लखनऊ, 09 अप्रैल 2026। उत्तर प्रदेश में बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की मेहनत पर जैसे पानी फेर दिया है। खेतों में लहलहाती फसलें अचानक आई आपदा की भेंट चढ़ गईं। ऐसे मुश्किल समय में राज्य सरकार ने हालात की गंभीरता को समझते हुए त्वरित कदम उठाए हैं। यूपी फसल नुकसान सर्वेक्षण को लेकर सरकार अब पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक और कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने गुरुवार को प्रदेश के 9 जिलों का हवाई सर्वेक्षण किया। इन जिलों में बाराबंकी, अयोध्या, अंबेडकरनगर, आजमगढ़, अमेठी, सुल्तानपुर, फतेहपुर, उन्नाव और लखनऊ शामिल हैं—जहां नुकसान की तस्वीर सबसे ज्यादा चिंताजनक बताई जा रही है।
खेतों के ऊपर से हालात का जायजा, प्रशासन को सख्त निर्देश
हवाई सर्वेक्षण के दौरान साफ दिखा कि कई इलाकों में फसलें पूरी तरह गिर चुकी हैं, जबकि कुछ जगहों पर पानी भरने से खेत दलदल बन गए हैं। यह केवल आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि किसानों के मनोबल पर भी गहरी चोट है।
सरकार ने तुरंत सभी जिलाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे जमीनी स्तर पर विस्तृत सर्वेक्षण कर वास्तविक नुकसान का आकलन करें। उद्देश्य साफ है—कोई भी प्रभावित किसान राहत से वंचित न रहे।
“संकट में सरकार साथ खड़ी है” — भरोसा दिलाया गया
उपमुख्यमंत्री और कृषि मंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को भरोसा दिलाया कि यह मुश्किल घड़ी अकेले नहीं झेलनी पड़ेगी। सरकार हरसंभव मदद के लिए प्रतिबद्ध है।
उनका कहना था कि राहत प्रक्रिया में देरी नहीं होनी चाहिए और रिपोर्ट जल्द से जल्द शासन तक पहुंचे, ताकि आर्थिक सहायता सीधे किसानों तक पहुंचाई जा सके।
यह बयान केवल औपचारिक नहीं था—बल्कि उस भरोसे को मजबूत करने की कोशिश थी, जिसकी इस समय किसानों को सबसे ज्यादा जरूरत है।
आजमगढ़ और फतेहपुर में जमीनी सच्चाई की पड़ताल
हवाई सर्वेक्षण के बाद टीम ने आजमगढ़ और फतेहपुर में रुककर जमीनी हालात को करीब से समझा। यहां आयोजित समीक्षा बैठकों में जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठकों में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि सर्वेक्षण कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हर खेत, हर किसान और हर नुकसान का सही रिकॉर्ड तैयार किया जाए—ताकि राहत वितरण में पारदर्शिता बनी रहे।
किसान की चिंता और सरकार की चुनौती
प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में इस समय एक ही सवाल गूंज रहा है—“क्या नुकसान की भरपाई समय पर हो पाएगी?”
फसल केवल आय का साधन नहीं, बल्कि किसान के पूरे साल की उम्मीद होती है। ऐसे में राहत कार्य की गति और पारदर्शिता ही सरकार की असली परीक्षा होगी।
फिलहाल, यूपी फसल नुकसान सर्वेक्षण के जरिए सरकार ने संकेत दे दिया है कि वह हालात को हल्के में नहीं ले रही। अब नजर इस बात पर टिकी है कि कागजों से निकलकर राहत कितनी जल्दी खेतों तक पहुंचती है।










