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मानव संपदा पोर्टल पर 5611 अवकाश आवेदन लंबित, शिक्षा निदेशक सख्त; 10 फरवरी को होगी समीक्षा

On: February 8, 2026
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मानव संपदा पोर्टल पर 5611 अवकाश आवेदन लंबित
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प्रयागराज, 8 फरवरी 2026। उत्तर प्रदेश के बेसिक विद्यालयों में शिक्षकों और कार्मिकों के अवकाश स्वीकृति से जुड़े हजारों आवेदन मानव संपदा पोर्टल पर लंबित पड़े हैं। 5 फरवरी 2026 तक के आधिकारिक विवरण के अनुसार प्रदेशभर में कुल 5611 प्रकरण निस्तारण की प्रतीक्षा में हैं। इनमें चाइल्ड केयर लीव (सीसीएल) के 4704, अर्न लीव के 746, मातृत्व अवकाश के 106 और चिकित्सकीय अवकाश के 55 मामले शामिल हैं। तय समयसीमा के बावजूद फाइलों का अटकना प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े कर रहा है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा निदेशक (बेसिक) प्रताप सिंह बघेल ने सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को पत्र जारी कर जवाब-तलब किया है। निर्देश साफ है—सभी लंबित मामलों का निस्तारण अनिवार्य रूप से शनिवार तक किया जाए। पत्र में यह भी उल्लेख है कि 10 फरवरी को मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से मानव संपदा पोर्टल की समीक्षा की जाएगी, इसलिए देरी के कारणों का स्पष्ट ब्योरा देना होगा।

जनपदवार तस्वीर देखें तो सबसे अधिक लंबित मामले सीतापुर (262) और उन्नाव (200) में हैं। इन दोनों जिलों में सीसीएल के क्रमश: 207 और 185 प्रकरण अटके हुए हैं। प्रयागराज में कुल 166 मामले लंबित बताए गए, जिनमें 144 मातृत्व अवकाश और 22 अर्न लीव के आवेदन शामिल हैं। इसके अलावा लखनऊ (148), मेरठ (110), मोरादाबाद (179), रायबरेली (145), वाराणसी (164), आगरा (175), बाराबंकी (191), बरेली (160), बहराइच (106), बिजनौर (149), बुलंदशहर (115), फतेहपुर (152), गोरखपुर (118), हापुड़ (106), कानपुर देहात (130) और कानपुर नगर (122) में भी उल्लेखनीय संख्या में प्रकरण लंबित हैं।

प्रदेश के 75 जिलों में से 19 जिलों में 100 से अधिक आवेदन लंबित पाए गए हैं, जबकि शेष 56 जिलों में यह संख्या 100 से कम है। प्रतापगढ़ में 54, कौशांबी में 52, अलीगढ़ में 63, अयोध्या में 52, बलिया में 57 और जौनपुर में 92 प्रकरण निस्तारण की प्रतीक्षा में हैं।

इधर प्रयागराज के बीएसए अनिल कुमार ने अलग तस्वीर पेश की है। उनका दावा है कि 6 फरवरी को मानव संपदा पोर्टल पर सभी लंबित प्रकरणों का निस्तारण कर दिया गया। कुछ अवकाश स्वीकृत किए गए, कुछ निरस्त हुए। उनके अनुसार, कई शिक्षक निरस्तीकरण के बाद तुरंत दोबारा आवेदन कर देते हैं, जिससे पोर्टल पर संख्या बढ़ती दिखाई देती है। फिलहाल, प्रतिदिन शाम तक सभी प्रकरण निस्तारित कर दिए जाते हैं।

शिक्षा विभाग ने जिलों से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि किन परिस्थितियों में आवेदन समयसीमा में निस्तारित नहीं हो पा रहे हैं। आगामी समीक्षा को देखते हुए प्रशासनिक तंत्र पर दबाव साफ नजर आ रहा है। अब निगाहें 10 फरवरी की समीक्षा पर हैं, जहां मानव संपदा पोर्टल की कार्यक्षमता और जिलों की जवाबदेही दोनों की परख होगी।

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