लखनऊ, सोमवार 09 फरवरी 2026। उत्तर प्रदेश की राजनीति का सबसे अहम कैलेंडर-मौका—UP Budget 2026—आज से औपचारिक रूप से शुरू हो गया। सर्द सुबह, सुरक्षा की कड़ी परतें, मीडिया की कतारें और गलियारों में तेज़ कदमों की आवाज़… विधानभवन के भीतर और बाहर, हर जगह एक अलग तरह की बेचैनी दिखी। वजह साफ है: योगी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल का अंतिम बजट लेकर सदन में उतरने जा रही है, और विपक्ष ने भी मुद्दों की पूरी पोटली खोल रखी है।
संयुक्त सदन को संबोधित करते हुए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने एक वाक्य से पूरे सत्र का नैरेटिव तय कर दिया—उत्तर प्रदेश अब ‘Bottle Neck’ नहीं, ‘Breakthrough’ बन चुका है। यह सिर्फ एक वाक्य नहीं था; बीते वर्षों के विकास-दावों, निवेश, बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक बदलावों का राजनीतिक सार भी था। अभिभाषण के तुरंत बाद वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना द्वारा प्रदेश का आर्थिक सर्वेक्षण पेश किए जाने की रूपरेखा बनी, जो बजट से पहले राज्य की वित्तीय सेहत का आईना माना जाता है।
सदन के भीतर सत्तापक्ष की मेज़ों पर फाइलों का अनुशासन था, तो विपक्षी बेंचों पर सवालों की तैयारी। UP Budget 2026 का यह सत्र शोर-शराबे, तीखे सवालों और जवाबी रणनीति—तीनों का मिश्रण रहने के संकेत दे रहा है।
सरकार का नैरेटिव: उपलब्धियाँ, निवेश और प्रशासनिक बदलाव
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार इस सत्र को उपलब्धियों के लेखे-जोखे की तरह पेश करना चाहती है। राज्यपाल के ‘Breakthrough’ वाले कथन में वही भाव झलकता है—कि उत्तर प्रदेश ने निवेश, सड़क-बिजली-पानी, कानून-व्यवस्था और सेवा-डिलीवरी जैसे क्षेत्रों में अड़चनों (Bottle Necks) को पार किया है। आर्थिक सर्वेक्षण में इन्हीं दावों को आँकड़ों के सहारे पिरोया जाएगा, ताकि बजट भाषण की जमीन मजबूत हो।
सत्तापक्ष का जोर इस बात पर भी है कि अंतिम बजट भविष्य की दिशा दिखाने वाला दस्तावेज़ हो—ऐसा बजट जो अगले चुनावी विमर्श की बुनियाद रखे।
विपक्ष की तैयारी: SIR, महंगाई, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था
विपक्ष ने संकेत दे दिए हैं कि SIR (गहन सर्वेक्षण रिपोर्ट), महंगाई, बेरोजगारी, बिजली-पानी-सड़क और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे सदन में बार-बार उठेंगे। हाल के घटनाक्रम—महोबा में जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का अपने ही विधायक द्वारा घेराव—को भी विपक्ष उदाहरण के तौर पर पेश कर सकता है, ताकि सरकार की अंदरूनी असहजता को रेखांकित किया जा सके।
भाजपा खेमे में UGC से जुड़े तनाव की चर्चा भी है, जिसे विपक्ष राजनीतिक रंग दे सकता है। यानी बहस सिर्फ बजट की मदों तक सीमित नहीं रहेगी; यह सत्र व्यापक राजनीतिक विमर्श का मंच बनने जा रहा है।
आर्थिक सर्वेक्षण: बजट से पहले की असली तस्वीर
परंपरा के मुताबिक, बजट से ठीक पहले पेश होने वाला आर्थिक सर्वेक्षण राज्य की आय-व्यय, विकास दर, राजस्व स्रोतों और व्यय प्राथमिकताओं की दिशा बताता है। UP Budget 2026 के संदर्भ में यह दस्तावेज़ खास होगा, क्योंकि यही अगले दिन/दिनों में आने वाले बजट प्रस्तावों की पृष्ठभूमि तय करेगा। वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना का फोकस इस बात पर रहेगा कि सर्वेक्षण में दिखाई गई तस्वीर बजट भाषण के तर्कों से सुसंगत दिखे।
सदन का माहौल: रणनीति, शोर और प्रतीक
विधानभवन के गलियारों में आज जो दृश्य था, वह हर बजट सत्र की याद दिलाता है—कहीं मंत्री-अधिकारी अंतिम नोट्स देख रहे थे, तो कहीं विपक्षी विधायक मुद्दों की सूची पर अंतिम रेखाएँ खींच रहे थे। मीडिया लॉबी में चर्चा का एक ही केंद्र—UP Budget 2026—और यह सवाल कि क्या आज का दिन शांत रहेगा या शुरुआत से ही तीखा टकराव दिखेगा।
राज्यपाल के ‘Bottle Neck’ से ‘Breakthrough’ वाले वाक्य ने सरकार को एक प्रतीकात्मक बढ़त जरूर दी है, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब आंकड़े, घोषणाएँ और ज़मीनी सवाल आमने-सामने होंगे।
क्यों अहम है यह सत्र?
क्योंकि यह सिर्फ एक बजट नहीं, बल्कि दूसरे कार्यकाल का समापन-संदेश भी है। सरकार इसे उपलब्धियों की कहानी बनाना चाहती है, जबकि विपक्ष इसे सवालों की कसौटी पर कसने को तैयार है। ऐसे में UP Budget 2026 का हर दिन राजनीतिक तापमान बढ़ाने वाला साबित हो सकता है।











