लखनऊ, Tue 03 Feb 2026 — राजधानी के होटल ताज में आयोजित फार्मा कॉन्क्लेव 1.0 ने उत्तर प्रदेश की औद्योगिक महत्वाकांक्षा को साफ शब्दों में सामने रखा। वैश्विक निवेशकों और दवा उद्योग के अग्रणी उद्यमियों की मौजूदगी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानून-व्यवस्था, निवेश माहौल और फार्मा सेक्टर के लिए राज्य की तैयारी पर विस्तृत दृष्टि रखी। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर राज्य सरकार के साथ 11 कंपनियों ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए, जिनके तहत मेडिकल डिवाइस और नई दवाओं पर संयुक्त शोध को बढ़ावा दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट कहा कि “हमने जीरो टॉलरेंस की नीति तय की है… अब अपराधियों में कोई अपना-पराया नहीं होगा।” उन्होंने पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस के नियंत्रण का उल्लेख करते हुए कहा कि सुरक्षा और प्रशासनिक सख्ती ने ही निवेश के भरोसे को जन्म दिया है।
राज्य को अब तक लगभग 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त होने, बेरोजगारी दर के न्यूनतम स्तर और उपलब्ध लैंड बैंक का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि ललितपुर में प्रदेश के पहले फार्मा पार्क के लिए भूमि अधिग्रहण कर विकास कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है। साथ ही, सेंटर लेवल की प्रयोगशाला सुविधा पहले से उपलब्ध होने की बात भी कही।
उद्योग जगत की आवाज़: ‘रेड टेप नहीं, रेड कार्पेट’
उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने मंच से उत्तर प्रदेश के बदले माहौल पर खुलकर बातें रखीं।
राज्यसभा सदस्य और रामकी ग्रुप के चेयरमैन अयोध्या रामी रेड्डी ने कहा कि पिछले चार दशकों में यूपी में ऐसा सकारात्मक वातावरण पहले नहीं देखा। उनके अनुसार, कानून-व्यवस्था, जवाबदेही और प्रशासनिक पारदर्शिता ने दीर्घकालिक विकास की मजबूत नींव रखी है।
टोरेंट ग्रुप के वाइस चेयरमैन जीनल मेहता ने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनकी टीम ने यूपी के 20 जिलों में काम किया, लेकिन कहीं भी ‘रेड टेप’ का सामना नहीं करना पड़ा। “आज यूपी निवेशकों को रेड कार्पेट ट्रीटमेंट दे रहा है,” उन्होंने जोड़ा।
पुरानी यादें, नया भरोसा: उद्योगपतियों के अनुभव
मैनकाइंड फार्मा के चेयरमैन रमेश जुनेजा ने 2001 की एक दर्दनाक घटना का जिक्र किया, जब अपहरण की घटना के बाद उन्हें प्रदेश छोड़ना पड़ा था। उन्होंने कहा, “हर रात के बाद सुबह होती है… आज वह सुबह यूपी में दिखती है।” उनके अनुसार, देर रात भी सुरक्षा का एहसास निवेशकों के भरोसे की सबसे बड़ी वजह है।
फार्मा सेक्टर के वैश्विक परिप्रेक्ष्य पर बोलते हुए Dr. Reddy’s Laboratories के चेयरमैन सतीश रेड्डी ने कोविड काल में भारत की भूमिका को याद किया और यूपी की नीतियों को प्रभावी बताया।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और मैनपावर पर जोर देते हुए Zydus Lifesciences के चेयरमैन पंकज रमनभाई पटेल ने कहा कि भूमि, बिजली, पानी और प्रशिक्षित मानव संसाधन—ये चारों तत्व यूपी में उपलब्ध हैं, जो इसे फार्मा और हेल्थकेयर के लिए आदर्श बनाते हैं।
वहीं, पद्मश्री से सम्मानित Sun Pharmaceutical Industries के चेयरमैन दिलीप सांघवी ने यूपी को देश का सबसे सुरक्षित स्थान बताते हुए यहां मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने की इच्छा जताई।
निष्कर्ष: फार्मा कॉन्क्लेव 1.0 से उभरा निवेश का भरोसा
फार्मा कॉन्क्लेव 1.0 केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह संदेश देने का मंच बना कि उत्तर प्रदेश अब फार्मा, मेडिकल डिवाइस और रिसर्च के क्षेत्र में बड़े निवेश के लिए तैयार है। कानून-व्यवस्था पर सख्ती, बुनियादी ढांचे की उपलब्धता, और प्रशासनिक पारदर्शिता—इन तीन स्तंभों पर खड़ा यह मॉडल निवेशकों के भरोसे को मजबूत करता दिखा।
सरकार और उद्योग जगत के बीच हुए एमओयू आने वाले समय में राज्य को फार्मा हब बनाने की दिशा में ठोस कदम साबित हो सकते हैं।











