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सुनेत्रा पवार डिप्टी सीएम: शपथ तो मिली, वित्त नहीं… CM फडणवीस ने दिए ये अहम विभाग

On: January 31, 2026
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सुनेत्रा पवार डिप्टी सीएम
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मुंबई, 31 जनवरी 2026। महाराष्ट्र की राजनीति ने शनिवार को एक भावनात्मक और ऐतिहासिक मोड़ देखा। सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली—और इसी के साथ वे राज्य की पहली महिला डिप्टी सीएम बन गईं। शपथ दिलाई राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने, लोकभवन के सादे मगर गंभीर माहौल में। हाल ही में हुए हादसे में दिवंगत हुए अजित पवार की अनुपस्थिति हर चेहरे पर साफ दिख रही थी; ‘अजित दादा अमर रहे’ के स्वर बीच-बीच में सन्नाटे को चीरते रहे।

शपथ के तुरंत बाद विभागों का बंटवारा भी सामने आया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उन्हें कई अहम जिम्मेदारियाँ सौंपीं, लेकिन चर्चित वित्त मंत्रालय उनके पास नहीं गया। यही निर्णय राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है।

सुनेत्रा पवार डिप्टी सीएम: कौन-कौन से विभाग मिले?

सरकारी सूत्रों के अनुसार, सुनेत्रा पवार को सामाजिक सरोकार से जुड़े और प्रशासनिक पकड़ माँगने वाले विभाग दिए गए हैं—जिनमें महिला एवं बाल विकास, सामाजिक न्याय, ग्राम विकास, और सहकार जैसे पोर्टफोलियो शामिल हैं। ये वे क्षेत्र हैं जहाँ उनकी रुचि, सार्वजनिक छवि और सामाजिक काम का अनुभव सीधे काम आ सकता है। वित्त भले न मिला हो, पर जमीनी असर वाले मंत्रालय उनके पास हैं—और यही उनकी कार्यशैली की पहचान भी रही है।

पृष्ठभूमि: शोक, संगठन और शपथ

28 जनवरी को बारामती में हुए हादसे में अजित पवार के निधन के बाद, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर तेजी से मंथन हुआ। विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से सुनेत्रा पवार को नेता चुना गया। इसके बाद राजकीय शोक की अवधि पूरी होते ही शपथ का कार्यक्रम रखा गया।

प्रोफ़ाइल: धाराशिव की बेटी, बारामती की बहू

  • मूल रूप से धाराशिव (पूर्व उस्मानाबाद) जिले के तेर गाँव से संबंध
  • औरंगाबाद विश्वविद्यालय से बी.कॉम
  • 1985 में अजित पवार से विवाह
  • सामाजिक कार्य, फोटोग्राफी और चित्रकला में रुचि
  • बारामती के विद्या प्रतिष्ठान ट्रस्ट से जुड़ाव

वे इस पद पर पहुँचने वाली महाराष्ट्र की 11वीं डिप्टी सीएम हैं और पहली महिला भी। खास बात यह कि वे अभी राज्यसभा सांसद हैं, विधानमंडल की सदस्य नहीं—इस कारण उन्हें नियमानुसार राज्यसभा से इस्तीफा देना होगा।

राजनीतिक सफर और चर्चित मुकाबला

2024 में बारामती से चुनाव लड़ते हुए उनका मुकाबला ननद सुप्रिया सुले से हुआ था। यह चुनाव राष्ट्रीय सुर्खियों में रहा। हार के बाद भी उन्होंने संगठनात्मक सक्रियता बनाए रखी और कम प्रोफ़ाइल में काम करती रहीं—यही संयम अब उनकी ताकत बनकर उभरा है।

पारिवारिक-राजनीतिक विरासत

वे पूर्व मंत्री और सांसद पद्मसिंह पाटिल की बहन हैं। कहा जाता है कि एनसीपी में छगन भुजबल को लाने में भी परिवार की भूमिका रही। इस तरह, सुनेत्रा पवार का राजनीति से रिश्ता प्रत्यक्ष से ज्यादा संगठनात्मक और पारिवारिक रहा है—जहाँ वे ‘लो-प्रोफाइल’ लेकिन ‘हाई-इन्फ्लुएंस’ उपस्थिति मानी जाती हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है यह नियुक्ति?

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सुनेत्रा पवार डिप्टी सीएम बनना सिर्फ एक संवैधानिक नियुक्ति नहीं, बल्कि संदेश है—संतुलन, संवेदना और संगठनात्मक स्थिरता का। वे विवादों से दूर, अनुशासित और सामाजिक मुद्दों पर संवेदनशील छवि रखती हैं। महिला एवं बाल विकास और सामाजिक न्याय जैसे विभागों के साथ वे अपने स्वभाव और अनुभव के अनुरूप काम कर सकती हैं।

वित्त मंत्रालय न मिलना भले चर्चा में हो, पर जमीनी मंत्रालयों के जरिए वे सीधे जनता से जुड़ेंगी—और यही उनके लिए असली कसौटी भी होगी।

निष्कर्ष

महाराष्ट्र की राजनीति में यह क्षण शोक से उपजा, लेकिन इतिहास में दर्ज हो गया। सुनेत्रा पवार डिप्टी सीएम के रूप में एक नई भूमिका में हैं—जहाँ भावनाएँ, विरासत और जिम्मेदारी साथ-साथ चलेंगी। अब नजर इस पर होगी कि वे इन विभागों के जरिए अपनी अलग प्रशासनिक पहचान कैसे गढ़ती हैं।

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