नई दिल्ली | 22 जनवरी 2026 (गुरुवार)– राजधानी दिल्ली में आयोजित पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर को भारत के सैन्य इतिहास का सबसे सफल अभियान बताया। ‘Red Lines Redrawn: Operation Sindoor and India’s New Normal’ नामक पुस्तक के लोकार्पण पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई ने न केवल भारत की नई सैन्य सोच को दुनिया के सामने रखा, बल्कि यह भी दिखाया कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों से नहीं, बल्कि विश्वसनीय सूचना और सटीक योजना से जीते जाते हैं।
सेना प्रमुख के अनुसार, इस अभियान के दौरान सूचना युद्ध (Information Domain) और सैन्य गतिविधियां समानांतर चलीं, लेकिन अंततः वही पक्ष नैरेटिव में आगे रहा, जिसके पास ठोस प्रमाण और सच्चाई पर आधारित कहानी थी। उन्होंने कहा कि दुनिया ने टीवी स्क्रीन पर देखा कि कैसे मात्र 22 मिनट में तीनों सेनाओं ने मिलकर नौ लक्ष्यों पर सटीक, नियंत्रित और गैर-उकसावे वाली कार्रवाई की।
जॉइंटनेस का वास्तविक प्रदर्शन
जनरल द्विवेदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह मिथक तोड़ दिया कि तीनों सेनाओं की संयुक्तता केवल विचार-विमर्श या सेमिनारों तक सीमित है। यह वास्तविक दबाव की स्थिति में किया गया समन्वित ऑपरेशन था, जिसमें थल सेना, वायुसेना और नौसेना ने एकीकृत कमान की तरह काम किया।
उन्होंने कहा कि यह भारत की सैन्य संरचना में आए बड़े बदलाव का प्रतीक है, जहां संयुक्त योजना, संयुक्त निष्पादन और संयुक्त लक्ष्य स्पष्ट रूप से दिखाई दिए।
फैसलों की रफ्तार और तैयारी
सेना प्रमुख ने बताया कि इस ऑपरेशन ने उस धारणा को भी गलत साबित किया कि भारत को सैन्य निर्णय लेने और बलों की तैनाती में अधिक समय लगता है। उन्होंने खुलासा किया कि संभावित प्रतिक्रियाओं का पहले ही विस्तृत आकलन कर लिया गया था। ‘रेड टीम’ अभ्यासों के माध्यम से विभिन्न युद्ध परिदृश्यों की तैयारी की गई थी।
उन्होंने इस पूरी रणनीति को “तीन-आयामी शतरंज” की तरह बताया, जहां हर चाल का पूर्वानुमान और जवाब पहले से तय था।
सबूतों ने मजबूत किया नैरेटिव
जनरल द्विवेदी ने कहा कि कार्रवाई के बाद क्षतिग्रस्त एयरफील्ड और उपकरणों की तस्वीरों ने इस अभियान की प्रभावशीलता को और पुष्ट किया। उनके अनुसार, आधुनिक समय में युद्धक्षेत्र केवल जमीन पर नहीं, बल्कि वैश्विक धारणा (Global Perception) में भी होता है।
आत्मनिर्भरता और आपूर्ति श्रृंखला पर जोर
उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान और उसके बाद सरकार द्वारा उठाए गए आर्थिक कदमों ने सैन्य तैयारियों को मजबूती दी। भविष्य के लिए उन्होंने आपूर्ति श्रृंखलाओं (Supply Chains) को मजबूत करने और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया। उनके मुताबिक, लंबी अवधि में यही रणनीति देश को सामरिक रूप से सशक्त बनाए रखेगी।
ऑपरेशन की जानकारी और सार्वजनिक प्रतिक्रिया
सेना प्रमुख ने बताया कि ऑपरेशन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी 29–30 अप्रैल को मिल गई थी, लेकिन उसे सार्वजनिक नहीं किया गया। बाद में किए गए ‘Justice is Served’ ट्वीट को रिकॉर्ड स्तर पर प्रतिक्रिया मिली, जिसने जन-धारणा पर गहरा प्रभाव डाला।
उन्होंने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि यह पहली ऐसी कृति है, जिसे सेना, वायुसेना और कूटनीतिक अनुभव रखने वाले लेखकों ने मिलकर लिखा है, जिससे इस अभियान का बहुआयामी दृष्टिकोण सामने आता है।










