लखनऊ (13 फरवरी 2026)। उत्तर प्रदेश विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की नौ वर्षों की यात्रा को “अव्यवस्था से अनुशासन” और “भय से विश्वास” की यात्रा बताया। उन्होंने कहा कि यूपी बीमारू नहीं भारत के विकास का इंजन बन चुका है और यह बदलाव केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि नीतिगत स्पष्टता, सख्त कानून-व्यवस्था और सामाजिक कल्याण की योजनाओं के संयुक्त प्रभाव का परिणाम है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, “यह यात्रा कर्फ्यू से कानून के राज की है, उपद्रव से उत्सव की है और अविश्वास से आत्मविश्वास की है।” सदन में उनका भाषण राजनीतिक संदेश से आगे बढ़कर प्रशासनिक रिपोर्ट जैसा भी लगा, जिसमें कानून-व्यवस्था, अर्थव्यवस्था और सामाजिक योजनाओं का विस्तृत उल्लेख था।
यूपी बीमारू नहीं भारत के विकास का इंजन: कानून-व्यवस्था से विकास तक
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की छवि अचानक खराब नहीं हुई थी, बल्कि वर्षों की शिथिल प्रशासनिक व्यवस्था और अपराध के माहौल ने उसे प्रभावित किया था। 2017 के बाद “जीरो टॉलरेंस” नीति लागू की गई, जिसके तहत अपराध और सांप्रदायिक घटनाओं पर सख्ती से कार्रवाई की गई।
उन्होंने दावा किया कि 2017 के बाद से प्रदेश में कोई बड़ा सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ है और भयमुक्त वातावरण बना है। पुलिस सुधारों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि पुलिस बल में महिलाओं की संख्या 10,000 से बढ़कर 44,000 तक पहुंच गई है। हाल ही में 60,200 से अधिक पुलिसकर्मियों की भर्ती की गई है और सभी को प्रदेश में ही प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
साइबर अपराध से निपटने के लिए 75 जिलों में साइबर थानों की स्थापना और प्रत्येक थाने में साइबर हेल्प डेस्क शुरू की गई है। फॉरेंसिक साइंस ढांचे को भी सुदृढ़ किया गया है, जिससे जांच अधिक वैज्ञानिक और पारदर्शी हो सके।
गरीबी उन्मूलन और सामाजिक कल्याण पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति आयोग के अनुसार 6 करोड़ से अधिक लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका अर्थ यह नहीं कि लाभार्थियों को अन्य योजनाओं से वंचित किया जाएगा।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों को पक्का घर, आयुष्मान भारत योजना के तहत 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा, निःशुल्क राशन और 12,000 रुपये वार्षिक पेंशन जैसी योजनाएं जारी हैं। उनका कहना था कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही सरकार की प्राथमिकता है।
ट्रिपल-टी मॉडल: टेक्नोलॉजी, ट्रस्ट और ट्रांसफॉर्मेशन
अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने “ट्रिपल-टी” मॉडल का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश आज टेक्नोलॉजी, ट्रस्ट और ट्रांसफॉर्मेशन की त्रिवेणी के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि ई-गवर्नेंस, डिजिटल मॉनिटरिंग और पारदर्शी प्रक्रियाओं ने शासन को अधिक जवाबदेह बनाया है।
आर्थिक सर्वेक्षण को पहली बार व्यवस्थित रूप से सदन में प्रस्तुत किए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह “विचार से व्यवस्था और व्यवस्था से विकास” की यात्रा का प्रतीक है।
केंद्र योजनाओं का ‘बॉटलनेक’ से अग्रणी राज्य तक
मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी उत्तर प्रदेश को केंद्र सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा के रूप में देखा जाता था, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश आज देश की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर तथा रोजगार सृजन में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
उनके अनुसार, “सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य अब पहचान के संकट से बाहर निकल चुका है। आज यूपी भारत के विकास का अग्रिम इंजन है।”
विपक्ष पर निशाना और लोकतांत्रिक मर्यादा की बात
मुख्यमंत्री ने राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान विपक्ष के आचरण पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्यपाल का अभिभाषण वर्ष की नीति और उपलब्धियों का आधिकारिक दस्तावेज होता है, और इसकी गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
हालांकि, उन्होंने चर्चा में 92 सदस्यों की भागीदारी को लोकतंत्र की शक्ति बताया—60 सत्ता पक्ष से और 32 विपक्ष से। उनके अनुसार, यह स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा का संकेत है कि सभी पक्ष अपनी बात रख सके।
निष्कर्ष: छवि से वास्तविकता की ओर
विधानसभा में दिया गया यह संबोधन केवल राजनीतिक बयान नहीं था, बल्कि प्रदेश की प्रशासनिक दिशा का दावा भी था। मुख्यमंत्री ने जिस आत्मविश्वास से कहा कि यूपी बीमारू नहीं भारत के विकास का इंजन बन चुका है, वह संदेश स्पष्ट था—सरकार खुद को परिणाम आधारित शासन के मॉडल के रूप में प्रस्तुत करना चाहती है।
अब देखना यह होगा कि आने वाले वर्षों में निवेश, रोजगार और सामाजिक संकेतकों पर यह दावा किस हद तक जमीन पर टिकता है। फिलहाल, विधानसभा का यह भाषण उत्तर प्रदेश की नई राजनीतिक और आर्थिक छवि गढ़ने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।











