लखनऊ, 09 नवंबर 2025 (रविवार): उत्तर प्रदेश में शहरी आवागमन शीघ्र ही नए दौर में प्रवेश करने जा रहा है। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के अनुसार, वर्ष 2047 तक यूपी के सात प्रमुख शहरों में कुल 850 किमी का मेट्रो नेटवर्क विकसित किया जाएगा, जो देश में सबसे बड़े शहरी परिवहन परियोजनाओं में से एक साबित हो सकता है। इस योजना का विस्तृत खाका UP Metro Network के विज़न डॉक्यूमेंट में तैयार किया गया है।
🚇 7 शहरों में मेट्रो का विस्तार, 350+ किमी लखनऊ-कानपुर-आगरा में
नगर विकास विभाग द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट में बताया गया है कि लखनऊ, कानपुर और आगरा जैसे शहरों में ही 350 किमी से अधिक नए मेट्रो कॉरिडोर जोड़े जाने का प्रस्ताव है। यह नेटवर्क इन शहरों के न सिर्फ यातायात दबाव को कम करेगा, बल्कि नई बसावटों और औद्योगिक क्षेत्रों को भी कनेक्ट करेगा।
इस पूरी योजना को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रस्तुति अर्बन मोबिलिटी इंडिया कॉन्फ्रेंस एंड एक्सपो 2025 के समापन सत्र में, गुरुग्राम (हरियाणा) में रविवार को की गई।
🧭 ‘नॉन-फेयर रेवेन्यू’ पर विशेष फोकस
उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC) के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने बताया कि जब तक मेट्रो सेवाओं के साथ राजस्व के नए स्त्रोत नहीं जोड़े जाएंगे, तब तक यह परियोजनाएँ आत्मनिर्भर नहीं बन पाएंगी। इसलिए, मेट्रो स्टेशनों को सिर्फ यात्रा के लिए नहीं, बल्कि व्यावसायिक, सामाजिक और सामुदायिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
उनके अनुसार, मेट्रो कॉरिडोर में निम्नलिखित माध्यमों से नॉन-फेयर रेवेन्यू लगातार बढ़ाया जा रहा है—
- स्टेशन कॉम्प्लेक्स में व्यावसायिक दुकानें और स्टॉल
- विज्ञापन और डिजिटल साइनेज
- बुक फेयर, फूड कोर्ट, एनजीओ स्टॉल
- प्रॉपर्टी डेवलपमेंट और स्टेशन एयरस्पेस का उपयोग
📊 टियर-2 शहरों में यूपी मेट्रो का प्रदर्शन उल्लेखनीय
आई-मेट्रो द्वारा जारी किए गए परफ़ॉर्मेंस इंडेक्स (KPI) में, उत्तर प्रदेश की मेट्रो ने टियर-2 शहरों की अन्य मेट्रो प्रणालियों के मुकाबले बेहतर परिणाम दिए हैं। यह दर्शाता है कि न केवल यात्री संख्या या किराया-वसूली बल्कि संचालन, संरचना और इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में भी यूपी मेट्रो आगे है।
सुशील कुमार ने बताया:
“हमारी कोशिश है कि मेट्रो सिर्फ एक यात्रा साधन न होकर शहर की आर्थिक और सामाजिक ऊर्जा का केंद्र बने। इसके लिए सभी शहरी परिवहन मॉडल्स के साथ एकीकृत विकास पर जोर दिया जा रहा है।”








