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पीएम मोदी ने वेनेजुएला कार्यवाहक राष्ट्रपति से फोन पर की बात, द्विपक्षीय साझेदारी को मजबूत करने पर हुई गहन चर्चा

On: January 30, 2026
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पीएम मोदी ने वेनेजुएला कार्यवाहक राष्ट्रपति से फोन पर की बात
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नई दिल्ली, 30 जनवरी 2026 (शुक्रवार) — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज वेनेज़ुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज से फोन पर विस्तृत बातचीत की, जिसमें दोनों नेताओं ने भारत-वेनेज़ुएला द्विपक्षीय साझेदारी को और मजबूत करने पर गहन चर्चा की।

यह पहला संवाद है जब अमेरिका की हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों के बीच सीधी बात हुई है। बातचीत को राजनयिक सियासत और रणनीतिक साझेदारी के दृष्टिकोण से अहम बताया जा रहा है।

मोदी-रोड्रिगेज बातचीत में क्या रहा मुख्य फोकस?

प्रधानमंत्री मोदी ने वार्ता के दौरान वेनेज़ुएला के राजनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण को समझते हुए कहा कि:

  • भारत और वेनेज़ुएला के बीच मौजूद बहुआयामी सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाना आवश्यक है।
  • दोनों देशों के बीच वाणिज्यिक, ऊर्जा और तकनीकी क्षेत्र में साझेदारी को नियमित रूप से सुदृढ़ करने पर सहमति बनी।
  • प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि भारत हमेशा संवाद, परस्पर सम्मान और सहयोग के मार्ग पर ही आगे बढ़ना चाहता है।

मोदी ने इस वार्ता को लेकर अपने सोशल मीडिया पोस्ट (एक्स) में लिखा:

“वेनेज़ुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज से बात हुई। हमने द्विपक्षीय साझेदारी को और गहरा करने तथा विस्तार देने पर सकारात्मक विचार साझा किए।”

इस बयान से स्पष्ट होता है कि दोनों देशों ने राजनीतिक मतभेदों को पीछे रखकर व्यावहारिक साझेदारी पर ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लिया है।

डेल्सी रोड्रिगेज: राजनीति के उतार-चढ़ाव के बीच संभाला नेतृत्व

डेल्सी रोड्रिगेज ने 5 जनवरी 2026 को वेनेज़ुएला की अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में अपने पद का कार्यभार संभाला था। यह तब हुआ था जब उनके पूर्ववर्ती निकोलस मादुरो को अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें न्यूयॉर्क, यूएसए में मुकदमे का सामना कराने के लिए ले जाया गया।

राजनीतिक स्थिरता की तलाश में लगे देश के लिए यह बदलाव न केवल आंतरिक रणनीति का हिस्सा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसके प्रभाव देखे जा रहे हैं। ऐसे में भारत-वेनेज़ुएला संबंधों की दिशा को पुनर्पुष्टि देना दोनों राष्ट्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्या संकेत देती है यह बातचीत?

विश्लेषकों के अनुसार, यह वार्ता संकेत देती है कि:

  • भारत वैश्विक कूटनीति में संतुलन कायम रख रहा है।
  • राजनीतिक अस्थिरता के बावजूद भी आर्थिक और ऊर्जा साझेदारी को प्राथमिकता दी जा रही है।
  • वैश्विक शक्तियों के बीच गुजरात के नेतृत्व वाला भारत का स्थिर और शांतिपूर्ण राजनयिक रुख अब भी एक स्पष्ट संदेश देता है।

उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले हफ्तों में भारत-वेनेज़ुएला के बीच उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल की और बैठकें भी हो सकती हैं। इन बैठकों में ऊर्जा, कृषि, तकनीकी सहयोग और शिक्षा विनिमय कार्यक्रमों जैसे क्षेत्रों पर और ठोस समझौते होने की संभावनाएं हैं।

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