लखनऊ, बुधवार, 28 जनवरी 2026। उत्तर प्रदेश में हर गांव तक नल से शुद्ध जल पहुँचाने का लक्ष्य अब निर्णायक मोड़ पर दिखाई दे रहा है। जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने बताया कि प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत चल रही करीब 40,000 ग्रामीण पेयजल योजनाओं का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। इन योजनाओं के पूरा होते ही शेष गांवों में भी घर-घर नल से स्वच्छ पेयजल की नियमित आपूर्ति शुरू हो जाएगी।
मंगलवार (27 जनवरी) को नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में आयोजित मंत्री स्तरीय नीतिगत संवाद में शामिल हुए स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने ग्रामीण पेयजल आपूर्ति के क्षेत्र में पिछले वर्षों में तेज़ और ठोस प्रगति दर्ज की है। उन्होंने साझा किया कि 15 अगस्त 2019 तक प्रदेश में केवल 5,16,000 ग्रामीण परिवारों (कुल का लगभग 1.93%) को ही नल से जल उपलब्ध था। आज यह आंकड़ा बढ़कर 85% से अधिक ग्रामीण परिवारों तक पहुँच चुका है।
मंत्री ने विशेष रूप से बुंदेलखंड और विन्ध्य क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां अधिकांश गांवों में जल जीवन मिशन के कार्य पूर्ण हो चुके हैं। इससे महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव आया है—घंटों पानी ढोने की मजबूरी कम हुई है, स्वास्थ्य और समय दोनों की बचत हुई है, और परिवारों की दिनचर्या अधिक व्यवस्थित हुई है।
10 वर्षों तक संचालन व अनुरक्षण की जिम्मेदारी, गुणवत्ता पर जोर
स्वतंत्र देव सिंह ने बताया कि जल जीवन मिशन से पहले बनी कई ग्रामीण पाइप पेयजल योजनाएं ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित कर दी जाती थीं। सीमित वित्तीय संसाधनों और तकनीकी दक्षता के अभाव में विद्युत बिल, रखरखाव और तकनीकी देखरेख प्रभावित होती थी, जिससे कई योजनाएं समय के साथ बंद पड़ जाती थीं।
इस चुनौती से निपटने के लिए प्रदेश सरकार ने नीति स्तर पर बदलाव किया है। अब निर्माण कार्य करने वाली एजेंसियों को ही 10 वर्षों तक संचालन एवं अनुरक्षण (O&M) की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। इससे निर्माण की गुणवत्ता, समय पर रखरखाव और जवाबदेही सुनिश्चित होगी, और योजनाएं लंबे समय तक सुचारु रूप से चलती रहेंगी।
सौर ऊर्जा आधारित मॉडल से लागत में कमी, गुणवत्ता जांच की बहुस्तरीय व्यवस्था
मंत्री ने बताया कि प्रदेश की 80% से अधिक पेयजल योजनाएं सौर ऊर्जा आधारित बनाई गई हैं। इससे संचालन और अनुरक्षण की लागत में लगभग 50% तक कमी आने का अनुमान है, साथ ही बिजली पर निर्भरता घटेगी और पर्यावरणीय लाभ भी मिलेगा।
पेयजल की गुणवत्ता को लेकर भी बहुस्तरीय व्यवस्था की गई है। राज्य स्तर पर प्रयोगशालाओं में नियमित परीक्षण कराया जा रहा है। इसके साथ ही हर गांव में 5 महिलाओं को जल गुणवत्ता परीक्षण का प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि स्थानीय स्तर पर भी पानी की जांच होती रहे और किसी समस्या की तुरंत पहचान हो सके।
नई दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के जलशक्ति मंत्री उपस्थित रहे, जहां ग्रामीण पेयजल सेवाओं के सतत संचालन, रखरखाव और गुणवत्ता सुधार पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ।
स्वतंत्र देव सिंह ने विश्वास जताया कि शेष योजनाओं के पूरा होते ही उत्तर प्रदेश के हर गांव में नल से शुद्ध जल उपलब्ध कराने का लक्ष्य साकार हो जाएगा—और यह बदलाव ग्रामीण जीवन की बुनियादी जरूरतों को स्थायी रूप से सुदृढ़ करेगा।








