लखनऊ, 12 फरवरी 2026। यूपी विधान परिषद में भ्रष्टाचार पर हंगामा गुरुवार को उस समय तेज़ हो गया, जब समाजवादी पार्टी (सपा) के सदस्यों ने विकास प्राधिकरणों की कार्यप्रणाली, किसानों को मुआवज़ा और वाराणसी में कथित अवैध निर्माण को लेकर सरकार को घेरा। सदन का माहौल कुछ ही मिनटों में तल्ख़ हो गया—आरोप, प्रत्यारोप और फिर नारेबाज़ी। अंततः सपा सदस्यों ने बहिर्गमन (Walkout – सदन से बाहर जाना) कर दिया।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, यह टकराव सिर्फ़ प्रक्रियागत असहमति नहीं था; इसके पीछे ज़मीन, रोज़गार और कानून-व्यवस्था जैसे संवेदनशील मुद्दे हैं, जो सीधे जनभावनाओं से जुड़े हैं।
विकास प्राधिकरणों पर आरोप, किसानों के मुआवज़े का सवाल
शून्यकाल (Zero Hour – तात्कालिक जनहित मुद्दों पर चर्चा का समय) के दौरान नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव सहित सपा के सदस्यों—आशुतोष सिन्हा, डॉ. मान सिंह यादव, शाहनवाज़ खान और मुकुल यादव—ने आरोप लगाया कि विकास प्राधिकरण भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition – भूमि अधिग्रहण) तो कर रहे हैं, लेकिन किसानों को उनकी ज़मीन का “उचित मूल्य” नहीं मिल रहा।
सदस्यों ने वाराणसी में अवैध कब्ज़ों के नाम पर मंदिरों और दुकानों को हटाए जाने का भी मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि घाटों के आसपास कथित रूप से होटलों का निर्माण हुआ है, जबकि छोटे व्यापारियों और गरीबों पर सख़्ती दिखाई जा रही है। विपक्ष ने इसे “दोहरी नीति” करार दिया।
सत्ता पक्ष की ओर से आपत्ति दर्ज होते ही सदन में शोर बढ़ गया। कुछ देर तक कार्यवाही बाधित रही।
सत्ता पक्ष का पलटवार: विपक्ष ‘विकास विरोधी’
सरकार की ओर से जवाब देते हुए मंत्री अनिल राजभर ने विपक्ष पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि राज्य में बुनियादी ढांचे (Infrastructure – आधारभूत संरचना), धार्मिक और पर्यटन विकास के कार्य तेज़ी से हो रहे हैं, जिसे विपक्ष पचा नहीं पा रहा। उनके शब्दों में, “जब सनातन की विचारधारा आगे बढ़ती है तो आपसे देखा नहीं जाता। विपक्ष विकास विरोधी है।”
इस बयान के बाद सपा सदस्यों ने नारेबाज़ी तेज़ कर दी और अंततः सदन से बहिर्गमन कर दिया।
राज्यपाल के अभिभाषण पर भी घेरा
भोजनावकाश के बाद राज्यपाल के अभिभाषण (धन्यवाद प्रस्ताव) पर चर्चा के दौरान भी विपक्ष ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया। नेता प्रतिपक्ष ने कानून-व्यवस्था (Law and Order – विधि-व्यवस्था), बेरोज़गारी (Unemployment – बेरोज़गारी) और किसानों की आय जैसे मुद्दों को उठाया।
ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने का वादा ज़मीनी स्तर पर पूरा नहीं हुआ। साथ ही महाविद्यालयों में शिक्षकों की कमी और शैक्षिक संसाधनों की अनुपलब्धता पर भी चिंता जताई गई।
सत्ता पक्ष की ओर से भाजपा सदस्यों—संतोष सिंह, योगेश चौधरी, साकेत मिश्रा, रमा निरंजन और अवनीश कुमार सिंह—ने सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में निवेश, सड़क निर्माण और औद्योगिक विकास की रफ्तार बढ़ी है।
राजनीतिक संकेत क्या हैं?
यूपी विधान परिषद में भ्रष्टाचार पर हंगामा केवल एक दिन की घटना नहीं, बल्कि चुनावी वर्ष की आहट भी माना जा रहा है। भूमि अधिग्रहण, शहरी विकास और कानून-व्यवस्था ऐसे विषय हैं जो ग्रामीण और शहरी—दोनों मतदाताओं को प्रभावित करते हैं।
विपक्ष इसे जवाबदेही (Accountability – जवाबदेही) का प्रश्न बता रहा है, जबकि सरकार इसे विकास (Development – विकास) की प्रक्रिया में बाधा डालने का प्रयास कह रही है।
सदन की कार्यवाही भले स्थगित हो जाए, लेकिन बहस अब सड़क और सोशल मीडिया तक पहुँच चुकी है। आने वाले सत्रों में यह मुद्दा और गरमाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।











