लखनऊ, सोमवार 09 फरवरी 2026। UP Budget Session 2026 के पहले ही दिन सदन का तापमान बहस से ज्यादा हंगामे से बढ़ा हुआ दिखा। विधानमंडल के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण के दौरान और उसके बाद विपक्षी दलों ने जोरदार विरोध दर्ज कराया। शोर-शराबे और नारेबाजी के बीच विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कार्यवाही को मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
9 से 20 फरवरी तक प्रस्तावित इस बजट सत्र की शुरुआत औपचारिक रूप से राज्यपाल के संबोधन से हुई। अभिभाषण में सरकार की प्राथमिकताओं और नीतिगत दिशा का उल्लेख था, लेकिन विपक्ष ने महंगाई, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और एसआईआर जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरते हुए व्यवधान पैदा किया। विपक्ष चालू वित्तीय वर्ष के बजट का हिसाब भी मांगता रहा।
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि सत्र का उद्देश्य जनकल्याण के मुद्दों पर गंभीर चर्चा है और दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि बहस की परंपरा को बनाए रखा जाएगा।
सरकार की ओर से उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “विकसित भारत के साथ विकसित उत्तर प्रदेश” के लक्ष्य को आगे बढ़ाने वाला बजट आने वाला है। उनके अनुसार विपक्ष के पास रचनात्मक मुद्दे नहीं हैं; यदि कोई प्रश्न है तो उसे सदन में रखा जाए, सरकार जवाब देने को तैयार है।
विपक्ष की ओर से शिवपाल सिंह यादव ने एसआईआर के मुद्दे को प्रमुख बताते हुए आरोप लगाया कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों में गड़बड़ी हुई है। सपा विधायक अतुल प्रधान ने कानून-व्यवस्था और धार्मिक स्थलों से जुड़े मुद्दों पर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन की बात कही। सपा विधायक मुकेश वर्मा ने भी कहा कि इस बार एसआईआर सदन में प्रमुख मुद्दा रहेगा।
विधान परिषद में सपा सदस्य आशुतोष सिन्हा वाराणसी से जुड़े मुद्दों को उठाने की तैयारी के साथ पहुंचे। वे अहिल्याबाई की तस्वीर के साथ साइकिल पर विधान भवन पहुंचे, जिसे विपक्ष ने प्रतीकात्मक विरोध बताया।
सत्र की कार्यवाही के कार्यक्रम के अनुसार 10 फरवरी को वर्तमान और पूर्व सदस्यों के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त की जाएगी। इसके बाद नियमित कार्यवाही आगे बढ़ेगी। 20 फरवरी तक प्रस्तावित इस सत्र में 11 फरवरी को वित्त मंत्री द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया जाना है।
पहले दिन की घटनाओं ने साफ संकेत दे दिया है कि UP Budget Session 2026 में सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहसें देखने को मिलेंगी। जहां सरकार विकास एजेंडा सामने रखने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष अपने मुद्दों के साथ आक्रामक रुख अपनाए हुए है।











