लखनऊ (Fri, 10 Oct 2025) — दीपावली से पहले योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के बीएड डिग्री धारकों को बड़ा तोहफा दिया है। लंबे समय से अटके मुद्दे पर निर्णय लेते हुए अब बीएड अभ्यर्थियों को भी प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ाने का अवसर मिलने जा रहा है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप Professional Development Programme for Elementary Teachers (PDPET Bridge Course) को मंजूरी दे दी है।
सरकार का फैसला: बीएड धारकों को मिलेगा नया मौका
वर्ष 2005 से लंबित यह मामला अब सुलझने की ओर है। उस समय बीएड डिग्री वालों को प्राथमिक शिक्षक भर्ती में शामिल नहीं किया गया था, जिससे हजारों उम्मीदवारों को पात्रता के लिए वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा। अब सरकार के इस फैसले से उनके लिए न्याय और अवसर, दोनों के द्वार खुल गए हैं।
शिक्षा विभाग के अनुसार, बीएड धारक यदि छह महीने का PDPET Bridge Course पूरा करते हैं तो उन्हें BTC (Basic Training Certificate) के समकक्ष मान्यता दी जाएगी। यानी अब वे कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए पात्र बन जाएंगे।
NIOS करेगा संचालन, नवंबर से आवेदन शुरू
यह छह महीने का PDPET Bridge Course नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) द्वारा संचालित किया जाएगा। आवेदन प्रक्रिया 1 नवंबर 2025 से शुरू होगी। इच्छुक उम्मीदवार NIOS की आधिकारिक वेबसाइट dledbr.nios.ac.in पर जाकर आवेदन कर सकेंगे।
ऑनलाइन माध्यम से संचालित यह कोर्स दिसंबर 2025 से मई 2026 तक चलेगा। इसमें बीएड अभ्यर्थियों को प्राथमिक स्तर की शिक्षण विधियों और बाल-केन्द्रित शिक्षण पद्धति की जानकारी दी जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तैयार हुआ ब्रिज कोर्स
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष अपने आदेश में स्पष्ट कहा था कि बीएड डिग्री धारक प्राथमिक कक्षाओं (कक्षा 1 से 5) में पढ़ाने के लिए पात्र नहीं हैं। कोर्ट ने यह भी कहा था कि इन कक्षाओं में केवल BTC या D.El.Ed प्रशिक्षित शिक्षक ही पढ़ा सकेंगे।
इसके बाद ही केंद्र सरकार और NIOS ने एक ऐसा ब्रिज कोर्स तैयार किया जो बीएड डिग्री वालों को प्राथमिक शिक्षा के लिए आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान करता है। अब उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे आधिकारिक मंजूरी देकर लागू करने का रास्ता साफ कर दिया है।
शिक्षा जगत में राहत और उम्मीद की लहर
सरकार के इस निर्णय से प्रदेश के लाखों बीएड धारकों में राहत की लहर है। यह फैसला न सिर्फ उनके करियर को नई दिशा देगा, बल्कि प्राथमिक शिक्षा में प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी भी दूर करेगा।
एक अभ्यर्थी ने कहा, “यह फैसला दीपावली से पहले हमारे लिए सबसे बड़ा उपहार है। वर्षों की मेहनत और इंतजार का अब फल मिलने जा रहा है।”








