सीतापुर | Mon, 09 Feb 2026 — दोपहर करीब 2 बजे Yogi Adityanath का हेलीकॉप्टर जीआईसी हेलीपैड पर उतरा तो शहर की फिज़ा में असामान्य हलचल थी। कड़ी सुरक्षा, सधी हुई आवाजाही और संकरी गलियों से गुजरता काफिला—मंज़िल थी Tapodham Ashram, जहां आध्यात्म और लोकसेवा के मेल का एक विशेष क्षण दर्ज होना था। आश्रम परिसर में मुख्यमंत्री ने गोरख अमृत धारा फव्वारे और सेवाभारती सभागार का लोकार्पण किया।
कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने से पहले लगभग एक किलोमीटर के रूट पर सुरक्षा की बहुस्तरीय व्यवस्था दिखाई दी। प्रशासन के अनुसार, ड्यूटी पर करीब 1700 पुलिसकर्मी तैनात रहे, ताकि आयोजन निर्विघ्न संपन्न हो। स्थानीय लोगों के लिए यह दृश्य असाधारण था—आश्रम की ओर जाती गलियों में सन्नाटा भी था और उत्सुकता भी।
आश्रम पहुंचने पर महंत तेजनाथ महाराज और संतजनों ने मुख्यमंत्री का पारंपरिक स्वागत किया। लोकार्पण क्रम में सबसे पहले गोरख अमृत धारा फव्वारे का उद्घाटन हुआ। इसके बाद श्री सिद्ध तीर्थ तपोस्थली बाबा गिरधारी नाथ महाराज के संदेश से अंकित शिलापट का अनावरण किया गया। मुख्यमंत्री ने आश्रम में पूजन-अर्चन कर संत परंपरा को नमन किया।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह स्थल केवल ईंट-पत्थरों का विस्तार नहीं, बल्कि साधना की निरंतरता का प्रतीक है। उन्होंने नाथपंथ से जुड़े पूज्य संतों को प्रणाम करते हुए महंत तेजनाथ महाराज का आभार व्यक्त किया। साथ ही अपनी गुरु परंपरा का स्मरण करते हुए बताया कि उनके दादा गुरु ने इस आश्रम की स्थापना की थी। आज़ादी के दौर में पाकिस्तान से आकर योगीराज गिरधारी महाराज ने यहां साधना को नई दिशा दी—उस साधना गुफा को अब भव्य स्वरूप देकर श्रद्धालुओं को उससे जोड़ने का अवसर मिला है।
सेवाभारती सभागार के लोकार्पण को आश्रम गतिविधियों के विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। यहां भविष्य में सत्संग, भंडारे, चिकित्सा शिविर और सामाजिक कार्यक्रमों के आयोजन की रूपरेखा है। आश्रम प्रबंधन का मानना है कि इससे स्थानीय समुदाय को नियमित सामाजिक-आध्यात्मिक गतिविधियों का केंद्र मिलेगा।
समारोह के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखा। मूर्ति स्थापना और भंडारे के बीच मुख्यमंत्री ने लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। वातावरण में भक्ति-भाव और अनुशासन का संतुलन साफ झलकता रहा—एक ओर शंखध्वनि, दूसरी ओर सुरक्षा प्रोटोकॉल की सख्ती।
कार्यक्रम ने सीतापुर में आध्यात्मिक धरोहर और सार्वजनिक उपयोगिता के संयोजन का संदेश दिया। गोरख अमृत धारा अब केवल एक फव्वारा नहीं, बल्कि उस परंपरा का दृश्य प्रतीक है, जो साधना, सेवा और समाज को एक सूत्र में पिरोती है।











