लखनऊ, 13 फरवरी 2026। उत्तर प्रदेश विधानसभा का माहौल गुरुवार को कुछ अलग था। सामान्य प्रश्नोत्तर और राजनीतिक बहसों के बीच अचानक एक 14 मिनट की फिल्म ने सदन का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। यह फिल्म यूपी विधानसभा में चार साल के बदलावों पर आधारित थी, जिसमें विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के कार्यकाल के दौरान हुए सुधार, सौंदर्यीकरण और जनसुलभ पहलों को विस्तार से दिखाया गया।
फिल्म समाप्त होते ही सदन में तालियों की गूंज सुनाई दी। सत्ता पक्ष ही नहीं, विपक्षी सदस्यों ने भी इस प्रस्तुति का स्वागत किया।
कायाकल्प से लेकर जनसुलभ पहल तक
फिल्म में विधानसभा परिसर के व्यापक कायाकल्प की तस्वीरें दिखाई गईं—गलियारों का सौंदर्यीकरण, आधुनिक सुविधाओं का विस्तार, दर्शक दीर्घा में किए गए सुधार और आमजन के लिए संवाद को सुलभ बनाने के प्रयास। सेल्फी प्वाइंट की स्थापना से लेकर परिसर को अधिक आकर्षक और व्यवस्थित बनाने तक की झलकियों ने सदस्यों का ध्यान खींचा।
एक दृश्य में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य यह कहते हुए नजर आते हैं कि अध्यक्ष ने विधानसभा का “पूरा कायाकल्प” कर दिया। वहीं उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय सहित कई सदस्यों के वक्तव्य भी फिल्म में शामिल थे।
प्रधानमंत्री की सलाह और संवाद की संस्कृति
फिल्म का एक भावनात्मक क्षण वह था जब सतीश महाना ने संस्मरण साझा किया। उन्होंने बताया कि अध्यक्ष बनने के बाद जब वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिले, तो उन्हें पक्ष और विपक्ष दोनों से संवाद बनाए रखने की सलाह दी गई।
महाना ने कहा कि सदन की गरिमा तभी बढ़ती है जब स्वस्थ संवाद हो और यदि कोई विधायक अच्छा बोले, तो उसकी खुले दिल से सराहना की जानी चाहिए। यह संदेश फिल्म के माध्यम से स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया।
लोकतंत्र से आमजन का जुड़ाव
फिल्म में विभिन्न शिक्षण संस्थानों से आए विद्यार्थियों और प्रतिभागियों को सदन की कार्यवाही देखते हुए भी दिखाया गया। यह दृश्य केवल औपचारिकता नहीं था, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को आमजन के करीब लाने की कोशिश का प्रतीक माना गया।
विधान भवन के सौंदर्यीकरण के बाद हुए उद्घाटन समारोह की झलक भी दिखाई गई, जिसमें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की मौजूदगी को रेखांकित किया गया।
श्रेय और सराहना
सतीश महाना ने इन सभी परिवर्तनों का श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दिया। फिल्म के समापन पर सदन में तालियों की गूंज इस बात का संकेत थी कि बदलावों को व्यापक समर्थन मिला है।
सपा के वरिष्ठ सदस्य ओमप्रकाश सिंह ने अधिष्ठाता पीठ से महाना के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे सकारात्मक पहल बताया।
तीन पूर्व सदस्यों को श्रद्धांजलि
कार्यवाही के दौरान सदन ने तीन पूर्व सदस्यों—राम देव आचार्य, राम बहादुर सिंह और सुशील चौधरी—के निधन पर शोक व्यक्त किया। सतीश महाना ने शोक प्रस्ताव पढ़ा और सभी सदस्यों ने कुछ क्षण मौन रखकर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की।
पत्रकारिता विश्लेषण: बदलाव की राजनीति और प्रतीकात्मक संदेश
यूपी विधानसभा में चार साल के बदलावों पर आधारित इस फिल्म का प्रदर्शन केवल प्रशासनिक उपलब्धियों का बखान नहीं था, बल्कि एक प्रतीकात्मक संदेश भी था—कि लोकतांत्रिक संस्थाएं समय के साथ खुद को आधुनिक और जनोन्मुखी बना सकती हैं।
सदन में गूंजती तालियां इस बात का संकेत थीं कि बदलाव केवल भौतिक ढांचे तक सीमित नहीं, बल्कि संवाद की संस्कृति को भी मजबूत करने की कोशिश है।











