High Speed Rail प्रोजेक्ट के इंजीनियरों से पीएम मोदी की अपील
नई दिल्ली/सूरत, रविवार 16 नवंबर 2025 — मुंबई–अहमदाबाद High Speed Rail कॉरिडोर पर काम कर रही इंजीनियरों की टीम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनुरोध किया है कि वे अपने हर छोटे-बड़े अनुभव को विस्तार से लिखें। उनके अनुसार, यह डॉक्यूमेंटेशन न केवल भारत की आने वाली हाई स्पीड रेल परियोजनाओं के लिए मार्ग तैयार करेगा, बल्कि तकनीकी ज्ञान को सुरक्षित रखकर “आत्मनिर्भर भारत” की दिशा में एक मजबूत नींव भी बनाएगा।
पीएम मोदी शनिवार को सूरत में मुंबई–अहमदाबाद हाई स्पीड रेलवे (MAHSR) के इंजीनियरों और कर्मचारियों से सीधे संवाद कर रहे थे। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि परियोजना के अनुभवों को यदि “ब्लू बुक” की तरह संकलित किया जाए, तो भारत भविष्य में बड़े पैमाने पर बुलेट ट्रेन नेटवर्क स्थापित करने की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा सकता है।
“बार-बार प्रयोग की ज़रूरत नहीं, सीख को दोहराएं” – पीएम मोदी
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि भारत को हर नई परियोजना में शून्य से शुरुआत करने की आदत छोड़नी होगी।
उन्होंने कहा — “दोहराव तभी सार्थक है जब हमें पता हो कि कौन-सा कदम क्यों उठाया गया। बिना उद्देश्य के दोहराव सिर्फ समय और संसाधन की बर्बादी है।”
मोदी ने इंजीनियरों से यह भी आग्रह किया कि वे रिकॉर्ड-कीपिंग को सिर्फ तकनीकी काम न समझें, बल्कि इसे अगली पीढ़ी के छात्रों और युवा इंजीनियरों के लिए एक विरासत (legacy) बनाने का माध्यम मानें।
उनके अनुसार, “जब कोई टीम राष्ट्रहित में कोई बड़ा योगदान करती है, तो वह कार्य खुद एक प्रेरणा बन जाता है—उसी तरह जैसे भारत के पहले उपग्रह लॉन्च के वक्त वैज्ञानिकों ने महसूस किया था।”
इंजीनियरों ने साझा किए अपने अनुभव, पीएम मोदी ने पूछे व्यक्तिगत सवाल
पीएम मोदी ने गुजरात के नवसारी स्थित नॉइज बैरियर फैक्ट्री में काम कर रहीं केरल की एक इंजीनियर से पूछा कि भारत की पहली बुलेट ट्रेन बनाने का अनुभव उन्हें व्यक्तिगत रूप से कैसा लगा। इंजीनियर ने इसे अपने परिवार के लिए “ड्रीम प्रोजेक्ट” और “गर्व का पल” बताया।
वहीं बेंगलुरु की मुख्य इंजीनियरिंग प्रबंधक श्रुति ने बताया कि टीम हर चरण में लाभ–हानि का मूल्यांकन करती है और त्रुटिरहित परिणाम सुनिश्चित करने के लिए अलग-अलग तकनीकी विकल्पों पर काम करती है। यह तरीका परियोजना को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
High Speed Rail: 508 किमी की ऐतिहासिक परियोजना
एमएएचएसआर परियोजना कुल 508 किलोमीटर लंबी है, जिसमें 352 किमी गुजरात और दादरा एवं नगर हवेली में, जबकि 156 किमी महाराष्ट्र में पड़ते हैं।
यह कॉरिडोर साबरमती, अहमदाबाद, वडोदरा, भरूच, सूरत, बिलिमोरा, वापी, बोईसर, विरार, ठाणे और मुंबई सहित कई प्रमुख शहरों को जोड़ता है।
परियोजना का 85% हिस्सा (लगभग 465 किलोमीटर) पुलों के ऊपर बनाया जा रहा है, जिससे जमीन पर न्यूनतम हस्तक्षेप और यात्रा में अधिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
अब तक 326 किलोमीटर पुल निर्माण पूरा हो चुका है और 25 में से 17 नदी पुल तैयार हो चुके हैं।
प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान के अनुसार, श्रमिकों ने पीएम मोदी को भरोसा दिलाया कि काम निर्धारित गति से, बिना किसी बड़ी बाधा के आगे बढ़ रहा है।
मुंबई–अहमदाबाद High Speed Rail यात्रा समय घटाकर केवल दो घंटे करेगी
परियोजना पूरी होने के बाद बुलेट ट्रेन मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा को मात्र दो घंटे में पूरा कर देगी।
यह परिवर्तन न केवल लोगों की आवाजाही को आसान बनाएगा बल्कि पूरे कॉरिडोर में व्यापार, पर्यटन, उद्योग और आर्थिक गतिविधियों में बड़ा उछाल लाने की उम्मीद है।
भारत के आधुनिक परिवहन ढांचे में यह परियोजना एक ट्रांसफ़ॉर्मेटिव माइलस्टोन मानी जा रही है—और पीएम मोदी का मानना है कि इस सफर की असली ताकत उन इंजीनियरों की मेहनत में है, जो आज भविष्य के भारत की नींव लिख रहे हैं।











