लखनऊ (Wed, 11 Mar 2026)। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। लंबे समय से प्रतीक्षित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को एयरोड्रम लाइसेंस मिल गया है, जिससे यहां से जल्द ही विमान सेवाएं शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।
मंगलवार को एयरपोर्ट के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर उन्हें यह लाइसेंस औपचारिक रूप से सौंपा। इस अवसर पर अधिकारियों ने एयरपोर्ट परियोजना की प्रगति और आने वाले चरणों की जानकारी भी दी। माना जा रहा है कि अब उद्घाटन और वाणिज्यिक उड़ानों की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ेगी।
जेवर में विकसित हो रहा यह आधुनिक एयरपोर्ट न केवल दिल्ली-एनसीआर के हवाई यातायात का दबाव कम करेगा, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश को देश और दुनिया के प्रमुख शहरों से सीधे जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ानों का रास्ता साफ
एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन की दिशा में एक बड़ी प्रशासनिक बाधा दूर हो गई है। हालांकि एयरपोर्ट का एयरोड्रोम सिक्योरिटी प्रोग्राम अभी ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) के पास समीक्षा के लिए लंबित है।
एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमैन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर बताया कि सुरक्षा मंजूरी मिलते ही उद्घाटन और वाणिज्यिक उड़ानों की तिथि तय कर दी जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह एयरपोर्ट उत्तर भारत के एविएशन नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण कड़ी बनेगा और दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बढ़ते दबाव को भी काफी हद तक कम करेगा।
पहले चरण में 1.2 करोड़ यात्रियों की क्षमता
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का निर्माण कई चरणों में किया जा रहा है। पहले चरण में एक अत्याधुनिक रनवे और यात्री टर्मिनल भवन तैयार किया गया है, जिसकी वार्षिक क्षमता लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों की होगी।
टर्मिनल भवन का क्षेत्रफल करीब 1.38 लाख वर्गमीटर है। इसमें यात्रियों की सुविधा के लिए 48 चेक-इन काउंटर, नौ सुरक्षा जांच लेन और नौ इमिग्रेशन काउंटर बनाए गए हैं।
इसके साथ ही एयरपोर्ट पर 10 एयरोब्रिज और 28 विमान पार्किंग स्टैंड की व्यवस्था की गई है। रनवे की डिजाइन इस तरह तैयार की गई है कि यहां से प्रति घंटा लगभग 30 उड़ानों का संचालन किया जा सके।
भविष्य में सात करोड़ यात्रियों तक पहुंचेगी क्षमता
एयरपोर्ट परियोजना के अगले चरणों में इसका विस्तार और भी बड़े स्तर पर किया जाएगा। दूसरे चरण में इसकी क्षमता तीन करोड़ यात्रियों तक बढ़ाई जाएगी।
तीसरे और चौथे चरण के पूरा होने के बाद यह क्षमता बढ़कर सात करोड़ यात्रियों प्रति वर्ष तक पहुंच सकती है। इसके साथ ही एयरपोर्ट परिसर में आधुनिक कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब भी विकसित किया जा रहा है।
प्रारंभिक चरण में कार्गो संचालन की क्षमता लगभग 2.5 लाख टन प्रतिवर्ष होगी, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 15 लाख टन तक किया जाएगा।
स्विस तकनीक और भारतीय आतिथ्य का अनूठा संगम
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को आधुनिक तकनीक और यात्रियों के अनुकूल सेवाओं के साथ विकसित किया जा रहा है। यहां डिजियात्रा आधारित बायोमेट्रिक प्रणाली, सेल्फ बैगेज ड्रॉप और डिजिटल पैसेंजर प्रोसेसिंग सिस्टम जैसी स्मार्ट सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
एयरपोर्ट के डिजाइन में स्विस इंजीनियरिंग तकनीक और भारतीय आतिथ्य की झलक देखने को मिलेगी। यात्रियों को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा अनुभव देने के लिए पूरी प्रणाली को डिजिटल और ऑटोमेटेड बनाया जा रहा है।
पर्यावरण अनुकूल होगा एयरपोर्ट परिसर
परियोजना का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन हासिल करना भी है। इसके लिए एयरपोर्ट परिसर में सौर ऊर्जा संयंत्र, वर्षा जल संचयन प्रणाली और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन जैसी पर्यावरण अनुकूल व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि एयरपोर्ट के शुरू होने से दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में हवाई यातायात का दबाव कम होगा। साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश में निवेश, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई गति मिल सकती है।








