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ODOP योजना से 3.16 लाख रोजगार: 200 करोड़ के बजट से यूपी के कारीगरों को नई उड़ान

On: February 12, 2026
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ODOP योजना से 3.16 लाख रोजगार
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लखनऊ, 12 फरवरी 2026। उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में यदि किसी योजना ने जमीनी स्तर पर बदलाव की ठोस कहानी लिखी है, तो वह है ODOP योजना। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वर्ष 2018 में शुरू हुई ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ पहल अब महज़ सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की आजीविका का आधार बन चुकी है।

विधानसभा के बजट सत्र 2026-27 के दौरान एमएसएमई मंत्री राकेश सचान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह योजना “ब्रांडिंग से आगे बढ़कर सामाजिक-आर्थिक पुनर्जागरण का माध्यम” बन गई है। आंकड़े भी इस दावे की पुष्टि करते हैं।

निर्यात में रिकॉर्ड उछाल

वर्ष 2017-18 में उत्तर प्रदेश का कुल निर्यात जहां ₹86 हजार करोड़ था, वहीं अब यह बढ़कर ₹1.84 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है। उल्लेखनीय तथ्य यह है कि इस निर्यात में लगभग 50% हिस्सेदारी ODOP और पारंपरिक हस्तशिल्प उत्पादों की है।

सहारनपुर की लकड़ी नक्काशी, भदोही की कालीन, मुरादाबाद का पीतल, वाराणसी की बनारसी साड़ी—ये सिर्फ उत्पाद नहीं, बल्कि पीढ़ियों की मेहनत और हुनर की पहचान हैं। अब यही पहचान अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूपी का ब्रांड बन रही है।

3.16 लाख नए रोजगार

ODOP योजना के तहत अब तक 3.16 लाख नए रोजगार सृजित हुए हैं। यह आंकड़ा केवल नौकरी का नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। गांवों में रहने वाले कारीगरों के लिए यह योजना किसी संजीवनी से कम नहीं रही।

सरकार ने इसे मजबूत करने के लिए त्रिस्तरीय रणनीति अपनाई है:

1. प्रशिक्षण और तकनीकी उन्नयन:
अब तक 1,31,000 से अधिक कारीगरों को नि:शुल्क प्रशिक्षण और आधुनिक टूल किट उपलब्ध कराई गई है। इससे उत्पादों की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता दोनों में वृद्धि हुई है।

2. वित्तीय सहायता:
चालू वित्तीय वर्ष में ODOP के लिए बजट को ₹145 करोड़ से बढ़ाकर ₹200 करोड़ कर दिया गया है। सहारनपुर में 454 हस्तशिल्पियों को ₹16.26 करोड़ की मार्जिन मनी वितरित की गई, जिससे छोटे उद्यमों को सीधी राहत मिली।

3. सुरक्षा कवच:
कारीगरों को मुख्यमंत्री दुर्घटना बीमा योजना के तहत ₹5 लाख तक का बीमा कवर दिया जा रहा है। साथ ही उन्हें आयुष्मान भारत योजना से जोड़कर स्वास्थ्य सुरक्षा भी सुनिश्चित की गई है।

79 उत्पादों को GI टैग

उत्तर प्रदेश के 79 उत्पादों को GI (Geographical Indication) टैग मिल चुका है। इससे वैश्विक बाजार में उत्पादों की विशिष्ट पहचान मजबूत हुई है। GI टैग केवल पहचान नहीं, बल्कि नकली उत्पादों से सुरक्षा का कानूनी कवच भी है।

‘वन डिस्ट्रिक्ट वन व्यंजन’ की तैयारी

ODOP योजना की सफलता के बाद सरकार अब ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन व्यंजन’ पहल की तैयारी कर रही है। उद्देश्य है—स्थानीय खान-पान को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित करना। अवध का कबाब, मथुरा का पेड़ा, बनारस की कचौड़ी—अब यह स्वाद भी पहचान का हिस्सा बनेगा।

आर्थिक बदलाव की नई पटकथा

ODOP योजना ने यह साबित किया है कि यदि नीति में स्थानीयता और बाजार में वैश्विक दृष्टि का संतुलन हो, तो विकास का मॉडल टिकाऊ बन सकता है। उत्तर प्रदेश अब केवल उपभोक्ता राज्य नहीं, बल्कि निर्यातक राज्य के रूप में उभर रहा है।

योजना ने कारीगरों को सिर्फ आय नहीं दी, बल्कि उनकी कला को सम्मान दिलाया है। यही वजह है कि ODOP आज ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की मजबूत कड़ी बन चुका है।

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