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यूपी के सभी 75 जिलों में खुलेंगे AI केंद्र, 5 लाख युवाओं को मिलेगी ट्रेनिंग; योगी कैबिनेट की मंजूरी

On: October 9, 2026
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यूपी के सभी 75 जिलों में खुलेंगे AI केंद्र, 5 लाख युवाओं को मिलेगी ट्रेनिंग
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लखनऊ (शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026)। उत्तर प्रदेश में युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में प्रशिक्षित करने और सरकारी कामकाज में नई तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश एआई मिशन (UP-AIM) की स्थापना, क्रियान्वयन और संचालन को मंजूरी दी गई। इसके तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों में एआई केंद्र स्थापित करने और पांच लाख युवाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है।

मिशन के लिए 225 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। योजना के तहत 50 हजार विशेषज्ञ तैयार करने, 100 से अधिक एआई आधारित समाधान विकसित करने और 100 स्टार्टअप को आर्थिक व अन्य सहायता देने की भी योजना है। सरकार का उद्देश्य प्रदेश में तकनीकी कौशल को बढ़ावा देने के साथ प्रशासनिक सेवाओं को अधिक सरल, तेज और प्रभावी बनाना है।

यूपी एआई मिशन से सभी 75 जिलों को जोड़ने की तैयारी

उत्तर प्रदेश एआई मिशन के तहत जिला स्तर तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था में प्रत्येक जिले में एआई केंद्र स्थापित होगा, जहां युवाओं को नई तकनीक से परिचित कराने और सरकारी विभागों की जरूरतों के अनुरूप समाधान विकसित करने पर जोर दिया जाएगा।

मिशन का एक प्रमुख उद्देश्य सरकारी विभागों को एआई आधारित तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके लिए ‘यूपी एआई स्टैक’ नाम से एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने की योजना है। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से विभागों को एआई के अनुकूल तैयार आंकड़े, सुरक्षित तरीके से डेटा साझा करने की सुविधा, तकनीकी समाधान विकसित करने के उपकरण और ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) आधारित कंप्यूटिंग क्षमता उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।

इस व्यवस्था से विभागों को अपनी आवश्यकताओं के अनुसार तकनीकी समाधान तैयार करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, सरकारी सेवाओं के संचालन में समय और संसाधनों का बेहतर उपयोग करने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

पांच लाख युवाओं को AI ट्रेनिंग, 50 हजार विशेषज्ञ तैयार करने का लक्ष्य

यूपी एआई मिशन में युवाओं के कौशल विकास को प्रमुख स्थान दिया गया है। इसके तहत पांच लाख युवाओं को एआई का प्रशिक्षण देने और 50 हजार विशेषज्ञ तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा। तकनीकी शिक्षा संस्थानों में स्थापित होने वाली कौशल लैब विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक सीखने और उसके व्यावहारिक इस्तेमाल को समझने का अवसर देंगी।

सरकार की योजना है कि एआई से जुड़ी दक्षताओं को केवल बड़े शहरों या चुनिंदा संस्थानों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि प्रदेश के विभिन्न जिलों के युवाओं तक पहुंचाया जाए। इससे तकनीकी क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर विकसित करने में मदद मिल सकती है।

हर जिले में मिलेगा AI फेलो, 40 हजार रुपये मासिक मानदेय

मिशन के तहत मुख्यमंत्री एआई फेलोशिप कार्यक्रम भी संचालित किया जाएगा। प्रस्ताव के अनुसार, प्रत्येक जिले के लिए एक एआई फेलो का चयन किया जाएगा। चयनित फेलो को एक वर्ष के लिए 40 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय देने की व्यवस्था होगी।

फेलोशिप का हर वर्ष नवीनीकरण किए जाने का भी प्रावधान बताया गया है। जिला स्तर पर एआई फेलो की भूमिका स्थानीय जरूरतों के अनुरूप तकनीकी पहलों को आगे बढ़ाने और सरकारी विभागों को एआई के उपयोग में सहयोग देने से जुड़ी हो सकती है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रदेश में एआई से संबंधित गतिविधियों को जिला स्तर तक पहुंचाना और स्थानीय समस्याओं के समाधान में नई तकनीक की भूमिका बढ़ाना है।

ITI, पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग कॉलेजों में बनेंगी 200 से अधिक AI लैब

युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देने के लिए प्रदेश के आईटीआई, पॉलिटेक्निक, विश्वविद्यालयों और इंजीनियरिंग कॉलेजों में 200 से अधिक एआई कौशल लैब स्थापित करने की योजना है।

इन लैब में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस और रोबोटिक्स से संबंधित व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके माध्यम से एक लाख तकनीकी शिक्षार्थियों को प्रमाणित करने का लक्ष्य रखा गया है।

