प्रयागराज | 23 जनवरी 2026, शुक्रवार। संगम की रेती पर शुक्रवार को आस्था का ऐसा ज्वार उठा, जिसने आंकड़ों के लिहाज़ से इतिहास रच दिया। Prayagraj Magh Mela Vasant Panchami Snan के अवसर पर प्रशासन के अनुसार रात आठ बजे तक 3.56 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम, गंगा और यमुना के विभिन्न घाटों पर डुबकी लगाई। यह संख्या पिछले वर्ष महाकुंभ-2025 की वसंत पंचमी पर दर्ज 2.57 करोड़ स्नानार्थियों से कहीं अधिक रही—यानी माघ मेले ने महाकुंभ का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया।
माघ शुक्ल पंचमी का प्रभाव गुरुवार रात से ही शुरू हो गया था, इसलिए भोर होते-होते घाटों पर स्नान का सिलसिला तेज हो गया, जो देर रात तक चलता रहा। संगम नोज, वीआईपी घाट, दशाश्वमेध, झूंसी, अरैल और फाफामऊ तक श्रद्धालुओं के लिए विस्तृत स्नान क्षेत्र बनाया गया था।
घाटों पर सुरक्षा, बैरिकेडिंग और जल पुलिस की चौकसी
भीड़ को एक जगह थमने से रोकने के लिए प्रशासन ने गंगा के दोनों किनारों पर बैरिकेडिंग कर स्नान क्षेत्र का दायरा बढ़ाया। घाटों पर आरएएफ की तैनाती रही, जबकि जल पुलिस की नावें और स्टीमर बैरिकेडिंग के बाहर लगातार गश्त करते रहे। पीएसी के जवान और गोताखोर टीमें सतर्क रहीं। संगम नोज पर दबाव सबसे अधिक रहा, जहां नियंत्रित प्रवेश-निकास व्यवस्था लागू की गई।
मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, अपर पुलिस आयुक्त, मेलाधिकारी और एसपी मेला सहित वरिष्ठ अधिकारी पूरे दिन क्षेत्र में भ्रमणशील रहे और व्यवस्थाओं की निगरानी करते रहे।
आस्था के दृश्य: अर्घ्य, दीपदान, पूजन और गोदान
रोक-टोक के बावजूद श्रद्धालुओं ने घाटों पर पूजन-अर्चन और दीपदान किया। अनेक लोग जल में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते नजर आए। घाट किनारे पारंपरिक घाटियों की अनुपस्थिति में श्रद्धालु थोड़ी दूरी पर तिलक-चंदन कराते दिखे। अक्षयवट मार्ग के संगम छोर पर पुरोहितों द्वारा गोदान कराया जा रहा था। अक्षयवट और लेटे हनुमान मंदिर में भी दर्शनार्थियों की लंबी कतारें रहीं। जयकारों और मंत्रोच्चार से पूरा मेला क्षेत्र भक्तिमय बना रहा।
तीन स्नान का संकल्प पूरा करने पहुंचे श्रद्धालु
ऐसे हजारों-लाखों श्रद्धालु भी पहुंचे, जो पौष से माघी पूर्णिमा तक कल्पवास नहीं कर सके थे, लेकिन तीन मुख्य स्नान का संकल्प लिए हुए थे। चित्रकूट से आए बुजुर्ग शंकरदास ने बताया कि उन्होंने मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और अब वसंत पंचमी पर डुबकी लगाकर अपना संकल्प पूरा किया। तीर्थ पुरोहित माधव शर्मा और अजय मिश्रा के अनुसार, ऐसे श्रद्धालुओं की संख्या इस बार उल्लेखनीय रही।
गोरखपुर से आईं 105 वर्षीय बसंती देवी को रामू गौड़ संगम स्नान कराने लेकर पहुंचे—यह दृश्य श्रद्धा और संकल्प का जीवंत उदाहरण बन गया।
स्नान के बाद घाटों पर ही प्रसाद-भोजन
कई श्रद्धालु स्नान के बाद घाट के किनारे बैठकर घर से लाए लड्डू-चूरा, सब्जी-पूड़ी का प्रसाद ग्रहण करते दिखे। देर रात तक मेले से विदा होने वालों की भीड़ बनी रही।
रूट डायवर्जन से पुराना शहर जाम
करोड़ों श्रद्धालुओं की आवाजाही के कारण शहर में यातायात का दबाव भी बढ़ा। नए यमुना पुल को बंद कर वाहनों का डायवर्जन पुराने यमुना पुल की ओर किया गया। रीवा, मिर्जापुर और चित्रकूट से आने वाले वाहनों को देव प्रयागम पार्किंग में रोका गया, जबकि शहर की ओर आने वाले वाहनों को लेप्रोसी चौराहे से डायवर्ट किया गया।
सुबह से ही पुराने यमुना पुल, रामबाग, जानसेनगंज, चौक, हीवेट रोड, मुट्ठीगंज और बागड़ चौराहे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। पांच-सात मिनट का रास्ता घंटों में तय हुआ। यातायात पुलिस ने मौके पर मोर्चा संभालकर जाम खुलवाया। श्रद्धालुओं की वापसी के बाद देर शाम शहरवासियों को राहत मिली।
निष्कर्ष
Prayagraj Magh Mela Vasant Panchami Snan ने आस्था, अनुशासन और प्रशासनिक समन्वय की ऐसी तस्वीर पेश की, जो लंबे समय तक याद रखी जाएगी। रिकॉर्ड तोड़ संख्या ने यह साबित किया कि संगम की पुकार आज भी करोड़ों लोगों को खींच लाती है—और हर डुबकी में विश्वास, परंपरा और संकल्प की कहानी छिपी होती है।










