लखनऊ, 09 फरवरी 2026। सर्द सुबह, लेकिन सियासी तापमान ऊंचा। Uttar Pradesh Vidhan Sabha परिसर में सोमवार को जैसे ही राज्यपाल का काफिला पहुंचा, बजट सत्र की औपचारिक शुरुआत के साथ राजनीतिक बहस का मंच भी सज गया। Anandiben Patel के अभिभाषण के साथ यूपी विधानमंडल बजट सत्र (वित्तीय वर्ष 2026–27) प्रारंभ हुआ, जो 9 से 20 फरवरी तक चलेगा। पहले ही दिन विपक्ष के शोर-शराबे और नारेबाजी के बीच राज्यपाल ने लगभग 30 मिनट का अभिभाषण पढ़ा।
सत्र शुरू होने से पहले मीडिया से बात करते हुए Yogi Adityanath ने स्पष्ट संदेश दिया— “विधानमंडल संवाद से चलता है, व्यवधान से नहीं।” उन्होंने कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है और विपक्ष से भी रचनात्मक भागीदारी की अपेक्षा रखती है।
यूपी विधानमंडल बजट सत्र: संवाद बनाम व्यवधान
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र का यह महत्वपूर्ण मंच समाधान खोजने का स्थान है। “हमने बार-बार कहा है कि सरकार संवाद के जरिए समस्याओं का समाधान चाहती है। कार्यवाही बाधित करने से जनहित के मुद्दे पीछे छूट जाते हैं,” उन्होंने जोड़ा। उनके मुताबिक, बजट सत्र के दो केंद्रीय बिंदु हैं— राज्यपाल का अभिभाषण और सामान्य बजट।
योगी आदित्यनाथ ने यह भी बताया कि राज्यपाल के अभिभाषण के बाद उत्तर प्रदेश का आर्थिक सर्वेक्षण सदन में प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि यह पहल राज्यों के लिए एक नई परंपरा की तरह होगी, जहां राज्य स्तर पर आर्थिक सर्वेक्षण को विधिवत सदन के समक्ष रखा जाएगा।
‘बीमारू’ से ‘ब्रेक थ्रू स्टेट’ तक का दावा
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में विकास के नैरेटिव को रेखांकित करते हुए कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश ने ‘बीमारू’ की छवि से बाहर निकलकर ‘ब्रेक थ्रू स्टेट’ के रूप में पहचान बनाई है। उनके शब्दों में, “यह बदलाव नीतियों, निवेश, आधारभूत ढांचे और कानून-व्यवस्था में सुधार का परिणाम है।”
उन्होंने सभी दलों के सदस्यों से अपील की कि वे सुझाव दें, बहस करें, लेकिन सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलने दें। “हर सदस्य का सुझाव हमारे लिए महत्वपूर्ण है, बशर्ते चर्चा का वातावरण बना रहे,” उन्होंने कहा।
विपक्ष का विरोध, सियासी संकेत
सत्र के पहले दिन Samajwadi Party के विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष के आसन के सामने नारेबाजी की और राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान विरोध दर्ज कराया। ‘राज्यपाल वापस जाओ’ के नारे गूंजते रहे। यह संकेत था कि आने वाले दिनों में सदन के भीतर बहसें तीखी रहने वाली हैं।
फिर भी, सरकार की ओर से यह संदेश साफ रहा कि वह हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है— चाहे वह आर्थिक प्राथमिकताएं हों, सामाजिक योजनाएं हों या बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रस्ताव।
आने वाले दिनों में जब सामान्य बजट और आर्थिक सर्वेक्षण सदन के पटल पर आएंगे, तब यूपी विधानमंडल बजट सत्र सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया नहीं रहेगा, बल्कि राज्य की विकास दिशा पर गंभीर विमर्श का मंच बनेगा। यही वह क्षण होगा जहां आंकड़े, दावे और विपक्ष के सवाल आमने-सामने होंगे— और लोकतंत्र की असली तस्वीर उभरेगी।