प्रस्तावित लैब विद्यार्थियों को तकनीकी विषयों का व्यावहारिक ज्ञान हासिल करने में मदद करेंगी। हालांकि, प्रशिक्षण और प्रमाणन के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए पर्याप्त उपकरण, प्रशिक्षक और संस्थानों में जरूरी डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण होगा।

कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा में इस्तेमाल होगी AI तकनीक

यूपी एआई मिशन के तहत कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों की जरूरतों के अनुसार एआई आधारित समाधान विकसित किए जाएंगे।

कृषि क्षेत्र में डेटा आधारित विश्लेषण, स्वास्थ्य सेवाओं में सूचना प्रबंधन, शिक्षा में डिजिटल सहायता और ऊर्जा क्षेत्र में संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल जैसे क्षेत्रों में एआई की संभावनाओं पर काम किया जा सकता है। इन समाधानों का वास्तविक लाभ उनके डिजाइन, विश्वसनीयता और संबंधित विभागों में प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।

सरकार की योजना में ‘यूपीजीपीटी’ के माध्यम से सरकारी कामकाज में सहायता देने और नागरिकों को उनकी क्षेत्रीय भाषा में सूचनाएं उपलब्ध कराने का भी उल्लेख है। इसका उद्देश्य तकनीकी सेवाओं को आम लोगों के लिए अधिक सुलभ बनाना है।

AI स्टार्टअप और MSME को भी मिलेगा प्रोत्साहन

प्रदेश में एआई आधारित नवाचार को बढ़ावा देने के लिए 100 स्टार्टअप को आर्थिक और अन्य सहायता देने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही छोटे और मध्यम उद्यमों (MSME) को भी मिशन से जोड़ने की योजना है।

एआई आधारित नए उत्पादों और सेवाओं के विकास के लिए शोध, नवाचार प्रतियोगिताओं और हैकाथन को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से शोध परियोजनाओं और तकनीकी प्रयोगों को बढ़ावा देने की योजना है।

यदि इन पहलों को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो प्रदेश के स्टार्टअप और उद्यमियों को नई तकनीकों पर काम करने के अवसर मिल सकते हैं। साथ ही स्थानीय जरूरतों के अनुसार डिजिटल समाधान तैयार करने की क्षमता भी विकसित हो सकती है।

स्वतंत्र सोसाइटी के रूप में संचालित होगा यूपी एआई मिशन

यूपी एआई मिशन को आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के अंतर्गत एक स्वतंत्र सोसाइटी के रूप में स्थापित करने की योजना है। इसके संचालन के लिए शीर्ष निकाय, गवर्निंग बॉडी और कार्यकारी समिति गठित की जाएगी।

मिशन के तहत साझा एआई प्लेटफॉर्म, डेटा और एआई सेवाएं, कौशल विकास, शोध एवं उत्कृष्टता केंद्र, स्टार्टअप और एमएसएमई को प्रोत्साहन, कंप्यूटिंग एवं डिजिटल ढांचे का विकास तथा सुरक्षित एआई के इस्तेमाल जैसे क्षेत्रों में काम किया जाएगा।

एआई आधारित प्रणालियों के विस्तार के साथ डेटा की सुरक्षा, गोपनीयता और तकनीकी समाधानों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा। सरकारी सेवाओं में इनका इस्तेमाल करते समय नागरिकों के डेटा की सुरक्षा और जवाबदेही पर विशेष ध्यान देना होगा।

युवाओं और प्रदेश की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए क्या मायने हैं ये फैसले?

उत्तर प्रदेश एआई मिशन का लक्ष्य तकनीकी प्रशिक्षण को जिला स्तर तक पहुंचाना और सरकारी सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल बढ़ाना है। पांच लाख युवाओं को प्रशिक्षण, 50 हजार विशेषज्ञ तैयार करने और 100 से अधिक एआई समाधान विकसित करने की योजना इस दिशा में व्यापक पहल का संकेत देती है।

युवाओं के लिए इसका लाभ प्रशिक्षण की गुणवत्ता, प्रमाणपत्रों की उपयोगिता और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकसित होने पर निर्भर करेगा। वहीं, सरकारी विभागों में एआई का इस्तेमाल तभी प्रभावी होगा, जब तकनीकी ढांचे के साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन और डेटा सुरक्षा की मजबूत व्यवस्था भी विकसित की जाए।

फिलहाल कैबिनेट की मंजूरी के बाद मिशन के क्रियान्वयन, केंद्रों की स्थापना और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की समयसीमा से जुड़े विस्तृत विवरण महत्वपूर्ण होंगे। इन योजनाओं की प्रगति ही तय करेगी कि प्रदेश के युवाओं और आम नागरिकों तक इसका लाभ कितनी तेजी से पहुंचता है।

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