लखनऊ (शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026)। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को लोकभवन में हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलकर ‘नरेन्द्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ करने, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को वित्तीय वर्ष 2026-27 में दो निःशुल्क एलपीजी सिलेंडर रिफिल उपलब्ध कराने और 18 शहरों में 1,725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें चलाने जैसे फैसले शामिल हैं।
इसके अलावा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को एक अतिरिक्त साड़ी देने, औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में भवन मानचित्रों की मंजूरी आसान बनाने तथा किसानों से धान और मोटे अनाज की खरीद की व्यवस्था को लेकर भी महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं। इन फैसलों का असर प्रदेश के किसानों, महिलाओं, शहरी यात्रियों, औद्योगिक निवेशकों और पर्यटन क्षेत्र पर पड़ने की उम्मीद है।
जेवर एयरपोर्ट का नाम होगा नरेन्द्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट
यूपी कैबिनेट की बैठक में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर का नाम बदलकर ‘नरेन्द्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति प्रदेश सरकार की कृतज्ञता और उत्तर प्रदेश के विकास में उनके योगदान के सम्मान का प्रतीक बताया।
कैबिनेट ने प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर अभिनंदन प्रस्ताव भी पारित किया। प्रधानमंत्री ने 7 अक्टूबर को सरकार के मुखिया के रूप में 25 वर्ष की सार्वजनिक सेवा पूरी की थी।
मुख्यमंत्री के अनुसार, यह यात्रा ‘सेवा, समर्पण और राष्ट्र प्रथम’ की भावना से प्रेरित रही है। उन्होंने इसे जनसेवा से जनकल्याण और जनभागीदारी से जनविश्वास तक पहुंचने वाली यात्रा के रूप में प्रस्तुत किया।
उज्ज्वला लाभार्थियों को मिलेंगे दो निःशुल्क एलपीजी सिलेंडर
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए भी कैबिनेट ने राहत देने वाला फैसला किया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में पात्र लाभार्थियों को दो निःशुल्क एलपीजी सिलेंडर रिफिल उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
सरकार की ओर से निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, पहले चरण में अक्टूबर से दिसंबर 2026 तक और दूसरे चरण में जनवरी से मार्च 2027 तक निःशुल्क रिफिल उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी।
योजना पर राज्य सरकार का अनुमानित व्यय 2,142.78 करोड़ रुपये बताया गया है। इससे पात्र परिवारों को रसोई गैस के खर्च में राहत मिलने की उम्मीद है। स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल से घरेलू धुएं के संपर्क में कमी लाने और महिलाओं तथा बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा करने में भी मदद मिल सकती है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को मिलेगी एक अतिरिक्त साड़ी
प्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को अब निर्धारित वेशभूषा के लिए एक अतिरिक्त साड़ी उपलब्ध कराई जाएगी। कैबिनेट के फैसले से कुल 3,80,290 कर्मियों को लाभ मिलने का अनुमान है। इस पर राज्य सरकार लगभग 19.02 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
प्रदेश में 1,90,145 आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए 1,90,145 कार्यकर्ताओं और इतनी ही सहायिकाओं के पद स्वीकृत हैं। मौजूदा व्यवस्था के तहत सामान्य योजना में केंद्र और राज्य सरकार के 60:40 के अनुपात में प्रतिवर्ष दो साड़ियां दी जाती हैं। अब इनके अतिरिक्त एक और साड़ी उपलब्ध कराई जाएगी।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं छह वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और 14 से 18 वर्ष की किशोरी बालिकाओं से जुड़ी विभिन्न सेवाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। सरकार का कहना है कि अतिरिक्त साड़ी मिलने से उन्हें विभागीय कार्यों के दौरान निर्धारित वेशभूषा बनाए रखने में सुविधा होगी।
लखनऊ के नौसेना शौर्य संग्रहालय का होगा विस्तार
राजधानी लखनऊ में विकसित किए जा रहे नौसेना शौर्य संग्रहालय के विस्तार की योजना को भी मंजूरी मिली है। परियोजना के तीसरे चरण में करीब 6.8 एकड़ भूमि पर वाटर बॉडी विकसित की जाएगी।
इसके लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) संबंधित भूमि पर्यटन विभाग को एक लाख रुपये की टोकन मनी पर उपलब्ध कराएगा। संग्रहालय परिसर के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी एलडीए को सौंपने का निर्णय लिया गया है।
योजना के तहत नौसेना के जहाजों की प्रतिकृतियां, बोटिंग की सुविधा, लाइट एंड साउंड शो तथा जलीय जीवन और समुद्री जैव विविधता से संबंधित प्रदर्शनियां विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य संग्रहालय को ऐसा पर्यटन केंद्र बनाना है, जहां आगंतुक देश के समुद्री इतिहास और भारतीय नौसेना की तकनीक से परिचित हो सकें।
औद्योगिक क्षेत्रों में भवन मानचित्र मंजूरी की प्रक्रिया होगी आसान
उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के क्षेत्रों में भवन और भूखंड मानचित्रों की मंजूरी को सरल बनाने के लिए ‘उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास प्राधिकरणों हेतु मॉडल भवन विनियम, 2026’ लागू करने के प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिली है।
सरकार के मुताबिक, नए विनियमों से अनुमोदन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और नागरिक अनुकूल बनाने में मदद मिलेगी। इसका उद्देश्य औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि के बेहतर इस्तेमाल, अवस्थापना विकास और निजी निवेश को प्रोत्साहित करना है।
