लखनऊ (09 Feb 2026): Yogi Adityanath की सरकार 11 फरवरी को पेश होने वाले 2026–27 के बजट को सिर्फ वार्षिक आय-व्यय का दस्तावेज नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की दीर्घकालिक आर्थिक छलांग का रोडमैप बनाने जा रही है। लक्ष्य साफ है—वर्ष 2029–30 तक राज्य की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलियन डॉलर (OTD) तक पहुँचाना और आज़ादी के 100वें वर्ष 2047 तक इसे छह ट्रिलियन डॉलर के स्तर पर ले जाना।
लखनऊ में नियोजन विभाग की तैयारियों के बीच संकेत मिल रहे हैं कि इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य के लिए बजट में 50 से 60 हजार करोड़ रुपये तक के अतिरिक्त प्रावधान प्रस्तावित किए जा सकते हैं। विभागों से नई परियोजनाओं का विस्तृत ब्यौरा सरकार को सौंपा जा चुका है, जिनमें उत्पादन, उत्पादकता, निर्यात, स्टार्टअप, उद्योग और बुनियादी ढांचे पर खास जोर है।
सेक्टरवार योजनाएं: उद्योग सबसे आगे, कृषि-पर्यटन-आईटी की मजबूत हिस्सेदारी
चालू वित्तीय वर्ष में 15 विभागों की 130 से अधिक योजनाएं OTD लक्ष्य से जोड़ी गई हैं। इनमें सबसे अधिक 36 योजनाएं भारी व मध्यम उद्योग से संबंधित हैं। 16 योजनाएं कृषि, 15 पर्यटन, 13 आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, जबकि 10-10 योजनाएं पशुधन और लघु उद्योग एवं निर्यात प्रोत्साहन से जुड़ी हैं। इन पर अभी 47,918 करोड़ रुपये से काम चल रहा है—यानी आधार पहले से तैयार है, अब रफ्तार बढ़ानी है।
यह संकेत देता है कि आगामी बजट में सरकार उद्योगिक उत्पादन, कृषि उत्पादकता, सेवा क्षेत्र और निर्यात—चारों पहियों को साथ लेकर चलने की रणनीति पर है।
एआई सिटी, जीसीसी हब और स्टार्टअप इकोसिस्टम: आईटी सेक्टर पर बड़ा दांव
Lucknow और Kanpur को AI City के रूप में विकसित करने, जबकि NCR–लखनऊ–Noida कॉरिडोर को GCC (Global Capability Center) हब बनाने की रूपरेखा पर काम हो रहा है। हर मंडल में इन्क्यूबेटर सेंटर और नए यूनिकॉर्न स्टार्टअप खड़े करने का लक्ष्य रखा गया है।
साथ ही, Indian Space Research Organisation के सहयोग से मौसम पूर्वानुमान के लिए सैटेलाइट पहल, सेमीकंडक्टर और ईवी बैटरी निर्माण में अग्रणी बनने जैसे बिंदु भी विज़न दस्तावेज़ में शामिल हैं। यह बताता है कि बजट केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हाई-टेक विनिर्माण पर भी समानांतर निवेश होगाकृषि से निर्यात तक: उत्पादकता बढ़ाने की योजना
विजन के अनुसार 2029–30 तक कृषि में सिर्फ उत्पादन नहीं, उत्पादकता और एग्री-एक्सपोर्ट पर विशेष जोर रहेगा। प्रसंस्करण (processing), वैल्यू एडिशन और सप्लाई चेन सुधार के जरिए किसानों की आय और राज्य के निर्यात—दोनों बढ़ाने की रणनीति है। पशुधन, दुग्ध, मत्स्य और लघु खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को भी OTD फ्रेमवर्क में जोड़ा गया है।
बुनियादी ढांचा, पर्यटन, शहरी विकास और सामाजिक क्षेत्र
औद्योगिक विकास के साथ-साथ पर्यटन, नगर विकास, अवस्थापना (infrastructure), स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, सामाजिक सुरक्षा और सुशासन के लिए 2029–30 तक स्पष्ट लक्ष्य तय किए गए हैं। 2026–27 का बजट इन लक्ष्यों की पहली बड़ी वित्तीय सीढ़ी माना जा रहा है, जिसमें सेक्टरवार उल्लेखनीय आवंटन दिख सकता है।
नियोजन विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार के मुताबिक, OTD की दिशा में लघु अवधि (short-term) योजनाएं पहले से चिन्हित हैं, जिन्हें अब तेज़ी से जमीन पर उतारने का इरादा है।
क्यों अहम है यह बजट?
यह बजट सिर्फ रकम बढ़ाने की कवायद नहीं, बल्कि ग्रोथ रेट को 20% तक ले जाने की महत्वाकांक्षा का वित्तीय आधार है। अगर प्रस्तावित प्रविधान आकार लेते हैं, तो उत्तर प्रदेश में उद्योग, आईटी, कृषि और निर्यात—चारों मोर्चों पर एक साथ गतिविधि तेज़ होती दिखेगी।









