संग्रह में से निर्धारित मानकों के अनुसार प्रश्न चुनकर प्रश्नपत्र तैयार किए जा सकते हैं।

इस मॉडल का संभावित लाभ यह है कि अलग-अलग परीक्षा केंद्रों या परीक्षा सत्रों के लिए प्रश्नपत्रों के अलग-अलग सेट तैयार किए जा सकेंगे। इससे किसी एक प्रश्नपत्र के लीक होने से व्यापक स्तर पर परीक्षा प्रभावित होने का जोखिम घट सकता है।

लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हैं। प्रश्नों की गुणवत्ता की जांच, सभी अभ्यर्थियों के लिए समान अवसर, प्रश्नपत्र के कठिनाई स्तर का संतुलन और तकनीकी सुरक्षा जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान देना होगा। AI से प्रश्न तैयार होने की स्थिति में भी मानवीय निगरानी और विशेषज्ञों की समीक्षा महत्वपूर्ण रहेगी।

कंप्यूटर आधारित परीक्षा कराने पर भी विचार

NEET पेपर लीक के बाद परीक्षा व्यवस्था में संभावित बदलावों के तहत कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) का दायरा बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है। नीलेकणी ने संकेत दिया कि देशभर में ऐसी परीक्षाओं के संचालन के लिए आवश्यक नेटवर्क और बुनियादी ढांचे का विस्तार महत्वपूर्ण होगा।

प्रस्ताव के अनुसार, देश के लगभग डेढ़ लाख संस्थानों में परीक्षा संबंधी नेटवर्क और सुविधाएं विकसित करने की संभावना पर काम किया जा सकता है। इससे अधिक संख्या में विद्यार्थियों को कंप्यूटर आधारित परीक्षा देने का अवसर मिल सकता है।

कंप्यूटर आधारित परीक्षा में प्रश्नपत्रों का डिजिटल वितरण, परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षित लॉगिन और निर्धारित समय पर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने जैसी व्यवस्थाएं लागू की जा सकती हैं। हालांकि, बड़े स्तर पर इस प्रणाली को लागू करने के लिए पर्याप्त कंप्यूटर लैब, विश्वसनीय इंटरनेट कनेक्टिविटी, बिजली की उपलब्धता और साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी होगा।

NTA और AICTE ने कंप्यूटर लैब का मांगा था ब्योरा

खबर में उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने देश के तकनीकी एवं प्रबंधन संस्थानों में उपलब्ध कंप्यूटर लैब का ब्योरा जुटाने की प्रक्रिया शुरू की थी। इस जानकारी का इस्तेमाल परीक्षा केंद्रों की उपलब्धता और कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं के विस्तार की संभावनाओं का आकलन करने में किया जा सकता है।

यदि पर्याप्त संस्थानों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होती हैं, तो बड़े स्तर पर कंप्यूटर आधारित परीक्षाएं आयोजित करने की योजना को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, संस्थानों की संख्या के साथ-साथ वहां उपलब्ध कंप्यूटरों, तकनीकी क्षमता और परीक्षा संचालन की तैयारियों का आकलन भी जरूरी होगा।

परीक्षा सुधार कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

नीलेकणी ने कहा कि परीक्षा में गड़बड़ियों को रोकने के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है और कमेटी इस दिशा में समाधान तैयार करने में जुटी है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी परीक्षा सुधारों से जुड़े सुझावों को लागू करने के इच्छुक हैं।

अब निगाहें प्रस्तावित रिपोर्ट पर हैं। रिपोर्ट में क्या सिफारिशें की जाती हैं, AI आधारित प्रश्नपत्र प्रणाली को किस तरह लागू करने की योजना बनती है और कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं के विस्तार को लेकर क्या रोडमैप सामने आता है, यह आगे स्पष्ट होगा।

NEET-UG जैसी बड़ी प्रतियोगी परीक्षा में किसी भी बदलाव का असर लाखों अभ्यर्थियों पर पड़ सकता है। इसलिए परीक्षा सुधारों में गोपनीयता के साथ निष्पक्षता, पारदर्शिता और सभी विद्यार्थियों को समान अवसर देना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।

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