लखनऊ (Wed, 18 Feb 2026)। उत्तर प्रदेश में खेती अब सिर्फ पारंपरिक जीविका नहीं, बल्कि एक उभरता हुआ एग्री-बिजनेस मॉडल बनती जा रही है। योगी सरकार की नई रणनीति में किसानों को ‘अन्नदाता’ से आगे बढ़ाकर ‘एग्री-बिजनेसमैन’ बनाने पर खास जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में वित्त वर्ष 2026–27 के लिए राज्य का कृषि बजट बढ़ाकर 10,888 करोड़ रुपये किया गया है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 20 फीसदी अधिक है।
सरकार की ‘कम लागत–अधिक उत्पादन’ नीति के तहत तकनीक, नवाचार और आधुनिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका असर अब जमीनी स्तर पर भी दिखाई देने लगा है, जहां किसान पारंपरिक फसलों से आगे बढ़कर नए प्रयोग कर रहे हैं और उनकी आय में उल्लेखनीय सुधार दर्ज हो रहा है।
वाराणसी: सोलर पंप और तकनीक ने घटाई खेती की लागत
पूर्वांचल की खेती में आधुनिक तकनीक धीरे-धीरे बड़ा बदलाव ला रही है। वाराणसी जिले में करीब 3.05 लाख किसान सरकारी योजनाओं से जुड़कर आधुनिक कृषि पद्धतियां अपना रहे हैं। यहां सोलर पंप योजना ने सिंचाई को आसान और किफायती बना दिया है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि पहले जहां डीजल और बिजली पर भारी खर्च होता था, अब सोलर पंप के जरिए लागत कम हो गई है और उत्पादन में सुधार आया है। इसके साथ ही किसान सम्मान निधि और अनुदान पर उपलब्ध कृषि यंत्रों ने छोटे और सीमांत किसानों को राहत दी है। गांवों में बेहतर आधारभूत ढांचे के लिए किए गए निवेश से भी कृषि गतिविधियों को मजबूती मिली है।
कानपुर: खेत तालाब योजना से खेती बना सफल बिजनेस
कानपुर के घाटमपुर ब्लॉक में खेती की सोच तेजी से बदल रही है। यहां ‘खेत तालाब योजना’ के अंतर्गत कई किसानों ने मत्स्य पालन को अपनाकर खेती को एक फायदे वाले व्यवसाय में बदल दिया है।
वैज्ञानिक तरीके से किए जा रहे फिश फार्मिंग मॉडल ने किसानों की आमदनी में बड़ा फर्क पैदा किया है। कई किसानों के अनुसार, एक सीजन में 8 से 9 लाख रुपये तक की कमाई संभव हो रही है, जो पारंपरिक फसलों की तुलना में कई गुना ज्यादा है। इस मॉडल ने ग्रामीण युवाओं के लिए भी नए रोजगार के रास्ते खोले हैं, जिससे गांवों की आर्थिक गतिविधि मजबूत हो रही है।
गोरखपुर: स्वीट कॉर्न और 90% सब्सिडी ने बदल दी तस्वीर
गोरखपुर के ब्रह्मपुर ब्लॉक में ‘त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम’ किसानों के लिए गेम चेंजर साबित हो रहा है। यहां एफपीओ से जुड़े किसानों को स्वीट कॉर्न के बीज पर 90 प्रतिशत सब्सिडी मिलने से खेती की लागत काफी कम हो गई है।
जहां पहले प्रति एकड़ लागत ज्यादा होती थी, अब यह घटकर लगभग 8 से 10 हजार रुपये रह गई है। महज ढाई महीने की फसल में किसान प्रति एकड़ लगभग 1.25 लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रहे हैं। सरकार ने एफपीओ को मजबूत करने के लिए बजट में 75 करोड़ रुपये के रिवॉल्विंग फंड का भी प्रावधान किया है, जिससे नवाचार आधारित खेती को और गति मिलने की उम्मीद है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में दिख रहा बदलाव
विशेषज्ञों का मानना है कि जब खेती को व्यवसाय की तरह देखा जाता है, तो किसान सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि बाजार, प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन की ओर भी कदम बढ़ाते हैं। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश में कृषि नवाचार अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहा है।
सरकार का फोकस स्पष्ट है—किसानों की आय बढ़ाना, रोजगार के अवसर तैयार करना और कृषि को टिकाऊ व्यवसाय में बदलना। यदि ये प्रयोग इसी गति से आगे बढ़ते रहे, तो आने वाले वर्षों में राज्य की ग्रामीण तस्वीर और मजबूत हो सकती है।









