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NEET-UG परीक्षा अब कंप्यूटर से कराने की सिफारिश, हर जिले में सुरक्षित केंद्र बनाने पर जोर

On: October 9, 2026
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NEET-UG परीक्षा अब कंप्यूटर से कराने की सिफारिश
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नई दिल्ली (शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026)। मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए आयोजित होने वाली नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा के तरीके में बदलाव की मांग एक बार फिर तेज हुई है। शिक्षा मंत्रालय से संबंधित संसदीय समिति ने सिफारिश की है कि परीक्षा को पेन-पेपर मोड के बजाय कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) के रूप में आयोजित किया जाए। समिति ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को इस दिशा में तेजी से तैयारी करने और परीक्षा व्यवस्था को अधिक सुरक्षित व पारदर्शी बनाने के लिए कई सुझाव दिए हैं।

समिति ने देशभर में एक हजार सुरक्षित सरकारी परीक्षा केंद्र विकसित करने, प्रत्येक जिले में कम से कम एक केंद्र स्थापित करने और परीक्षा में शामिल होने के प्रयासों तथा अधिकतम उम्र से जुड़े नियमों पर स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ विचार करने की सिफारिश भी की है। इसके अलावा प्रश्नपत्र की तैयारी, एनटीए में कर्मचारियों की कमी और परीक्षा के पैटर्न में सुधार जैसे मुद्दे भी रिपोर्ट में उठाए गए हैं।

NEET-UG परीक्षा कंप्यूटर आधारित कराने की सिफारिश

संसदीय समिति का कहना है कि नीट-यूजी परीक्षा को जेईई मेन, यूजीसी नेट और सीयूईटी की तरह कंप्यूटर आधारित मोड में कराने की दिशा में काम किया जाना चाहिए। इसके लिए एनटीए को आवश्यक तकनीकी और प्रशासनिक तैयारियां तेज करने की सलाह दी गई है।

समिति की यह सिफारिश परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और संचालन से जुड़ी चिंताओं के बीच आई है। पेन-पेपर परीक्षा में प्रश्नपत्रों की छपाई, परिवहन, भंडारण और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है। कंप्यूटर आधारित परीक्षा में इन व्यवस्थाओं का स्वरूप अलग होगा, हालांकि इसके लिए पर्याप्त कंप्यूटर, भरोसेमंद इंटरनेट या नेटवर्क व्यवस्था, बिजली और तकनीकी सहायता सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा।

समिति ने स्पष्ट किया है कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा की ओर बढ़ते समय दूरदराज के क्षेत्रों और वंचित पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए।

देशभर में बनेंगे एक हजार सुरक्षित परीक्षा केंद्र

समिति ने एनटीए को देशभर में एक हजार सुरक्षित सरकारी परीक्षा केंद्र विकसित करने का सुझाव दिया है। प्रस्ताव के मुताबिक, प्रत्येक जिले में कम से कम एक परीक्षा केंद्र स्थापित करने पर विचार किया जाना चाहिए।

रिपोर्ट में टियर-2 और टियर-3 शहरों के साथ ग्रामीण इलाकों में भी सरकारी नियंत्रण वाले परीक्षा ढांचे को मजबूत करने की जरूरत बताई गई है। इसके लिए पर्याप्त निवेश करने की सिफारिश की गई है, ताकि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को परीक्षा देने के लिए दूर की यात्रा न करनी पड़े।

कंप्यूटर आधारित परीक्षा लागू करने से पहले इन केंद्रों पर जरूरी तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण होगा। समिति ने सुझाव दिया है कि जब तक दूरदराज के क्षेत्रों में पर्याप्त कंप्यूटर व्यवस्था विकसित नहीं हो जाती और विद्यार्थियों को इसके लिए तैयार नहीं कर लिया जाता, तब तक वहां हाइब्रिड मोड में परीक्षा आयोजित करने के विकल्प पर विचार किया जाए।

इस व्यवस्था में कंप्यूटर आधारित परीक्षा और प्रश्नपत्र से जुड़ी वैकल्पिक व्यवस्थाओं को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप इस्तेमाल किया जा सकता है। रिपोर्ट में परीक्षा केंद्रों पर ही प्रश्नपत्रों की छपाई जैसी व्यवस्था पर भी विचार करने का सुझाव दिया गया है।

नीट-यूजी में उम्र और प्रयासों की सीमा तय करने पर विचार

वर्तमान व्यवस्था में नीट-यूजी के लिए प्रयासों की अधिकतम संख्या और ऊपरी आयु सीमा निर्धारित नहीं है। संसदीय समिति ने सुझाव दिया है कि इन दोनों पहलुओं पर स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर विचार किया जाए।

समिति की सिफारिश का उद्देश्य परीक्षा के नियमों को लेकर स्पष्टता लाना है। हालांकि, उम्र या प्रयासों की सीमा में बदलाव का अंतिम निर्णय संबंधित प्राधिकरणों की प्रक्रिया और आधिकारिक अधिसूचना पर निर्भर करेगा। फिलहाल समिति की सिफारिश को लागू नियम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

