लखनऊ, 12 फरवरी 2026। ऊर्जा का भविष्य अब कोयले की कालिख से नहीं, सूरज की रोशनी और हरित तकनीक की चमक से तय होगा। यही संदेश देता है UP बजट 2026, जिसमें योगी सरकार ने हरित ऊर्जा क्षेत्र के लिए 2,104 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यह राशि वर्ष 2025-26 की तुलना में दोगुने से अधिक है—और संकेत साफ है: उत्तर प्रदेश अब ‘ग्रीन पावर’ की दौड़ में पिछड़ना नहीं चाहता।
सरकार ने अगले पांच वर्षों में 22,000 मेगावाट बिजली उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। यह केवल उत्पादन बढ़ाने की योजना नहीं, बल्कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण और निवेश आकर्षण—तीनों को साथ लेकर चलने की रणनीति है।
सौर ऊर्जा: तेजी से फैलता दायरा
राज्य की सौर व जैव ऊर्जा नीति-2022 के तहत अब तक 2,815 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जा चुकी हैं। रूफटॉप सोलर, ग्राउंड माउंटेड प्लांट और कृषि क्षेत्र में सोलर पंप—तीनों स्तरों पर विस्तार किया जा रहा है।
UP बजट 2026 में प्रधानमंत्री कुसुम सूर्यघर योजना के लिए 1,500 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इस योजना का उद्देश्य किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं को सौर ऊर्जा से जोड़ना है, ताकि बिजली बिल घटे और अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेची जा सके।
ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक 5.20 लाख सोलर स्ट्रीट लाइट लगाए जा चुके हैं। यह आंकड़ा केवल रोशनी का प्रतीक नहीं, बल्कि ग्रामीण आधारभूत ढांचे में बदलाव की कहानी भी कहता है।
17 सोलर सिटी: आस्था और ऊर्जा का संगम
सरकार ने अयोध्या और मथुरा सहित 17 नगर निगमों को सोलर सिटी के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले शहरों में सौर ऊर्जा का विस्तार एक प्रतीकात्मक संदेश भी देता है—आस्था के शहर अब ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) के भी केंद्र बनेंगे।
शहरी क्षेत्रों में सरकारी भवनों, नगर निगम परिसरों और सार्वजनिक स्थलों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा रहे हैं, जिससे नगर निकायों का बिजली खर्च कम होगा।
जैव ऊर्जा और सीबीजी में बढ़त
राज्य की जैव ऊर्जा नीति-2022 के अंतर्गत अब तक 36 सीबीजी (कंप्रेस्ड बायोगैस) संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं—जो देश में सर्वाधिक माने जा रहे हैं। यह संयंत्र कृषि अपशिष्ट और जैविक कचरे से स्वच्छ ईंधन तैयार करते हैं।
इससे दोहरा लाभ होता है:
- पराली और कचरे की समस्या कम होती है
- ग्रामीण क्षेत्रों में आय के नए स्रोत बनते हैं
ग्रीन हाइड्रोजन: भविष्य की तैयारी
ऊर्जा क्षेत्र में अगला बड़ा कदम ग्रीन हाइड्रोजन को माना जा रहा है। राज्य की ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2024 के तहत दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की स्वीकृति दी गई है। यह कदम संकेत देता है कि उत्तर प्रदेश केवल वर्तमान ऊर्जा जरूरतों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि भविष्य की तकनीकों में भी अग्रणी भूमिका निभाना चाहता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाएं गति पकड़ती हैं, तो औद्योगिक निवेश और निर्यात के नए अवसर खुल सकते हैं।
निष्कर्ष: हरित ऊर्जा की ओर निर्णायक कदम
UP बजट 2026 में 2,104 करोड़ रुपये का प्रावधान महज एक बजटीय घोषणा नहीं, बल्कि ऊर्जा नीति में दीर्घकालिक बदलाव का संकेत है। 22,000 मेगावाट उत्पादन लक्ष्य, 17 सोलर सिटी, 36 सीबीजी संयंत्र और ग्रीन हाइड्रोजन केंद्र—ये सभी पहल मिलकर उत्तर प्रदेश को हरित ऊर्जा मानचित्र पर मजबूत स्थान दिला सकते हैं।
अब असली परीक्षा क्रियान्वयन की है। अगर योजनाएं समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से लागू होती हैं, तो आने वाले वर्षों में यूपी का आसमान सचमुच हरित ऊर्जा की रोशनी से जगमगाता दिख सकता है।











