नई दिल्ली, 27 जनवरी 2026 – कूटनीति अक्सर बंद कमरों की बैठकों, दस्तावेज़ों और भाषणों में दिखाई देती है, लेकिन मंगलवार की शाम राष्ट्रपति भवन में इसका एक अलग ही रूप देखने को मिला। यहां स्वाद, सुगंध और परंपरा के जरिए भारत ने यूरोपीय संघ (EU) के शीर्ष नेताओं के सामने अपनी सांस्कृतिक आत्मा को परोसा।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लेयेन के सम्मान में एक विशेष रात्रि भोज आयोजित किया। दोनों नेता भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि भी रहे। इस भोज में हिमालयी क्षेत्रों के पारंपरिक व्यंजनों को आधुनिक फाइन-डाइनिंग अंदाज़ में प्रस्तुत किया गया—जहां हर डिश एक कहानी कह रही थी।
यह सिर्फ एक दावत नहीं थी, बल्कि भारत की विविधता, आत्मीयता और परंपराओं का जीवंत प्रदर्शन था।
हिमालयी रसोई से सजी मेज
राष्ट्रपति भवन में तैयार किया गया विशेष मेन्यू कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर भारत की पारंपरिक पाक शैलियों से प्रेरित था। स्थानीय सामग्री, पुराने पकाने के तरीके और आधुनिक प्रस्तुति—इन तीनों का संतुलन इस दावत की खास पहचान बना।
शेफ प्रतीक साधु और कमलेश नेगी की टीम ने इस मेन्यू को तैयार किया, जिसका उद्देश्य था भारत की विरासत को वैश्विक मंच पर स्वाद के जरिए प्रस्तुत करना।
जखिया आलू से हुई शुरुआत
भोज की शुरुआत हुई जखिया आलू और हरी टमाटर की चटनी से। उत्तराखंड की पहाड़ियों में मिलने वाला जखिया मसाला अपनी विशिष्ट खुशबू के लिए जाना जाता है। इसके साथ परोसी गई झंगोरा की खीर में पहाड़ी नमक और व्हाइट चॉकलेट का अनोखा मेल था, जिसने पारंपरिक स्वाद को आधुनिक स्पर्श दिया।
सूप के रूप में परोसी गई सुंदरकला थिचोनी—कुट्टू की नूडल्स वाली डिश—में तिब्बती प्रभाव साफ झलक रहा था।
साइड डिश में परंपरा की झलक
मुख्य भोजन से पहले मेज पर जो साइड डिश सजीं, वे अपने आप में हिमालयी जीवनशैली का परिचय थीं:
- याक चीज कस्टर्ड
- भांग की मठरी
- बिच्छू बूटी की पत्तियां
- लौकी और सर्दियों की गाजर की कढ़ी
ये व्यंजन न सिर्फ स्वाद बल्कि स्थानीय जीवन, प्रकृति और परंपरा से गहरे जुड़े हुए हैं।
गुच्छी मशरूम बना आकर्षण का केंद्र
मुख्य भोजन में गुच्छी मशरूम और सोलन मशरूम को विशेष रूप से परोसा गया। इन्हें खसखस, जली हुई टमाटर की चटनी और हिमाचली स्वर्णू चावल के साथ प्रस्तुत किया गया। साथ में राई के पत्ते, कश्मीरी अखरोट, भुने टमाटर और अखुनी से बनी चटनियां थीं, जो पूर्वोत्तर के स्वाद को सामने लाती हैं।
यह संयोजन भारत की भौगोलिक विविधता को एक ही थाली में समेटे हुए था।
मीठे में भी हिमालय की खुशबू
डेज़र्ट में परोसा गया:
- हिमालयी रागी और कश्मीरी सेब का केक
- तिमरू और सी बकथॉर्न क्रीम
- खजूर और कच्चे कोको से बनी कॉफी कस्टर्ड
- हिमालयी शहद में सजी पर्सिमन
मीठे में भी स्थानीयता और नवाचार का संतुलन साफ दिखाई दिया।
क्यों खास रहा यह अवसर?
यह आयोजन इसलिए भी विशेष रहा क्योंकि पहली बार यूरोपीय संघ के दो शीर्ष नेता एक साथ भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बने। इसी दिन भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) भी हुआ, जिसे अधिकारियों ने ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ बताया।
ऐसे में यह रात्रि भोज सिर्फ औपचारिकता नहीं था, बल्कि कूटनीतिक रिश्तों को सांस्कृतिक आत्मीयता से जोड़ने का प्रयास था।
स्वाद के जरिए कूटनीति का संदेश
राष्ट्रपति भवन में आयोजित यह EU रात्रि भोज यह दर्शाता है कि भारत अपनी परंपराओं, स्वाद और सांस्कृतिक गहराई के जरिए भी विश्व मंच पर संवाद करना जानता है। जहां शब्दों की सीमाएं होती हैं, वहां भोजन अपनी भाषा खुद बोलता है—और मंगलवार की रात यही भाषा सबसे प्रभावी रही।













