नई दिल्ली/07 जून 2026: भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने रिश्तों को नई ऊर्जा देने की दिशा में नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल का बयान खास मायने रखता है। अपनी भारत यात्रा के दौरान नई दिल्ली में आयोजित एक मीडिया ब्रीफिंग में उन्होंने स्पष्ट किया कि नेपाल अब केवल पारंपरिक कूटनीतिक रिश्तों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि विकास, तकनीक, कनेक्टिविटी और आर्थिक प्रगति के क्षेत्रों में भारत के साथ और अधिक गहराई से जुड़ने का इच्छुक है।
खनाल ने कहा कि नेपाल और भारत का रिश्ता सिर्फ दो पड़ोसी देशों का संबंध नहीं है, बल्कि यह साझा इतिहास, संस्कृति, सभ्यता और भावनात्मक जुड़ाव पर आधारित है। उन्होंने कहा, “हम सिर्फ नक्शे पर पड़ोसी नहीं हैं, बल्कि एक ही नदियों की संतान हैं।” उनका यह बयान दोनों देशों के बीच मौजूद ऐतिहासिक और सांस्कृतिक निकटता को दर्शाता है।
नेपाल-भारत संबंधों में विकास और साझेदारी पर जोर
नेपाल के विदेश मंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में भारत दुनिया की सबसे तेजी से उभरती आर्थिक और तकनीकी शक्तियों में शामिल है। ऐसे में नेपाल भारत के साथ विकास आधारित सहयोग को और मजबूत करना चाहता है।
उन्होंने कहा कि सीमा के उस पार दिखाई देने वाला भारत आज उम्मीदों, नवाचार और तेजी से विकास करने की क्षमता का प्रतीक बन चुका है। नेपाल इसी उभरते हुए भारत के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ना चाहता है। उनके अनुसार, दोनों देशों के रिश्तों को अब पुराने भू-राजनीतिक नजरिए से देखने के बजाय विकास और आर्थिक अवसरों के दृष्टिकोण से समझने की आवश्यकता है।
मीडिया की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण
शिशिर खनाल ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में मीडिया की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल जैसे जीवंत लोकतंत्रों में मीडिया जनता तक सही जानकारी पहुंचाने और दोनों देशों के रिश्तों को समझाने का प्रमुख माध्यम है।
उनके अनुसार, मीडिया न केवल घटनाओं की रिपोर्टिंग करता है बल्कि वह देशों के बीच सहयोग और विश्वास के माहौल को भी मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाता है।
जयशंकर के साथ हुई कई अहम मुद्दों पर चर्चा
दिल्ली प्रवास के दौरान नेपाल के विदेश मंत्री ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ विस्तृत बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच व्यापार, ऊर्जा सहयोग, सीमा-पार कनेक्टिविटी, जल संसाधन प्रबंधन और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।
खनाल ने बताया कि दोनों देशों की सरकारें ऐसे प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दे रही हैं जो सीधे तौर पर आम नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने में मददगार साबित हों।
डिजिटल भुगतान व्यवस्था से बढ़ेगी सुविधा
नेपाल-भारत संबंधों के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का जिक्र करते हुए विदेश मंत्री ने बताया कि नेपाल की नेशनल पेमेंट सिस्टम संस्था NCHL और भारत की NPCI के बीच हुए समझौते के बाद सीमा-पार डिजिटल भुगतान व्यवस्था शुरू की जा रही है।
इस पहल के तहत दोनों देशों के भुगतान तंत्र आपस में जुड़ेंगे, जिससे UPI जैसी क्रॉस-बॉर्डर डिजिटल ट्रांजैक्शन सेवाएं संभव हो सकेंगी। इसका लाभ व्यापारियों, पर्यटकों, छात्रों और आम नागरिकों को मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दोनों देशों के आर्थिक सहयोग को नई दिशा देगा।
भूकंप पुनर्निर्माण परियोजनाओं का हुआ हस्तांतरण
विदेश मंत्री ने यह भी घोषणा की कि वर्ष 2015 के विनाशकारी भूकंप के बाद भारत की सहायता से नेपाल में पूरी की गई 72 स्वास्थ्य परियोजनाओं और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़ी 12 पुनर्निर्माण परियोजनाओं को औपचारिक रूप से सौंपा जा रहा है।
इन परियोजनाओं ने नेपाल के प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। नेपाल सरकार ने इन परियोजनाओं के लिए भारत के सहयोग की सराहना भी की।
निष्कर्ष
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल का यह दौरा स्पष्ट संकेत देता है कि नेपाल-भारत संबंध अब केवल पारंपरिक मित्रता तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश आर्थिक विकास, डिजिटल कनेक्टिविटी, ऊर्जा सहयोग और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के जरिए भविष्य की साझेदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे समय में जब क्षेत्रीय सहयोग की अहमियत लगातार बढ़ रही है, भारत और नेपाल का यह साझेदारी मॉडल दक्षिण एशिया के लिए भी एक सकारात्मक उदाहरण बन सकता है।