विनिर्माण, पर्यटन, आईटी एवं आईटीईएस, लॉजिस्टिक्स, स्वास्थ्य, शिक्षा और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों को इससे लाभ मिलने की संभावना है। सरकार को उम्मीद है कि प्रक्रिया सरल होने से निवेश संबंधी गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा तथा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य को गति मिलेगी।
18 शहरों में चलेंगी 1,725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें
प्रदेश की नगरीय परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 18 शहरों में ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (जीसीसी) मॉडल पर 1,725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें संचालित करने का निर्णय लिया गया है। अनुबंध की अवधि वाणिज्यिक संचालन शुरू होने की तारीख से 12 वर्ष निर्धारित की गई है।
योजना में 9 मीटर और 12 मीटर लंबाई की बसें शामिल होंगी। इनका संचालन आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरा-वृंदावन, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, शाहजहांपुर, सहारनपुर, वाराणसी और नोएडा (जेवर सहित) में किया जाएगा।
नगर विकास मंत्री अरविंद कुमार शर्मा के अनुसार, शहरवार बसों का प्रस्तावित वितरण इस प्रकार है:
- लखनऊ और कानपुर: 300-300 बसें
- वाराणसी: 250 बसें
- गोरखपुर: 150 बसें
- आगरा, गाजियाबाद, मेरठ और नोएडा (जेवर सहित): 100-100 बसें
- अयोध्या, मथुरा-वृंदावन और प्रयागराज: 50-50 बसें
- अलीगढ़, फिरोजाबाद, बरेली, मुरादाबाद, सहारनपुर, शाहजहांपुर और झांसी: 25-25 बसें
इस योजना का मकसद यात्रियों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना और शहरी आवागमन को सुविधाजनक बनाना है। इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार होने से शहरी परिवहन में स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को भी बढ़ावा मिल सकता है।
31 दिसंबर तक होगी मक्का, बाजरा और ज्वार की खरीद
प्रदेश में किसानों से मोटे अनाज की खरीद 31 दिसंबर तक किए जाने की जानकारी दी गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों को खरीद के 48 घंटे के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
भुगतान किसानों के आधार से जुड़े बैंक खातों में सीधे किया जाएगा। खरीद केंद्रों पर पारदर्शिता बनाए रखने और बिचौलियों की भूमिका रोकने के लिए पहले की तरह ई-पॉप (इलेक्ट्रॉनिक प्वॉइंट ऑफ परचेज) डिवाइस के जरिए बायोमीट्रिक सत्यापन किया जाएगा।
किसान खरीद से संबंधित समस्याओं के लिए टोल फ्री नंबर 18001800150 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा जिला खाद्य विपणन अधिकारी, क्षेत्रीय विपणन अधिकारी और विपणन निरीक्षक से भी सहायता ली जा सकती है।
पश्चिमी यूपी में 12 अक्टूबर से शुरू होगी धान खरीद
खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के तहत पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धान खरीद 12 अक्टूबर से शुरू होगी। पूर्वी उत्तर प्रदेश के संभागों में खरीद प्रक्रिया एक नवंबर से शुरू करने की जानकारी दी गई है।
निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 15 फरवरी 2027 तक और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 28 फरवरी 2027 तक धान खरीद होगी।
धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) कॉमन श्रेणी के लिए 2,441 रुपये और ग्रेड-ए के लिए 2,461 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।
खाद्य एवं रसद मंत्री मनोज कुमार पांडेय के अनुसार, इस बार प्रदेश में 65 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए आठ क्रय एजेंसियों के माध्यम से 4,500 क्रय केंद्र संचालित किए जाएंगे।
पिछले वर्ष प्रदेश में 62 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हुई थी। इस बार लक्ष्य बढ़ाया गया है। सरकार ने किसानों को 48 घंटे के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने और खरीद केंद्रों पर बोरों की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने की बात कही है।
मैनपुरी में 37.86 किलोमीटर सड़क होगी चार लेन
कैबिनेट से जुड़े विवरण में मैनपुरी में 37.86 किलोमीटर लंबे मार्ग को चार लेन में विकसित करने के लिए 328.67 करोड़ रुपये की मंजूरी का भी उल्लेख है। इस परियोजना से संबंधित मार्ग का पूरा नाम, निर्माण एजेंसी और कार्य पूरा होने की समयसीमा की अलग से पुष्टि की जानी चाहिए, ताकि परियोजना का विवरण प्रकाशित करते समय कोई तथ्यात्मक त्रुटि न रहे।
यूपी कैबिनेट के फैसलों का आम लोगों पर क्या होगा असर?
शुक्रवार की बैठक में लिए गए फैसले अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े हैं। उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को मुफ्त सिलेंडर रिफिल मिलने से घरेलू बजट को राहत मिल सकती है, जबकि आंगनबाड़ी कर्मियों को अतिरिक्त साड़ी देने से उनकी कार्यस्थल संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
दूसरी ओर, इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार शहरी परिवहन को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। किसानों के लिए समयबद्ध भुगतान और धान खरीद का बढ़ा लक्ष्य कृषि विपणन व्यवस्था से जुड़े अहम पहलू हैं। औद्योगिक क्षेत्रों में भवन मानचित्रों की मंजूरी सरल होने से निवेश और निर्माण गतिविधियों को गति मिलने की संभावना है।
इन फैसलों का वास्तविक प्रभाव उनके प्रभावी क्रियान्वयन, निर्धारित समयसीमा और लाभार्थियों तक योजनाओं की पहुंच पर निर्भर करेगा।








