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राष्ट्रपति मुर्मू और दक्षिण अफ्रीका के उपराष्ट्रपति की मुलाकात, व्यापार और निवेश बढ़ाने पर हुआ जोर

On: June 2, 2026
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राष्ट्रपति मुर्मू और दक्षिण अफ्रीका के उपराष्ट्रपति की मुलाकात
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नई दिल्ली|02 जून 2026: भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नई गति देने की दिशा में मंगलवार को एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। राष्ट्रपति मुर्मू और दक्षिण अफ्रीका के उपराष्ट्रपति शिपोकोसा पॉलस माशातिले के बीच राष्ट्रपति भवन में हुई मुलाकात में द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और वैश्विक मंचों पर सहयोग बढ़ाने जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की गई।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस दौरान दोनों देशों के बीच मौजूद मजबूत संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत और दक्षिण अफ्रीका की मित्रता केवल कूटनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह साझा संघर्षों, लोकतांत्रिक मूल्यों और विकास की समान आकांक्षाओं पर आधारित है। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के उपराष्ट्रपति का भारत दौरे पर स्वागत करते हुए इसे दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने वाला कदम बताया।

राष्ट्रपति मुर्मू और दक्षिण अफ्रीका के बीच व्यापार बढ़ाने पर विशेष जोर

बैठक में राष्ट्रपति मुर्मू ने भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच वर्तमान में हो रहे लगभग 15.5 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा दोनों देशों की आर्थिक क्षमता के अनुरूप अभी भी काफी कम है और इसमें उल्लेखनीय वृद्धि की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि व्यापार और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए ऐसा नीतिगत वातावरण तैयार किया जाना चाहिए, जिससे दोनों देशों की कंपनियों को नए अवसर मिल सकें। उनका मानना है कि व्यापारिक सहयोग में वृद्धि न केवल दोनों अर्थव्यवस्थाओं को लाभ पहुंचाएगी, बल्कि रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को भी गति देगी।

भारत-अफ्रीका फोरम समिट को लेकर भी हुई चर्चा

मुलाकात के दौरान भारत-अफ्रीका संबंधों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। राष्ट्रपति मुर्मू ने स्पष्ट किया कि भारत अफ्रीकी देशों के साथ अपनी साझेदारी को और मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भारत, अफ्रीकी संघ आयोग के साथ मिलकर भारत-अफ्रीका फोरम समिट के अगले संस्करण के आयोजन की दिशा में काम करेगा।

उल्लेखनीय है कि इबोला वायरस के प्रसार को लेकर उत्पन्न चिंताओं के कारण पिछले महीने नई दिल्ली में प्रस्तावित सम्मेलन को स्थगित करना पड़ा था। हालांकि दोनों पक्षों ने इस महत्वपूर्ण मंच को जल्द आयोजित करने की आवश्यकता पर सहमति जताई।

रणनीतिक साझेदारी और ग्लोबल साउथ की साझा आवाज

राष्ट्रपति मुर्मू ने याद दिलाया कि दक्षिण अफ्रीका पहला देश था जिसके साथ भारत ने वर्ष 1997 में रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध समय के साथ और अधिक मजबूत हुए हैं तथा वैश्विक मुद्दों पर दोनों की सोच में काफी समानता देखने को मिलती है।

उन्होंने कहा कि भारत और दक्षिण अफ्रीका लंबे समय से ग्लोबल साउथ की प्रभावशाली आवाज रहे हैं। उपनिवेशवाद के खिलाफ संघर्ष की साझा विरासत ने दोनों देशों को एक-दूसरे के और करीब लाया है। संयुक्त राष्ट्र, गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) और जी-20 जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दोनों देश लगातार सहयोग करते रहे हैं।

बैठक के अंत में दोनों नेताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि व्यापार, निवेश, शिक्षा, कौशल विकास और वैश्विक सहयोग के क्षेत्रों में बढ़ती साझेदारी आने वाले वर्षों में भारत और दक्षिण अफ्रीका के संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी। दोनों देशों ने इस बात पर भी सहमति जताई कि आपसी सहयोग का लाभ सीधे तौर पर दोनों देशों की जनता तक पहुंचना चाहिए, जिससे समावेशी विकास और साझा समृद्धि का लक्ष्य हासिल किया जा सके।

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