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यूपी में कारोबार की राह आसान: औद्योगिक क्षेत्रों की कनेक्टिविटी पर 1000 करोड़ रुपये खर्च करेगी योगी सरकार

On: February 13, 2026
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औद्योगिक क्षेत्रों की कनेक्टिविटी पर 1000 करोड़ रुपये खर्च करेगी योगी सरकार
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लखनऊ, 13 फरवरी 2026। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में निवेश और उद्योगों को नई गति देने के लिए अपने बजट में बड़ा दांव खेला है। सरकार का जोर साफ तौर पर “यूपी में कारोबार की राह आसान” बनाने पर दिख रहा है, जहां एक ओर उद्योगों को बेहतर माहौल देने की कोशिश है, वहीं दूसरी ओर आम नागरिकों के लिए ईज ऑफ लिविंग (जीवन की सुगमता) को भी प्राथमिकता दी गई है।

बजट में औद्योगिक विकास के लिए 27,103.49 करोड़ रुपये, जबकि नगर विकास और आवास एवं शहरी विकास के लिए 34,219 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा एमएसएमई सेक्टर को मजबूती देने और औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंच आसान बनाने के लिए 1000 करोड़ रुपये अलग से रखे गए हैं। सरकार का मानना है कि मजबूत कनेक्टिविटी और सरल प्रक्रियाएं ही निवेशकों का भरोसा बढ़ाती हैं।

नीतियों में बदलाव से निवेशकों को राहत

राज्य सरकार लंबे समय से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को लेकर काम कर रही है। इसी क्रम में इन्वेस्ट यूपी के सीईओ विजय किरण आनंद ने औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद कर उनके सुझाव जुटाए, जिनके आधार पर सुधारों की दिशा तय की गई।

अब प्रदेश में 45 विभागों की 525 से अधिक सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। सरकार जल्द ही निवेश मित्र 3.0 लॉन्च करने की तैयारी में है, जिसमें एआई आधारित डैशबोर्ड, रीयल-टाइम ट्रैकिंग, स्वचालित सूचनाएं और नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम से एकीकृत व्यवस्था शामिल होगी। यह कदम प्रशासनिक प्रक्रियाओं को तेज और पारदर्शी बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

जटिल अनुपालनों में बड़ी कटौती

उद्योग जगत की लंबे समय से शिकायत रही है कि जटिल नियमों और अनुपालनों से कारोबारी माहौल प्रभावित होता है। सरकार ने इस दिशा में बड़े फैसले लेते हुए 65 विभागों में 4,675 अनुपालनों को कम किया है।

  • 4,098 अनुपालनों का डिजिटलीकरण और सरलीकरण किया गया
  • 577 प्रावधानों को अपराधमुक्त (डीक्रिमिनलाइज) किया गया
  • कई पुराने अधिनियम, नियम और विनियम निरस्त किए गए

इसके अलावा ट्रेड लाइसेंस की अनिवार्यता खत्म की गई और 20 से कम कर्मचारियों वाली दुकानों के लिए पंजीकरण की जरूरत हटाई गई। श्रम, अग्निशमन, पर्यावरण और जल प्रदूषण जैसे मामलों में सजा को आर्थिक दंड में बदलने का निर्णय भी उद्यमियों को बड़ी राहत देने वाला माना जा रहा है।

बेहतर कनेक्टिविटी से तेज होगा कारोबार

सरकार का मानना है कि उद्योगों की सफलता केवल नीतियों से नहीं बल्कि मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर से तय होती है। इसी वजह से सड़क और सेतु निर्माण के लिए 34,468 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है।

नार्थ-साउथ कॉरिडोर, बाईपास, रिंग रोड, फ्लाईओवर और औद्योगिक लॉजिस्टिक मार्गों के विकास पर खास जोर दिया गया है। इससे प्रदेश के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों के बीच माल परिवहन तेज और सुरक्षित होगा, जिससे उद्योगों की लागत कम होने की उम्मीद है।

फिलहाल राज्य में 7 एक्सप्रेसवे संचालित हैं, 3 एक्सप्रेसवे निर्माणाधीन हैं और 12 नए एक्सप्रेसवे प्रस्तावित किए गए हैं।

एयर कनेक्टिविटी भी बनेगी गेम चेंजर

उत्तर प्रदेश में इस समय 4 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों सहित कुल 16 हवाई अड्डे संचालन में हैं। जल्द ही जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का संचालन शुरू होने से निर्यातकों को वैश्विक बाजार तक पहुंचने में बड़ी सहूलियत मिलेगी। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह हवाई अड्डा राज्य को लॉजिस्टिक हब के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

पत्रकारिता विश्लेषण (Context Insight)

राज्य सरकार का यह बजट साफ संकेत देता है कि उत्तर प्रदेश केवल पारंपरिक कृषि आधारित अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि खुद को औद्योगिक और निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करने की रणनीति पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। नियमों के सरलीकरण, डिजिटलीकरण और कनेक्टिविटी पर भारी निवेश से यह संदेश जाता है कि सरकार उद्योगों के लिए “अनुकूल वातावरण” बनाने की दिशा में आक्रामक नीति अपना रही है।

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