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पश्चिमी विक्षोभ से बदलेगा देश का मौसम: पहाड़ों पर बारिश-बर्फबारी, मैदानी इलाकों में गरज-चमक के आसार

On: February 15, 2026
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पश्चिमी विक्षोभ से बदलेगा देश का मौसम- पहाड़ों पर बारिश-बर्फबारी
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नई दिल्ली (15 फरवरी 2026): फरवरी का महीना आमतौर पर मौसम के संतुलन का समय माना जाता है, लेकिन इस बार पश्चिमी विक्षोभ ने देश के मौसम को अचानक बदलने के संकेत दे दिए हैं। उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों में जहां बारिश और बर्फबारी की संभावना बन रही है, वहीं मैदानी क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश के आसार जताए जा रहे हैं।

मौसम विभाग के अनुसार 16 फरवरी से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है, जो खास तौर पर पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों को प्रभावित करेगा। इसका असर धीरे-धीरे उत्तर भारत के मैदानी हिस्सों तक पहुंचेगा। मौसम विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे सिस्टम फरवरी के दूसरे पखवाड़े में तापमान के उतार-चढ़ाव को तेज कर देते हैं, जिससे एक ही समय देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग मौसम देखने को मिलता है।

पहाड़ी राज्यों में बारिश और बर्फबारी की संभावना

मौसम विभाग की ताजा जानकारी के मुताबिक 16 से 18 फरवरी के बीच हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद के कई इलाकों में बारिश और बर्फबारी हो सकती है। पहाड़ी क्षेत्रों में इस बदलाव को किसानों और पर्यटन कारोबार से जुड़े लोग खास नजर से देख रहे हैं, क्योंकि बर्फबारी से जहां जल स्रोतों को फायदा मिलता है, वहीं यात्रा और आवाजाही पर असर पड़ सकता है।

हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में 15 फरवरी तक सुबह के समय घने कोहरे की भी संभावना जताई गई है, जिससे विजिबिलिटी कम रहने की आशंका है।

मैदानी इलाकों में गरज-चमक और हल्की बारिश

17 फरवरी को पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तरी राजस्थान में हल्की बारिश के साथ गरज-चमक हो सकती है। हालांकि भारी बारिश की संभावना नहीं है, लेकिन बादलों की आवाजाही और हवाओं में बदलाव से तापमान में हल्का उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जब पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होता है तो उत्तर भारत में अचानक बादल छाने और हल्की वर्षा जैसे हालात बन जाते हैं, जिससे दिन और रात के तापमान में अंतर महसूस होता है।

एक देश, कई मौसम: कहीं ठंड तो कहीं गर्मी

दिलचस्प बात यह है कि जहां उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में ठंड और कोहरा जारी है, वहीं दक्षिण और तटीय क्षेत्रों में गर्मी और उमस बढ़ने लगी है। कर्नाटक के कारवार में अधिकतम तापमान 37.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि पश्चिम राजस्थान के सीकर में न्यूनतम तापमान 6.5 डिग्री सेल्सियस रहा।

यह बड़ा तापमान अंतर साफ संकेत देता है कि देश फिलहाल मौसम के संक्रमण काल से गुजर रहा है, जहां सर्दी विदा लेने की तैयारी में है और गर्मी धीरे-धीरे दस्तक दे रही है।

जेट धारा भी बना रही असर

मौसम विभाग के मुताबिक इस समय उत्तर भारत के ऊपर तेज गति वाली उपोष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट धारा सक्रिय है। यही सिस्टम पश्चिमी विक्षोभ को ताकत देता है और हिमालयी इलाकों में बारिश और बर्फबारी की परिस्थितियां बनाता है। आने वाले दिनों में इसका असर आगे के मौसम पैटर्न को भी प्रभावित कर सकता है।

बदलते मौसम के बीच सावधानी जरूरी

मौसम में तेजी से हो रहे बदलाव को देखते हुए विशेषज्ञ लोगों को स्वास्थ्य और यात्रा दोनों स्तर पर सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। पहाड़ी इलाकों में यात्रा की योजना बना रहे लोगों को मौसम अपडेट लगातार देखते रहने की जरूरत है, वहीं मैदानी क्षेत्रों में तापमान में उतार-चढ़ाव से बचने के लिए सुबह-शाम हल्के गर्म कपड़े साथ रखना फायदेमंद रहेगा।

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