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ऑपरेशन सिंदूर: सेना प्रमुख बोले—संयुक्त कार्रवाई की ताकत का सबसे बड़ा उदाहरण, आधुनिक युद्ध की बदली तस्वीर

On: April 9, 2026
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ऑपरेशन सिंदूर- सेना प्रमुख बोले—संयुक्त कार्रवाई की ताकत का सबसे बड़ा उदाहरण
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नई दिल्ली। Thu, 09 Apr 2026। बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य के बीच ऑपरेशन सिंदूर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने इसे केवल एक सैन्य अभियान नहीं, बल्कि आधुनिक युद्ध की दिशा तय करने वाली “जीवंत केस स्टडी” बताया। उनके मुताबिक, इस ऑपरेशन ने यह स्पष्ट कर दिया कि आज का युद्ध सिर्फ सीमा पर लड़ी जाने वाली लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि यह कई स्तरों और कई क्षेत्रों में एक साथ चलने वाली जटिल प्रक्रिया बन चुका है।

ऑपरेशन सिंदूर ने क्या सिखाया: “Jointness ही नई ताकत”

सेना प्रमुख ने ‘रण संवाद’ मंच पर बोलते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की “डोमेन जॉइंटनेस” यानी विभिन्न सैन्य क्षेत्रों के बीच तालमेल की क्षमता को मजबूत रूप में सामने रखा। उनके शब्दों में, यह ऑपरेशन इस बात का उदाहरण है कि किस तरह अलग-अलग सैन्य इकाइयां एक साझा रणनीति के तहत काम कर सकती हैं।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि भविष्य की लड़ाइयों में जीत उसी की होगी, जो अलग-अलग डोमेन—जमीन, हवा, समुद्र, साइबर, अंतरिक्ष और सूचना—को एक साथ जोड़कर इस्तेमाल कर सके।

पहलगाम हमले के बाद शुरू हुआ था ऑपरेशन

दरअसल, ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि बेहद संवेदनशील रही। पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 भारतीय पर्यटकों की जान चली गई थी। इस हमले के बाद भारत ने मई में जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान स्थित आतंकी लॉन्चपैड्स को निशाना बनाया।

यह ऑपरेशन सिर्फ सैन्य प्रतिक्रिया नहीं था, बल्कि रणनीतिक रूप से योजनाबद्ध बहु-स्तरीय कार्रवाई थी, जिसमें तीनों सेनाओं की भूमिका अहम रही।

आधुनिक युद्ध: अब सीमाओं से परे की लड़ाई

सेना प्रमुख ने साफ शब्दों में कहा कि आज का युद्ध “घोषित युद्ध” नहीं होता, बल्कि यह बिखरे हुए और कई मोर्चों पर एक साथ चलने वाला संघर्ष है।

उनके अनुसार:

  • युद्ध अब केवल सीमा रेखाओं तक सीमित नहीं
  • इसमें कई हितधारक और कई स्तर शामिल होते हैं
  • हर डोमेन एक-दूसरे को प्रभावित करता है

उन्होंने कहा, “अब सवाल यह नहीं है कि डोमेन आपस में जुड़ते हैं या नहीं, बल्कि यह है कि युद्ध के दौरान यह जुड़ाव किस तरह काम करता है।”

स्थलीय क्षेत्र बनाम स्थलीय बल: समझना क्यों जरूरी

जनरल द्विवेदी ने एक अहम अंतर भी स्पष्ट किया—स्थलीय क्षेत्र (Land Domain) और स्थलीय बल (Land Forces) के बीच।

  • स्थलीय क्षेत्र केवल भौगोलिक ऑपरेशन एरिया को दर्शाता है
  • जबकि स्थलीय बल उन सभी छह डोमेन का समन्वय है, जो एक साथ काम करते हैं

यानी, अब युद्ध सिर्फ जमीन पर मौजूद सैनिकों से नहीं जीता जाता, बल्कि डिजिटल, साइबर और अंतरिक्ष जैसी अदृश्य ताकतें भी उतनी ही निर्णायक हो गई हैं।

3D युद्धक्षेत्र: नक्शे की रेखाओं से आगे की सोच

सेना प्रमुख ने आधुनिक युद्ध को “3D बैटलस्पेस” बताते हुए कहा कि अब युद्धक्षेत्र एक सीधी रेखा नहीं रहा।

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया:

  • साइबर ऑपरेशन सीधे लोगों की सोच (cognitive space) को प्रभावित करते हैं
  • अंतरिक्ष से मिलने वाली जानकारी लक्ष्य तय करने में मदद करती है
  • इलेक्ट्रॉनिक युद्ध हर फ्रीक्वेंसी पर एक साथ प्रभाव डालता है

इस पूरे परिदृश्य में कमांडरों को सिर्फ जमीन पर नहीं, बल्कि हर डोमेन में एक साथ जागरूक रहना पड़ता है।

तीनों सेनाओं का तालमेल: सफलता की असली कुंजी

जनरल द्विवेदी ने इस बात पर खास जोर दिया कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता किसी एक सेना की वजह से नहीं थी।

  • जमीनी खुफिया नेटवर्क से मिली जानकारी
  • साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध की इनपुट
  • वायुसेना की सटीक कार्रवाई
  • नौसेना की रणनीतिक तैनाती

इन सबने मिलकर एक ऐसा समन्वय बनाया, जिसने ऑपरेशन को सफल बनाया।

उन्होंने स्पष्ट कहा, “किसी एक डोमेन ने इस अभियान का फैसला नहीं किया, बल्कि सभी ने मिलकर परिणाम तय किया।”

निष्कर्ष: भविष्य की लड़ाइयों का ट्रेलर है ऑपरेशन सिंदूर

अगर व्यापक नजरिए से देखें तो ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि आने वाले युद्धों की झलक है। यह बताता है कि भविष्य में जीत केवल हथियारों से नहीं, बल्कि समन्वय, तकनीक और रणनीतिक सोच से तय होगी।

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