नई दिल्ली, 9 मार्च 2026 (सोमवार)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को बजट वेबिनार में देश की शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं, कौशल विकास और खेलों को भविष्य की अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव बताते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति के जरिए भारत अपने एजुकेशन सिस्टम को लगातार आधुनिक बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में शिक्षा को सिर्फ डिग्री तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि उसे वास्तविक अर्थव्यवस्था (Real World Economy) से जोड़ना बेहद जरूरी है। यही कारण है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को उद्योग, तकनीक और कौशल आधारित अवसरों से जोड़ने के लिए लगातार काम कर रही है।
प्रधानमंत्री केंद्रीय बजट 2026 की घोषणाओं को जमीन पर उतारने के लिए आयोजित ‘जन आकांक्षाओं की अर्थव्यवस्था’ विषय पर वेबिनार को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने शिक्षा, कौशल, स्वास्थ्य, पर्यटन, खेल और संस्कृति जैसे क्षेत्रों को भारत के विकास का मूलभूत आधार बताया।
‘जन आकांक्षाओं की अर्थव्यवस्था’ सिर्फ विचार नहीं, सरकार का संकल्प
वेबिनार में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि ‘जन आकांक्षाओं की अर्थव्यवस्था’ कोई साधारण चर्चा का विषय नहीं है, बल्कि यह सरकार का स्पष्ट संकल्प है।
उन्होंने कहा कि भारत के युवा आज सिर्फ नौकरी की तलाश तक सीमित नहीं रहना चाहते। गांव से लेकर शहर तक नई पीढ़ी में कुछ नया करने और आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिखाई देता है।
प्रधानमंत्री के अनुसार, पिछले एक दशक में देश के सामाजिक और आर्थिक माइंडसेट में बड़ा बदलाव आया है। अब युवा नवाचार, स्टार्टअप और नई तकनीकों के जरिए अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था को भी उसी गति से बदलना और आधुनिक बनाना अनिवार्य हो गया है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ रहे रोजगार के अवसर
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में स्वास्थ्य क्षेत्र की बढ़ती संभावनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश का स्वास्थ्य ढांचा काफी मजबूत हुआ है।
उन्होंने बताया कि देश के सैकड़ों जिलों में नए मेडिकल कॉलेज स्थापित हुए हैं और आयुष्मान भारत योजना तथा आरोग्य मंदिरों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच दूरदराज के गांवों तक बढ़ी है।
पीएम मोदी ने विशेष रूप से केयर इकोनॉमी (Care Economy) की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या तेजी से बढ़ने वाली है। इसके चलते स्वास्थ्य सेवाओं और केयरगिवर्स की मांग भी बढ़ेगी।
प्रधानमंत्री ने बताया कि दुनिया के कई देशों में पहले से ही केयरगिवर्स की भारी मांग है। ऐसे में भारत के युवाओं के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में कौशल आधारित रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
उन्होंने विशेषज्ञों से सुझाव देने का आग्रह करते हुए कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए नए ट्रेनिंग मॉडल और साझेदारी (Partnership Models) विकसित किए जाने चाहिए, ताकि देश का प्रशिक्षण तंत्र और मजबूत हो सके।
टेली-मेडिसिन के विस्तार पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने टेली-मेडिसिन की बढ़ती उपयोगिता पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक की मदद से अब दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोग भी डॉक्टरों से आसानी से परामर्श ले पा रहे हैं।
हालांकि उन्होंने यह भी माना कि इस सुविधा को और प्रभावी बनाने के लिए जागरूकता और उपयोग में सहजता बढ़ाने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर टेली-मेडिसिन का सही तरीके से विस्तार किया जाए, तो यह ग्रामीण भारत के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता में बड़ा बदलाव ला सकता है।
नई शिक्षा नीति से मिलेगा भविष्य की तकनीकों को बल
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में नई शिक्षा नीति को भारत के शिक्षा सुधार का मजबूत आधार बताया। उन्होंने कहा कि इस नीति ने शिक्षा को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप ढालने का रास्ता खोल दिया है।
प्रधानमंत्री के अनुसार, आने वाले समय में शिक्षा में ऐसे विषयों पर अधिक ध्यान देना होगा जो भविष्य की अर्थव्यवस्था को दिशा देंगे। इनमें विशेष रूप से शामिल हैं—
- ऑटोमेशन
- डिजिटल इकोनॉमी
- डिजाइन आधारित विनिर्माण
- उन्नत तकनीक आधारित शिक्षा
उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को रोजगार और उद्यमिता से जोड़ना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। इसी सोच के तहत देश में यूनिवर्सिटी टाउनशिप जैसे नए मॉडल विकसित किए जा रहे हैं।
STEM शिक्षा में बढ़ती बेटियों की भागीदारी
प्रधानमंत्री मोदी ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में बेटियों की बढ़ती भागीदारी पर भी खुशी जताई।
उन्होंने कहा कि STEM (Science, Technology, Engineering, Mathematics) विषयों में आज बड़ी संख्या में छात्राएं आगे आ रही हैं। यह भारत के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है।
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि जब देश भविष्य की तकनीकों के लिए खुद को तैयार कर रहा है, तब यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि किसी भी बेटी को अवसरों की कमी के कारण पीछे न रहना पड़े।
खेलों को राष्ट्रीय विकास की धारा बताया
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में खेलों के महत्व पर भी विस्तार से बात की।
उन्होंने कहा कि युवा शक्ति तभी राष्ट्रीय शक्ति में बदलती है जब वह स्वस्थ, अनुशासित और आत्मविश्वासी हो। इसी सोच के तहत पिछले कुछ वर्षों में खेलों को राष्ट्रीय विकास की मुख्य धारा में शामिल किया गया है।
उन्होंने खेलो इंडिया जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन कार्यक्रमों ने देश के स्पोर्ट्स इकोसिस्टम को नई ऊर्जा दी है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अब जरूरत इस बात की है कि छोटे शहरों और कस्बों से भी प्रतिभाओं की पहचान और बेहतर तरीके से की जाए। साथ ही खिलाड़ियों को मिलने वाले स्ट्रक्चर्ड फाइनेंशियल सपोर्ट और प्रशिक्षण व्यवस्था को भी और पेशेवर बनाया जाना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की तैयारी
प्रधानमंत्री ने यह भी याद दिलाया कि आने वाले वर्षों में भारत में कॉमनवेल्थ खेलों के आयोजन की संभावना है और देश भविष्य में ओलिंपिक की मेजबानी के लिए भी प्रयास कर रहा है।
ऐसे में जरूरी है कि कम उम्र के खिलाड़ियों की पहचान कर उन्हें समय रहते प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रदर्शन और मजबूत हो सके।
पर्यटन और संस्कृति में रोजगार की संभावनाएं
प्रधानमंत्री मोदी ने अंत में कहा कि पर्यटन और संस्कृति भी ऐसे क्षेत्र हैं जो देश में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविध पर्यटन स्थलों को अगर व्यवस्थित तरीके से विकसित किया जाए, तो यह अर्थव्यवस्था को नई गति देने के साथ-साथ लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोल सकता है।