समिति ने यह भी कहा है कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा का अंतिम निर्णय लेने से पहले स्वास्थ्य मंत्रालय, विद्यार्थियों और उनके परिवारों के साथ परामर्श किया जाए, ताकि प्रस्तावित बदलाव के शैक्षणिक और व्यावहारिक प्रभावों को समझा जा सके।

कोचिंग पर निर्भरता घटाने के लिए परीक्षा पैटर्न बदलने की सलाह

संसदीय समिति ने नीट-यूजी के मौजूदा परीक्षा पैटर्न पर भी सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, परीक्षा का स्वरूप ऐसा होना चाहिए जो विद्यार्थियों की वास्तविक समझ और विषय पर पकड़ को परखे, न कि केवल रटने या किसी निर्धारित पैटर्न को पहचानने की क्षमता को।

समिति ने चिंता जताई कि मौजूदा व्यवस्था में स्कूली पाठ्यक्रम की समझ के मुकाबले कोचिंग संस्थानों द्वारा तैयार कराए जाने वाले पाठ्यक्रम और परीक्षा-उन्मुख अभ्यास को अधिक महत्व मिल सकता है। इससे विद्यार्थियों के बीच कोचिंग पर निर्भरता बढ़ने की आशंका रहती है।

इसका असर खासकर उन छात्रों पर पड़ सकता है, जो आर्थिक या सामाजिक कारणों से महंगी कोचिंग सुविधाएं हासिल नहीं कर पाते। समिति ने परीक्षा के प्रश्नों और पैटर्न में ऐसे बदलाव करने की जरूरत बताई है, जिससे विषय की वास्तविक समझ को अधिक महत्व मिले और सभी विद्यार्थियों को समान अवसर मिल सकें।

एनटीए में कर्मचारियों की कमी पर भी उठे सवाल

समिति ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के मानव संसाधन से जुड़े मुद्दे को भी अपनी रिपोर्ट में शामिल किया है। रिपोर्ट के अनुसार, एनटीए में कुल 39 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से केवल 23 पद भरे हुए हैं।

समिति ने एजेंसी के भीतर अधिकारियों, कर्मचारियों और विशेषज्ञों की नियुक्ति तथा उनकी पृष्ठभूमि की उचित जांच पर भी जोर दिया है। परीक्षा जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण और पर्याप्त प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता महत्वपूर्ण मानी जाती है।

समिति का सुझाव है कि प्रश्नपत्र तैयार करने और उसके अनुवाद के लिए सरकारी संस्थानों के शिक्षकों को विशेषज्ञ के रूप में शामिल किया जाए। साथ ही प्रश्नपत्र को परीक्षा से कुछ दिन पहले अंतिम रूप देने और उससे जुड़े विशेषज्ञों को परीक्षा संपन्न होने तक अलग एवं सुरक्षित वातावरण में रखने की सलाह दी गई है।

पेपर लीक के बाद परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा पर जोर

नीट-यूजी परीक्षा में पेपर लीक से जुड़ी घटनाओं के बाद परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा और विश्वसनीयता पर व्यापक चर्चा हुई थी। इसी पृष्ठभूमि में कंप्यूटर आधारित परीक्षा, सुरक्षित केंद्रों और प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में सुधार जैसे सुझाव महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पेपर लीक विवाद के बाद अगले वर्ष से नीट-यूजी को सीबीटी मोड में कराने की घोषणा की थी। हालांकि, किसी घोषणा और लागू व्यवस्था के बीच अंतर होता है। परीक्षा के स्वरूप में वास्तविक बदलाव की पुष्टि एनटीए और संबंधित मंत्रालयों की आधिकारिक अधिसूचना से ही होगी।

विद्यार्थियों के लिए क्या मायने रखती हैं ये सिफारिशें?

यदि कंप्यूटर आधारित परीक्षा की व्यवस्था लागू होती है, तो विद्यार्थियों को परीक्षा के प्रश्नों के साथ कंप्यूटर पर उत्तर दर्ज करने के तरीके से भी परिचित होना पड़ेगा। ग्रामीण और छोटे शहरों के छात्रों के लिए पर्याप्त अभ्यास केंद्रों तथा तकनीकी सुविधाओं की उपलब्धता विशेष महत्व रखेगी।

वहीं, परीक्षा पैटर्न में सुधार और प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया को मजबूत करने से विषय की समझ को अधिक महत्व देने की दिशा में कदम उठाया जा सकता है। उम्र और प्रयासों की सीमा संबंधी सिफारिश पर भी विद्यार्थियों की नजर रहेगी।

फिलहाल ये संसदीय समिति के सुझाव हैं, अंतिम नियम नहीं। नीट-यूजी के अभ्यर्थियों को परीक्षा के मोड, पात्रता और अन्य शर्तों के संबंध में एनटीए की आधिकारिक घोषणाओं को ही अंतिम मानना चाहिए।

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