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स्मार्ट बनेगा उत्तर प्रदेश: SCE के साथ ऐतिहासिक करार से संस्थागत सुधारों को रफ्तार

On: February 24, 2026
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SCE के साथ ऐतिहासिक करार से संस्थागत सुधारों को रफ्तार
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लखनऊ, 24 फरवरी 2026। स्मार्ट बनेगा उत्तर प्रदेश — यह अब केवल नारा नहीं, बल्कि एक ठोस रणनीतिक दिशा के रूप में सामने आ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सिंगापुर दौरे के दूसरे दिन राज्य को एक अहम प्रशासनिक और कूटनीतिक सफलता मिली। राज्य की निवेश प्रोत्साहन एजेंसी इन्वेस्ट यूपी और सिंगापुर सरकार की प्रमुख संस्था Singapore Cooperation Enterprise (SCE) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए।

यह करार उत्तर प्रदेश में संस्थागत क्षमता निर्माण (Institutional Capacity Building), नीतिगत ढांचे के आधुनिकीकरण (Policy Modernization) और मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम (Industrial Ecosystem) विकसित करने पर केंद्रित है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है—राज्य को वैश्विक औद्योगिक मानचित्र पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना।

स्मार्ट बनेगा उत्तर प्रदेश: वैश्विक साझेदारी से नई प्रशासनिक ताकत

औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और आधुनिक अवसंरचना

एमओयू के तहत सहयोग कई रणनीतिक क्षेत्रों में होगा:

1. सतत विकास और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन
दोनों पक्ष तकनीकी परामर्श और नीति सहयोग के माध्यम से डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करेंगे। ई-गवर्नेंस मॉडल, डेटा-आधारित निर्णय प्रणाली और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर विशेष फोकस रहेगा।

2. ज्ञान का आदान-प्रदान
सिंगापुर शहरी नियोजन, लॉजिस्टिक्स प्रबंधन और औद्योगिक क्लस्टर विकास में वैश्विक मानक स्थापित कर चुका है। अब उस अनुभव का लाभ उत्तर प्रदेश को सीधे मिलेगा। इससे औद्योगिक पार्कों, निवेश क्षेत्रों और एक्सपोर्ट हब के विकास में गुणवत्ता और दक्षता बढ़ने की उम्मीद है।

3. क्षमता निर्माण (Capacity Building)
राज्य के अधिकारियों और कार्यबल के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम, स्टडी विजिट्स और लीडरशिप डेलिगेशन आयोजित किए जाएंगे। प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता (Transparency) और कार्यकुशलता (Efficiency) लाने के लिए यह कदम अहम माना जा रहा है।

समयबद्ध कार्ययोजना: सिर्फ समझौता नहीं, क्रियान्वयन पर जोर

राज्य सरकार ने इस साझेदारी को केवल कागजी औपचारिकता तक सीमित न रखने का स्पष्ट संकेत दिया है।

  • अगले दो माह में विशिष्ट परियोजनाओं पर विस्तृत बातचीत शुरू होगी।
  • छह माह के भीतर परियोजनाओं को अंतिम रूप देकर क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू करने का लक्ष्य तय किया गया है।
  • प्रत्येक परियोजना के लिए कार्यक्षेत्र, समयसीमा और वित्तीय प्रावधानों को लिखित रूप में स्पष्ट किया जाएगा ताकि जवाबदेही बनी रहे।

नीति विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल उत्तर प्रदेश को ‘रिएक्टिव गवर्नेंस’ से ‘प्रोएक्टिव प्लानिंग’ की ओर ले जा सकता है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह करार?

उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है और औद्योगिक निवेश की दृष्टि से तेजी से उभर रहा है। लेकिन बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह में संस्थागत मजबूती और नीति क्रियान्वयन की गुणवत्ता निर्णायक भूमिका निभाती है।

सिंगापुर जैसे छोटे लेकिन अत्यंत दक्ष प्रशासनिक मॉडल वाले देश के साथ यह साझेदारी संकेत देती है कि उत्तर प्रदेश अब केवल निवेश आकर्षित करने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि निवेश के लिए अनुकूल, पारदर्शी और पूर्वानुमेय (Predictable) प्रशासनिक ढांचा भी विकसित करना चाहता है।

दीर्घकालिक विजन की ओर कदम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यह समझौता राज्य के ‘लॉन्ग टर्म विजन’ का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार का फोकस केवल तात्कालिक निवेश पर नहीं, बल्कि एक ऐसे औद्योगिक और प्रशासनिक ढांचे के निर्माण पर है जो आने वाले दशकों तक टिकाऊ विकास (Sustainable Growth) सुनिश्चित करे।

यदि यह साझेदारी तय समयसीमा में धरातल पर उतरती है, तो ‘स्मार्ट बनेगा उत्तर प्रदेश’ की अवधारणा महज घोषणा नहीं, बल्कि प्रशासनिक परिवर्तन का वास्तविक उदाहरण बन सकती है।

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