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शत्रु संपत्ति की ई-नीलामी से चमकेगा यूपी का खजाना, पहले चरण में 1000 संपत्तियां, ₹1000 करोड़ राजस्व का अनुमान

On: February 7, 2026
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शत्रु संपत्ति की ई-नीलामी से चमकेगा यूपी का खजाना
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लखनऊ, 07 फरवरी 2026। बंटवारे और युद्धों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से जुड़ी शत्रु संपत्ति अब उत्तर प्रदेश के लिए राजस्व का बड़ा स्रोत बनकर उभर रही है। केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप, राज्य में ऑनलाइन ई-नीलामी के जरिए इन संपत्तियों का निस्तारण तेज किया गया है। पहले चरण में 1000 संपत्तियों को नीलामी सूची में रखा गया है, जिनमें से करीब 400 का प्रक्रिया-चक्र पूरा हो चुका है और लगभग ₹200 करोड़ की आय दर्ज की जा चुकी है। वर्ष के अंत तक शेष संपत्तियों से कुल मिलाकर करीब ₹1000 करोड़ राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है।

प्रदेश में अब तक लगभग 6,500 शत्रु संपत्तियां चिह्नित की गई हैं। देशभर में यह संख्या करीब 13,000 बताई जाती है, जिन्हें भारत सरकार की अभिरक्षा में लिया जा चुका है। कई संपत्तियों पर वर्षों से अतिक्रमण या उपयोगहीनता की स्थिति थी। प्रशासन का तर्क है कि ई-नीलामी से एक ओर विवादों का निपटारा होगा, दूसरी ओर सरकारी खजाने को मजबूती मिलेगी।

ई-नीलामी में कौन और कैसे?

Enemy Property India के पोर्टल पर समय-समय पर संपत्तियों की सूची, शर्तें और नीलामी कैलेंडर अपलोड किया जा रहा है। प्रक्रिया में कोई भी पात्र व्यक्ति भाग ले सकता है, लेकिन कब्जेदारों को प्राथमिकता दी गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में ₹1 करोड़ तक और शहरी क्षेत्रों में ₹5 करोड़ तक अनुमानित मूल्य वाली संपत्तियों पर पहले कब्जेदार को खरीद का प्रस्ताव दिया जाएगा। असमर्थ होने पर संपत्ति खुली नीलामी में जाएगी।

कानूनी पेच: राजा महमूदाबाद की संपत्तियां फिलहाल बाहर

Raja of Mahmudabad Amir Ahmad Khan से जुड़ी संपत्तियां इस नीलामी में शामिल नहीं हैं। इन पर स्वामित्व को लेकर मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए किसी प्रकार की प्रशासनिक कार्रवाई रोक दी गई है।

लखनऊ में फैली ऐतिहासिक संपत्तियां, फिलहाल नीलामी से अलग

लखनऊ में हजरतगंज से मलिहाबाद तक दो सौ से अधिक ऐसी इमारतें और भू-खंड बताए जाते हैं, जिनका संबंध महमूदाबाद एस्टेट से जोड़ा जाता है—जैसे बटलर पैलेस परिसर, अमीनाबाद और चौक क्षेत्र की पुरानी हवेलियां, कैसरबाग और गोलागंज के आवासीय-व्यावसायिक हिस्से, तथा कई ऐतिहासिक इमारतें। विरासत और कानूनी दावों के कारण ये संपत्तियां फिलहाल ई-नीलामी सूची से बाहर रखी गई हैं।

क्यों अहम है यह कदम?

  • अतिक्रमित/निष्प्रयोज्य संपत्तियों का वैधानिक निस्तारण
  • कब्जेदारी विवादों में कमी
  • पारदर्शी डिजिटल प्रक्रिया से भरोसा
  • राज्य के लिए बड़े पैमाने पर राजस्व सृजन

प्रशासन का मानना है कि चरणबद्ध ई-नीलामी से न केवल दशकों पुराने फाइल-विवाद कम होंगे, बल्कि शहरी-ग्रामीण भू-संपदा का उत्पादक उपयोग भी संभव होगा। आने वाले समय में लगभग 3000 और संपत्तियों को इसी प्रक्रिया में लाने की योजना है।

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