नई दिल्ली (08 फरवरी 2026) — केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दावा किया है कि भारत की संप्रभु मॉडल रणनीति अब ठोस परिणाम दे रही है। उन्होंने कहा कि एआई मिशन के तहत विकसित तकनीकों की सराहना वे लोग भी कर रहे हैं, जो पहले इस दिशा को लेकर सशंकित थे। मंत्री के मुताबिक, ‘Sarvam’ जैसे भारतीय प्रयास दिखाते हैं कि स्थानीय भाषाओं, स्थानीय जरूरतों और किफायती तकनीक पर फोकस का असर अब साफ दिख रहा है।
यह टिप्पणी उन्होंने टेक निवेश फर्म Menlo Ventures के पार्टनर डीडी (DD) के सोशल पोस्ट के जवाब में की। डीडी, जो पहले Glean और Google सर्च टीम से जुड़े रहे हैं, ने ‘Sarvam’ की तकनीक को लेकर सार्वजनिक रूप से अपनी राय बदली और खुलकर तारीफ की।
‘Sarvam’ की तकनीक पर बदली राय, खुले मंच पर सराहना
डीडी ने लिखा कि एक साल पहले उन्हें लगता था कि छोटी इंडिक (भारतीय) भाषाओं के लिए मॉडल ट्रेन करना सही दिशा नहीं है, लेकिन अब वे मानते हैं कि यह काम “बेहद मूल्यवान” साबित हुआ है। उनके अनुसार, ‘Sarvam’ के पास भारतीय भाषाओं के लिए बेहतरीन:
- Text-to-Speech (टेक्स्ट से आवाज़)
- Speech-to-Text (आवाज़ से टेक्स्ट)
- OCR (दस्तावेज़/चित्र से टेक्स्ट पहचान)
जैसी क्षमताएँ हैं, जो वास्तविक उपयोग में असर दिखा रही हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कीमतें वाजिब हैं, वेबसाइट सहज है, और यह प्रयास उस कमी को भर रहा है जिस पर बड़े वैश्विक लैब अक्सर अल्पकाल में ध्यान नहीं देते।
मंत्री का जवाब: युवा इंजीनियर, वैश्विक स्तर के नवाचार
वैष्णव ने कहा कि भारत के युवा इंजीनियर मटेरियल साइंस, हेल्थकेयर और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में एआई-आधारित नवाचार कर रहे हैं। “ये वही मॉडल हैं जिन्हें दुनिया अग्रणी उदाहरण के तौर पर देखेगी,” उन्होंने कहा। उनके अनुसार, संप्रभु मॉडल रणनीति का अर्थ है—डेटा, भाषा और उपयोग-परिदृश्य (use-cases) पर भारत का स्वायत्त फोकस, ताकि समाधान भारतीय संदर्भ में जन्म लें और यहीं से दुनिया तक जाएँ।
मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि स्थानीय भाषाओं पर काम केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि डिजिटल समावेशन (Digital Inclusion) की बुनियाद है—जहां तकनीक अंग्रेज़ी तक सीमित नहीं रहती।
‘इकोसिस्टम की कमी’ भरने का दावा
डीडी की टिप्पणी का एक अहम हिस्सा यह था कि ‘Sarvam’ उस इकोसिस्टम गैप को भर रहा है, जिस पर बड़े संस्थान शायद निकट भविष्य में ध्यान न दें। वैष्णव ने इसे भारत की रणनीतिक दिशा का प्रमाण बताया—“जहां जरूरत है, वहीं समाधान बनाया जाए।”
उनके मुताबिक, संप्रभु मॉडल रणनीति का फोकस यही है: किफायती, स्केलेबल और बहुभाषी एआई, जो शिक्षा, शासन, स्वास्थ्य और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सीधे लागू हो सके।
किफायती तकनीक और उपयोग में सरलता
डीडी ने अपनी पोस्ट में यह भी लिखा कि उन्हें हाल के वर्षों में भारत से आए किसी सॉफ्टवेयर उत्पाद को लेकर इतनी सकारात्मक अनुभूति याद नहीं। यह टिप्पणी, मंत्री के अनुसार, दिखाती है कि भारतीय एआई प्रयास अब केवल नीतिगत घोषणाएँ नहीं, बल्कि उपयोगी उत्पाद (usable products) के रूप में सामने आ रहे हैं।
समापन में वैष्णव ने कहा कि संप्रभु मॉडल रणनीति का उद्देश्य स्पष्ट है—भारत में बने मॉडल, भारत की भाषाओं और जरूरतों के लिए, और फिर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा। “आलोचक भी जब तारीफ करने लगें, तो समझिए दिशा सही है,” उन्होंने जोड़ा।













