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ऑपरेशन सिंदूर और ब्रह्मोस: सिंगापुर से योगी का संदेश, डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग बना यूपी का नया ब्रांड

On: February 24, 2026
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सिंगापुर से योगी का संदेश, डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग बना यूपी का नया ब्रांड
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लखनऊ, 24 फरवरी 2026। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath इन दिनों सिंगापुर और जापान के दौरे पर हैं। मंगलवार को सिंगापुर में भारतीय प्रवासी समुदाय को संबोधित करते हुए उन्होंने एक ऐसा वाक्य कहा, जिसने न केवल सभागार में मौजूद लोगों का ध्यान खींचा, बल्कि उत्तर प्रदेश की उभरती रक्षा विनिर्माण क्षमता को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर रेखांकित कर दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा—“ऑपरेशन सिंदूर में जो ब्रह्मोस चली थी न, वह लखनऊ की ही है।”
यह वाक्य साधारण नहीं था। इसमें आत्मविश्वास था, रणनीतिक संदेश था और ‘ब्रांड यूपी’ को नई पहचान देने की कोशिश भी साफ झलक रही थी।

रक्षा क्षेत्र आज केवल सुरक्षा का विषय नहीं रह गया है। यह किसी राष्ट्र की तकनीकी दक्षता, औद्योगिक सामर्थ्य और रणनीतिक हैसियत का प्रतीक बन चुका है। ऐसे दौर में जब भारत आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब सिंगापुर की धरती से ‘ब्रह्मोस’ और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख एक सोचा-समझा कूटनीतिक और औद्योगिक संकेत माना जा रहा है।

ब्रह्मोस क्यों कहलाती है भारत का ‘ब्रह्मास्त्र’

BrahMos Aerospace द्वारा विकसित ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल भारत और रूस की संयुक्त परियोजना है। यह दुनिया की सबसे तेज परिचालन सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिनी जाती है।

  • अधिकतम गति: लगभग 2.8 से 3 मैक
  • मारक क्षमता (रेंज): लगभग 800 किलोमीटर तक
  • विशेषता: हवा में दिशा बदलने की क्षमता, लो-फ्लाइट प्रोफाइल और उच्च सटीकता
  • प्लेटफॉर्म: थल, जल और वायु—तीनों से प्रक्षेपण में सक्षम

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रह्मोस की सबसे बड़ी ताकत उसकी ‘सटीकता’ और ‘रडार से बच निकलने’ की क्षमता है। यही कारण है कि इसे भारत का ‘देसी ब्रह्मास्त्र’ कहा जाता है।

मुख्यमंत्री ने जब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के संदर्भ में इसका जिक्र किया, तो उसका अर्थ केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं था। यह संदेश था कि भारत अब उन्नत हथियार प्रणालियों का आयातक भर नहीं, बल्कि निर्माता और निर्यातक बनने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर: रणनीति से साकार होता सपना

ल वाले रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं।

एक समय ‘बीमारू राज्य’ की छवि से जूझता उत्तर प्रदेश अब खुद को ‘डिफेंस इंडस्ट्रियल हब’ के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। योगी आदित्यनाथ ने सिंगापुर में इस कॉरिडोर का उल्लेख कर साफ कर दिया कि राज्य अब केवल कृषि या पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं रहना चाहता।

ऑपरेशन सिंदूर के जिक्र के राजनीतिक और कूटनीतिक मायने

‘ऑपरेशन सिंदूर’ का संदर्भ केवल एक सैन्य अभियान का उल्लेख नहीं था। विदेश में बसे भारतीयों के सामने इसका उल्लेख करके मुख्यमंत्री ने दोहरे संदेश दिए—
पहला, भारत की सैन्य क्षमता निर्णायक और सक्षम है।
दूसरा, उत्तर प्रदेश इस शक्ति का औद्योगिक आधार बन रहा है।

भू-राजनीतिक तनाव के इस दौर में रक्षा उत्पादन आत्मनिर्भरता (Self-Reliance) और रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) का प्रतीक बन चुका है। सिंगापुर जैसे वैश्विक वित्तीय केंद्र में इस विषय को उठाना निवेशकों के लिए भी संकेत था कि यूपी रक्षा निर्माण में दीर्घकालिक अवसर प्रदान कर रहा है।

ब्रांड यूपी की ‘दबंग दस्तक’

मुख्यमंत्री के संबोधन में भावनात्मक अपील भी थी और औद्योगिक दृष्टि भी। उन्होंने प्रवासी भारतीयों से संवाद करते हुए यह जताया कि उत्तर प्रदेश केवल जनसंख्या के लिहाज से बड़ा राज्य नहीं, बल्कि संभावनाओं का नया केंद्र है।

ब्रह्मोस की रफ्तार और उत्तर प्रदेश के विकास की गति—दोनों को एक साथ जोड़कर पेश करना एक सशक्त प्रतीकात्मक रणनीति थी। यह संदेश स्पष्ट था कि रक्षा उत्पादन अब यूपी की नई पहचान बन सकता है।

जहां एक ओर ब्रह्मोस भारत की सामरिक शक्ति का प्रतीक है, वहीं दूसरी ओर डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के औद्योगिक पुनर्जागरण की कहानी कह रहा है।

सिंगापुर से दिया गया यह संदेश केवल एक बयान नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक रणनीतिक दृष्टि का सार्वजनिक उद्घोष था—जिसमें आत्मनिर्भर भारत, निवेश आकर्षण और रोजगार सृजन—तीनों की झलक दिखाई देती है।

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