लखनऊ, 1 फरवरी 2026। योगी आदित्यनाथ ने संत शिरोमणि रविदास की जयंती पर कहा कि संतों का तप और वाणी समाज को विपरीत परिस्थितियों में भी संबल देती है। कानपुर रोड स्थित बाराबिरवा के संत रविदास मठ में श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्होंने प्रतिमा और सुंदरीकरण कार्यों का लोकार्पण किया और संत परंपरा को सामाजिक एकता की धुरी बताया।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि संत रविदास का संदेश—सबको अन्न, सबको सम्मान—आज भी शासन की नीतियों में प्रतिबिंबित होता है। उन्होंने संत रामानंद परंपरा के योगदान का उल्लेख करते हुए सामाजिक समरसता को मजबूत करने की जरूरत दोहराई।
चीर गोवर्धन का विकास और दूर से दिखती प्रतिमा
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले सीर गोवर्धन (संत रविदास की जन्मस्थली) तक पहुंचना भी कठिन था, जबकि अब क्षेत्र का व्यापक विकास हुआ है। वहां स्थापित विशाल प्रतिमा पाँच किलोमीटर दूर से दिखाई देती है, जो आस्था के साथ-साथ क्षेत्रीय पहचान का भी प्रतीक बन चुकी है।
काशी की कर्मभूमि और समरसता का संदेश
संत रविदास ने काशी को अपनी कर्मभूमि बनाया और भक्ति के माध्यम से समाज को जोड़ने का काम किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी वाणी—“कोई भूखा न रहे”—आज भी नीति-निर्माण की प्रेरणा है। इसी संदर्भ में उन्होंने जनकल्याण योजनाओं के जरिए अंतिम व्यक्ति तक सुविधा पहुंचाने की बात कही।
माघ पूर्णिमा, आस्था और बड़ी भागीदारी
मुख्यमंत्री ने बताया कि माघ पूर्णिमा के अवसर पर त्रिवेणी संगम में एक करोड़ से अधिक श्रद्धालु गंगा स्नान कर चुके हैं। इसे उन्होंने आस्था, अनुशासन और सांस्कृतिक एकजुटता का उदाहरण बताया।
संत परंपरा से प्रेरित विकास की बात
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि संतों की वाणी कभी व्यर्थ नहीं जाती। समाज को जोड़ने, समानता और सेवा की भावना को मजबूत करने में संत परंपरा की भूमिका निर्णायक रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सनातन परंपरा से जुड़े अनेक स्थलों के सुंदरीकरण का कार्य चल रहा है, ताकि आस्था स्थल बेहतर सुविधाओं से जुड़ सकें।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक, विधान परिषद सदस्य डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल और अन्य जनप्रतिनिधि व श्रद्धालु उपस्थित रहे।
निष्कर्ष
संत रविदास जयंती पर दिया गया संदेश आस्था से आगे बढ़कर सामाजिक समरसता और विकास के संगम की बात करता है। संतों का तप—जैसा मुख्यमंत्री ने कहा—सिर्फ आध्यात्मिक साधना नहीं, बल्कि समाज को कठिन समय में दिशा देने वाली नैतिक शक्ति है।










