विशाखापत्तनम/04 अगस्त 2026: भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (POWERGRID) की दो महत्वपूर्ण पारेषण परियोजनाओं का लोकार्पण किया। इसके साथ ही उन्होंने एक बड़ी नई हरित ऊर्जा परियोजना की आधारशिला भी रखी।
इन परियोजनाओं को देश में अक्षय ऊर्जा के विस्तार और बिजली ग्रिड को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इससे आंध्र प्रदेश के सौर और पवन ऊर्जा क्षेत्रों से पैदा होने वाली बिजली को देश के राष्ट्रीय ग्रिड तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
पीएम मोदी ने हरित ऊर्जा परियोजनाओं से बढ़ाई स्वच्छ ऊर्जा की रफ्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशाखापत्तनम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले महारत्न सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम पावरग्रिड की दो प्रमुख ट्रांसमिशन परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित किया। इसके अलावा उन्होंने कुरनूल-IV नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र (चरण-I) से जुड़ी नई परियोजना का शिलान्यास किया।
केंद्र सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक देश में 500 गीगावाट (GW) गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित बिजली क्षमता हासिल करना है। पीएम मोदी द्वारा शुरू की गई ये परियोजनाएं इसी लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद
लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस. अब्दुल नज़ीर, गोवा के राज्यपाल पुसापति अशोक गजपति राजू, मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री के. पवन कल्याण सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
इस अवसर पर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू, केंद्रीय राज्य मंत्री (ग्रामीण विकास और संचार) डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी, केंद्रीय राज्य मंत्री (भारी उद्योग और इस्पात) भूपति राजू श्रीनिवासन वर्मा तथा आंध्र प्रदेश सरकार के आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं शिक्षा मंत्री नारा लोकेश भी उपस्थित रहे।
पीएम मोदी ने जिन हरित ऊर्जा परियोजनाओं का किया लोकार्पण, जानिए उनकी क्षमता
कुरनूल पवन और सौर ऊर्जा क्षेत्र परियोजना
कुरनूल पवन एवं सौर ऊर्जा क्षेत्र (भाग-A और भाग-B) के लिए तैयार की गई ट्रांसमिशन प्रणाली को लगभग 3,547 करोड़ रुपये के निवेश से विकसित किया गया है।
यह प्रणाली क्षेत्र में पैदा होने वाली अक्षय ऊर्जा को सुचारू रूप से दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने में मदद करेगी। इससे आंध्र प्रदेश के बड़े नवीकरणीय ऊर्जा केंद्रों की बिजली आपूर्ति व्यवस्था और मजबूत होगी।
अनंतपुरम और कुरनूल सौर ऊर्जा क्षेत्र परियोजना
अनंतपुरम (2,500 मेगावाट) और कुरनूल (1,000 मेगावाट) सौर ऊर्जा क्षेत्रों से संबंधित ट्रांसमिशन परियोजना को करीब 823 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है।
इस परियोजना का उद्देश्य इन क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाली सौर ऊर्जा को नेशनल ग्रिड से जोड़ना है, जिससे देश के अलग-अलग हिस्सों में स्वच्छ ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ सकेगी।
कुरनूल-IV परियोजना से जुड़ेगा 4.5 GW अतिरिक्त ग्रीन एनर्जी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस नई परियोजना की आधारशिला रखी, वह कुरनूल-IV नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र (चरण-I) है। इस परियोजना पर लगभग 5,550 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
यह 4.5 गीगावाट क्षमता वाली पारेषण प्रणाली होगी, जो कुरनूल क्षेत्र से अतिरिक्त हरित ऊर्जा को राष्ट्रीय बिजली नेटवर्क तक पहुंचाने में सक्षम बनाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े स्तर पर अक्षय ऊर्जा उत्पादन के लिए मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क सबसे अहम जरूरतों में से एक है।
2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को मिलेगा बल
भारत तेजी से सौर और पवन ऊर्जा क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहा है। हालांकि, केवल बिजली उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे देश के अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए आधुनिक और मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क की भी आवश्यकता होती है।
पावरग्रिड की ये परियोजनाएं इसी दिशा में अहम भूमिका निभाएंगी। इनके माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा का बेहतर प्रबंधन होगा और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
पावरग्रिड की मौजूदा क्षमता भी लगातार बढ़ रही
30 जून 2026 तक पावरग्रिड देशभर में 291 उप-केंद्रों, 1,86,595 सर्किट किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइनों और 6,34,516 एमवीए ट्रांसफॉर्मर क्षमता का संचालन कर रहा है।
कंपनी ने आधुनिक तकनीक और डिजिटल समाधानों के इस्तेमाल से अपने ट्रांसमिशन सिस्टम की उपलब्धता 99.80 प्रतिशत से अधिक बनाए रखी है। यही क्षमता देश में बढ़ती बिजली मांग और नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार को सहारा दे रही है।













