लखनऊ (Fri, 13 Feb 2026)। उत्तर प्रदेश विधानसभा में शंकराचार्य विवाद को लेकर चल रही चर्चा के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सदन में सरकार का पक्ष स्पष्ट करते हुए कानून, मर्यादा और सनातन परंपरा के सम्मान पर जोर दिया। लखनऊ में शुक्रवार को हुई चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि शंकराचार्य का पद सनातन परंपरा में अत्यंत पवित्र और सर्वोच्च माना जाता है, इसलिए इसे किसी सामान्य उपाधि की तरह नहीं देखा जा सकता।
उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में धार्मिक पदों की अपनी मर्यादा और परंपराएं हैं, जिनका पालन करना हर व्यक्ति के लिए आवश्यक है। मुख्यमंत्री के अनुसार, व्यवस्था बनाए रखना और कानून का पालन सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
कानून से ऊपर कोई नहीं: सदन में सीएम का स्पष्ट संदेश
विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कानून सभी के लिए समान है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री का पद भी कानून से ऊपर नहीं हो सकता।
उन्होंने माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या पर करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे बड़े आयोजनों में सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़े नियम लागू करने पड़ते हैं। प्रवेश और निकास मार्ग निर्धारित करना जरूरी होता है ताकि भगदड़ जैसी स्थिति न बने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित रह सके।
सीएम ने कहा, “मर्यादा और व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। हम कानून के शासन में विश्वास करते हैं और उसका पालन करना भी जानते हैं तथा करवाना भी जानते हैं।”
वाराणसी की पुरानी घटना का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने अपने वक्तव्य में समाजवादी पार्टी शासनकाल की वाराणसी की एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए विपक्ष पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि संबंधित व्यक्ति वास्तव में शंकराचार्य थे तो उस समय उनके खिलाफ लाठीचार्ज और एफआईआर क्यों हुई।
उन्होंने कहा कि नैतिकता की बात करने वालों को पहले परंपरा और व्यवस्था का सम्मान करना चाहिए। सदन में तथ्यात्मक चर्चा होनी चाहिए, न कि भ्रम फैलाकर मुद्दे को राजनीतिक रंग दिया जाए।
आदि शंकराचार्य और चार पीठों की परंपरा का उल्लेख
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का संदर्भ देते हुए कहा कि आदि शंकराचार्य ने देश की चार दिशाओं में चार प्रमुख पीठों की स्थापना की थी—
- उत्तर में ज्योतिष पीठ
- दक्षिण में श्रृंगेरी पीठ
- पूर्व में जगन्नाथपुरी
- पश्चिम में द्वारिकापुरी
उन्होंने बताया कि ये पीठ भारतीय दर्शन और वेद परंपरा से जुड़ी हैं। चारों वेदों के महावाक्य— “प्रज्ञानं ब्रह्म”, “अहम् ब्रह्मास्मि”, “तत्त्वमसि” और “अयमात्मा ब्रह्म”— भारतीय आध्यात्मिक चिंतन का आधार हैं और साधना की उच्चतम अवस्था का बोध कराते हैं।
विपक्ष पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि कई बार किसी सामान्य विषय को बार-बार दोहराकर विवाद का रूप दे दिया जाता है। उन्होंने कहा कि वास्तविक मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए और सदन को तथ्यों के आधार पर चलना चाहिए, न कि भ्रामक राजनीति के आधार पर।
निष्कर्ष
शंकराचार्य विवाद पर सदन में दिए गए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान ने एक बार फिर कानून के शासन, धार्मिक मर्यादा और प्रशासनिक व्यवस्था के मुद्दे को केंद्र में ला दिया है। सरकार की ओर से यह संदेश स्पष्ट रहा कि परंपरा का सम्मान और कानून का पालन— दोनों साथ-साथ चलेंगे।











