लखनऊ (15 फरवरी 2026)। उत्तर प्रदेश सरकार ने बजट 2026-27 में रोजगार सृजन को विकास की केंद्रीय रणनीति बनाते हुए औद्योगिक क्लस्टर, लॉजिस्टिक्स हब और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया है। सरकार का मानना है कि मजबूत औद्योगिक आधार और बेहतर कनेक्टिविटी के जरिए आने वाले वर्षों में प्रदेश में लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर तैयार होंगे।
अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास योजनाओं के लिए 27,103 करोड़ रुपये का प्रावधान इस रणनीति की नींव माना जा रहा है। नीति विशेषज्ञों के अनुसार यह बजट केवल निर्माण और निवेश का दस्तावेज नहीं, बल्कि नौकरी पैदा करने वाली आर्थिक संरचना खड़ी करने की दिशा में ठोस कदम है।
UP Employment Engine: क्लस्टर मॉडल से तेज होगा रोजगार सृजन
सरकार ने औद्योगिक क्लस्टर मॉडल को रोजगार बढ़ाने का सबसे प्रभावी माध्यम माना है। अनुभव बताता है कि जब किसी क्षेत्र में एक बड़ी एंकर यूनिट स्थापित होती है, तो उसके आसपास कच्चा माल, पैकेजिंग, मशीनरी मेंटेनेंस, ट्रांसपोर्ट, वेयरहाउसिंग और सर्विस सेक्टर से जुड़ी कई छोटी इकाइयां विकसित होने लगती हैं।
यही वजह है कि बजट में एमएसएमई सेक्टर के लिए 3,822 करोड़ रुपये (करीब 19% वृद्धि) और वस्त्रोद्योग क्षेत्र के लिए 5,041 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह निवेश न केवल औद्योगिक उत्पादन बढ़ाएगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार का मजबूत इकोसिस्टम भी तैयार करेगा।
वस्त्रोद्योग में 30,000 नए रोजगार का लक्ष्य
बजट में वर्ष 2026-27 के लिए वस्त्रोद्योग क्षेत्र में 30,000 नए रोजगार सृजन का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मानना है कि टेक्सटाइल सेक्टर श्रम-प्रधान होने के कारण तेजी से रोजगार देने की क्षमता रखता है।
साथ ही, सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन के लिए 575 करोड़ रुपये और निवेश प्रोत्साहन नीति के क्रियान्वयन के लिए 1,000 करोड़ रुपये का प्रावधान कर बड़े निवेशकों को आकर्षित करने का प्रयास किया गया है। इससे प्रदेश में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के विस्तार की उम्मीद बढ़ी है।
कनेक्टिविटी सुधरेगी तो लॉजिस्टिक्स सेक्टर चमकेगा
बजट में कई बड़ी कनेक्टिविटी परियोजनाओं को भी रोजगार से सीधे जोड़कर देखा जा रहा है। जेवर एयरपोर्ट को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए 1,100 करोड़ रुपये, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से गंगा एक्सप्रेसवे लिंक हेतु 1,250 करोड़ रुपये और विन्ध्य एक्सप्रेसवे समेत अन्य परियोजनाओं के लिए 500-500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बेहतर सड़क और एक्सप्रेसवे नेटवर्क से माल ढुलाई की लागत और समय दोनों कम होंगे। इससे लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और सप्लाई-चेन मैनेजमेंट जैसे सेक्टर तेजी से विकसित होंगे, जो बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करते हैं।
आईटी, एआई और डेटा सेंटर से हाई-स्किल जॉब्स
उत्तर प्रदेश अब केवल पारंपरिक उद्योगों पर निर्भर नहीं रहना चाहता। बजट में आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के लिए 2,059 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 76 प्रतिशत अधिक है।
एआई मिशन के लिए 225 करोड़ रुपये और साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर के लिए 95.16 करोड़ रुपये का आवंटन दर्शाता है कि सरकार भविष्य की टेक्नोलॉजी आधारित नौकरियों पर फोकस कर रही है। वहीं, पांच गीगावाट क्षमता वाले पांच डेटा सेंटर क्लस्टर विकसित करने के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रारंभिक बजट रखा गया है। इससे आईटी, नेटवर्किंग, क्लाउड मैनेजमेंट और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में उच्च कौशल आधारित रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है।
बदलती तस्वीर: नौकरी मांगने वाले नहीं, अवसर बनाने वाले बनेंगे युवा
विश्लेषकों का मानना है कि औद्योगिक क्लस्टर, लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर विकास जैसी योजनाएं मिलकर प्रदेश में रोजगार का नया मॉडल तैयार करेंगी। इससे छोटे शहरों और अर्धशहरी क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और पलायन की समस्या कम हो सकती है।
बजट 2026-27 साफ संकेत देता है कि उत्तर प्रदेश अब निवेश आधारित विकास से आगे बढ़कर रोजगार आधारित विकास मॉडल की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। आने वाले समय में यदि ये परियोजनाएं तय समय पर जमीन पर उतरीं, तो प्रदेश देश के प्रमुख रोजगार केंद्रों में शामिल हो सकता है।









