लखनऊ, 13 फरवरी 2026। उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में गुरुवार को निवेश, रोजगार और यूपी में OBC छात्रवृत्ति को लेकर सदन में गंभीर बहस देखने को मिली। सवाल-जवाब के बीच सरकार ने जहां निवेश और रोजगार के आंकड़े पेश किए, वहीं पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए बड़ा आश्वासन भी दिया।
वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि प्रदेश में अब तक 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश धरातल पर उतर चुका है, जिससे 15 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं। वहीं पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप ने स्पष्ट घोषणा की कि यूपी में OBC छात्रवृत्ति से कोई भी पात्र छात्र-छात्रा वंचित नहीं रहेगा।
निवेश और रोजगार पर सरकार का दावा
सपा सदस्य डॉ. रागिनी के प्रश्न पर औद्योगिक विकास मंत्री नन्दगोपाल गुप्ता ‘नन्दी’ ने जवाब दिया। असहमति के बाद सुरेश खन्ना ने विस्तृत स्पष्टीकरण देते हुए निवेश प्रक्रिया के तीन चरण बताए—
- एमओयू (समझौता ज्ञापन)
- ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी
- परियोजनाओं का वास्तविक क्रियान्वयन
उन्होंने कहा कि कोई भी निवेशक कानून-व्यवस्था, कच्चे माल की उपलब्धता और आधारभूत ढांचे की स्थिति का आकलन करने के बाद ही आगे बढ़ता है। सरकार का दावा है कि प्रदेश में निवेश का बड़ा हिस्सा अब धरातल पर उतर चुका है।
रोजगार के संदर्भ में उन्होंने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के आंकड़े पेश किए। वर्ष 2017 से पहले जहां प्रदेश में 21.24 लाख सदस्य थे, अब यह संख्या बढ़कर 40.20 लाख हो गई है। सरकार इसे रोजगार सृजन का ठोस संकेत मान रही है।
औद्योगिक विकास दर पर भी प्रदेश ने राष्ट्रीय औसत को पीछे छोड़ने का दावा किया। जहां देश की इंडस्ट्रियल ग्रोथ 11.9 प्रतिशत बताई गई, वहीं उत्तर प्रदेश में यह दर 25 प्रतिशत तक पहुंचने की बात कही गई।
निजी क्षेत्र और आरक्षण पर बहस
सदन में निजी क्षेत्र में दलितों और पिछड़ों को रोजगार देने के सवाल पर भी चर्चा हुई। मंत्री ने स्पष्ट किया कि निजी कंपनियां नियुक्ति के समय कौशल और आवश्यकता को प्राथमिकता देती हैं और वहां आरक्षण का प्रावधान लागू नहीं होता। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई बार तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
यूपी में OBC छात्रवृत्ति: बजट तीन गुना बढ़ा
बहस के बीच सबसे अहम घोषणा यूपी में OBC छात्रवृत्ति को लेकर सामने आई। नरेन्द्र कश्यप ने कहा कि पिछड़ा वर्ग के किसी भी पात्र छात्र को छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि पूर्ववर्ती सरकार में विभाग का बजट 1286 करोड़ रुपये था, जिसे वर्तमान सरकार ने बढ़ाकर लगभग 3500 करोड़ रुपये कर दिया है—जो लगभग तीन गुना वृद्धि है।
इस वित्तीय वर्ष में 38 लाख छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मंत्री ने कहा कि धन की कमी छात्रवृत्ति वितरण में बाधा नहीं बनने दी जाएगी।
पत्रकारिता विश्लेषण: सामाजिक संतुलन की ओर संकेत
बजट सत्र की बहस से यह स्पष्ट है कि सरकार एक ओर निवेश और औद्योगिक विकास के जरिए आर्थिक मजबूती दिखाना चाहती है, तो दूसरी ओर सामाजिक न्याय के मुद्दे—विशेषकर यूपी में OBC छात्रवृत्ति—को लेकर ठोस संदेश देना चाहती है।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि बढ़ता हुआ छात्रवृत्ति बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि सामाजिक आधार को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि घोषित लक्ष्य कितनी तेजी और पारदर्शिता से जमीन पर उतरता है।











