लखनऊ (15 फरवरी 2026)। उत्तर प्रदेश में किसानों को नकली और घटिया बीजों से बचाने के लिए सरकार एक बड़े डिजिटल बदलाव की ओर बढ़ रही है। अप्रैल 2026 से प्रदेश के सभी बीज विक्रेताओं के लिए ‘साथी पोर्टल’ पर जानकारी अपडेट करना अनिवार्य किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि यह कदम बीज उत्पादन से लेकर वितरण तक पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाएगा और किसानों को सही गुणवत्ता वाले बीज आसानी से उपलब्ध कराएगा।
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह सिर्फ एक डिजिटल प्लेटफॉर्म नहीं बल्कि किसानों के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा, जहां वे तकनीक के जरिए खुद बीज की प्रामाणिकता जांच सकेंगे।
साथी पोर्टल यूपी: बीज की पूरी ‘कुंडली’ अब मोबाइल पर
केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा विकसित SATHI (Seed Authentication, Traceability and Holistic Inventory) पोर्टल का सबसे बड़ा फायदा ट्रेसेबिलिटी सिस्टम है। अब बीज के हर पैकेट पर QR कोड होगा, जिसे किसान अपने मोबाइल से स्कैन कर बीज का स्रोत, उत्पादक कंपनी, प्रमाणन स्थिति और सप्लाई चेन की जानकारी देख सकेंगे।
कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तकनीक से नकली बीजों की बिक्री पर बड़ा लगाम लगेगा। अब तक किसान अक्सर पैकिंग देखकर ही बीज खरीद लेते थे, लेकिन नई व्यवस्था में खरीद से पहले ही उसकी असली पहचान सामने आ जाएगी।
प्रशिक्षण अभियान से तेज हुई तैयारी
नई व्यवस्था को लागू करने के लिए कृषि विभाग ने राज्य स्तर पर बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण अभियान चलाया है। कृषि निदेशालय में आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारत सरकार की तकनीकी टीम और महाराष्ट्र कृषि विभाग के विशेषज्ञों ने भाग लिया।
महाराष्ट्र की उप निदेशक (कृषि) डॉ. प्रीति सवाईराम ने अपने राज्य में इस पोर्टल की सफलता के अनुभव साझा किए, जिससे उत्तर प्रदेश में इसे प्रभावी तरीके से लागू करने की रणनीति तैयार की गई। अधिकारियों का कहना है कि तकनीक तभी सफल होती है, जब उसे जमीनी स्तर पर समझा और अपनाया जाए — इसलिए प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया गया है।
हर जिले में ‘मास्टर ट्रेनर’, 70% विक्रेता पहले ही पंजीकृत
अपर कृषि निदेशक (बीज एवं प्रक्षेत्र) अनिल कुमार पाठक के अनुसार, बीज उत्पादक संस्थाओं, एफपीओ और बीज कंपनियों के प्रतिनिधियों को ‘मास्टर ट्रेनर’ के रूप में तैयार किया गया है। ये ट्रेनर अब जिला स्तर पर थोक और फुटकर विक्रेताओं को पोर्टल का उपयोग सिखाएंगे।
अब तक करीब 70 प्रतिशत विक्रेता पोर्टल पर पंजीकरण करा चुके हैं। शेष विक्रेताओं को अगले 15 दिनों के अंदर प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। पंजीकरण में किसी भी तरह की तकनीकी दिक्कत आने पर स्थानीय जिला कृषि अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है ताकि प्रणाली समय पर लागू हो सके।
दो चरणों में लागू होगी डिजिटल व्यवस्था
योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। पहले चरण में उत्पादक संस्थाओं और एफपीओ को प्रशिक्षण दिया गया, जबकि दूसरे चरण में थोक और फुटकर विक्रेताओं को शामिल किया गया।
सरकार का लक्ष्य है कि अप्रैल से प्रदेश के हर जिले में यह व्यवस्था पूरी क्षमता के साथ काम करे, ताकि किसानों को बीज खरीदते समय पारदर्शिता और भरोसा दोनों मिल सकें।
क्यों अहम है ‘साथी पोर्टल’?
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि नकली बीज किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्याओं में से एक रहा है, जिससे फसल उत्पादन प्रभावित होता है और आर्थिक नुकसान भी होता है। QR कोड आधारित ट्रैकिंग सिस्टम किसानों को निर्णय लेने में सक्षम बनाएगा और बीज बाजार में जवाबदेही बढ़ाएगा।
यदि यह पहल सफल रहती है, तो उत्तर प्रदेश में कृषि क्षेत्र डिजिटल पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम आगे बढ़ाएगा — जहां किसान तकनीक के माध्यम से खुद अपनी फसल की शुरुआत सुरक्षित कर सकेंगे।









