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आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के साथ शुरू होगा यूपी विधानमंडल का बजट सत्र, राज्यपाल के अभिभाषण के बाद पेश करेंगे सुरेश खन्ना

On: February 9, 2026
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आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के साथ शुरू होगा यूपी विधानमंडल का बजट सत्र
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लखनऊ, 09 फरवरी 2026। उत्तर प्रदेश विधानमंडल का बजट सत्र सोमवार से औपचारिक रूप से शुरू हो रहा है। परंपरा के अनुसार सत्र की शुरुआत राज्यपाल Anandiben Patel के अभिभाषण से होगी। इसके तुरंत बाद वित्त मंत्री Suresh Kumar Khanna सदन पटल पर बहुप्रतीक्षित आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट पेश करेंगे। यह रिपोर्ट बीते वित्तीय वर्ष 2024–25 की आर्थिक तस्वीर को डेटा और विश्लेषण के साथ सामने रखेगी, साथ ही चालू वित्तीय वर्ष के पहले नौ महीनों के रुझान भी बताएगी।

आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट: विकास और चुनौतियों का डेटा-आधारित लेखाजोखा

आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट को राज्य की अर्थव्यवस्था का “रिपोर्ट कार्ड” माना जाता है। इसमें कृषि, उद्योग, सेवा, ऊर्जा, पर्यटन, निर्माण और अवसंरचना जैसे प्रमुख क्षेत्रों में उपलब्धियों और चुनौतियों का तुलनात्मक विश्लेषण रहेगा। रिपोर्ट यह स्पष्ट करेगी कि किन सेक्टरों में वृद्धि की रफ्तार तेज हुई, कहाँ निवेश और बजट आवंटन का असर दिखा, और किन क्षेत्रों में नीतिगत सुधार की आवश्यकता बनी हुई है।

सूत्रों के अनुसार, इस बार रिपोर्ट का स्वरूप अधिक व्यापक और विश्लेषणात्मक रखा गया है। राज्य सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) की वृद्धि, राजस्व प्राप्ति, व्यय पैटर्न, पूंजीगत खर्च, रोजगार के संकेतक, और क्षेत्रवार प्रदर्शन को समेकित ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि नीति-निर्माताओं और आमजन—दोनों को स्पष्ट दिशा मिल सके।

किन क्षेत्रों पर रहेगा खास फोकस?

रिपोर्ट में विशेष रूप से इन क्षेत्रों का विस्तृत आकलन शामिल होगा:

  • कृषि: उत्पादन, सिंचाई, फसल विविधीकरण और कृषि आय से जुड़े संकेतक
  • अवसंरचना (Infrastructure): सड़क, एक्सप्रेसवे, पुल, शहरी सुविधाएँ और कनेक्टिविटी
  • पर्यटन: आगंतुक संख्या, राजस्व, विरासत स्थलों का विकास
  • ऊर्जा: उत्पादन क्षमता, आपूर्ति, नवीकरणीय ऊर्जा की प्रगति
  • उद्योग व निर्माण: निवेश, उत्पादन, रोजगार सृजन
  • सेवा क्षेत्र: शहरी अर्थव्यवस्था, लघु उद्यम, व्यापारिक गतिविधियाँ

इन सेक्टरों में हुए बदलावों को पिछले वर्षों के आंकड़ों से जोड़कर दिखाया जाएगा, जिससे रुझान (trends) स्पष्ट हों।

चालू वित्तीय वर्ष के नौ महीनों का ट्रेंड भी शामिल

रिपोर्ट केवल 2024–25 तक सीमित नहीं रहेगी। चालू वित्तीय वर्ष के पहले नौ महीनों के आंकड़े जोड़कर यह बताया जाएगा कि मौजूदा नीतियों का तात्कालिक प्रभाव क्या रहा। इससे यह समझना आसान होगा कि बजट घोषणाएँ जमीन पर किस रफ्तार से उतर रही हैं और किन क्षेत्रों में गति अपेक्षाकृत धीमी है।

नीति-निर्माण के लिए संकेत, जनता के लिए पारदर्शिता

आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट का महत्व केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं होता। यह सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं, संरचनात्मक चुनौतियों और भविष्य की दिशा का संकेत देती है। राजस्व बनाम व्यय, पूंजीगत निवेश बनाम राजस्व खर्च, और सामाजिक क्षेत्रों में आवंटन—इन सबका संतुलन रिपोर्ट के जरिए स्पष्ट होगा। इससे आगामी बजट पर बहस अधिक तथ्यपरक हो सकेगी।

सूत्र बताते हैं कि इस बार रिपोर्ट को केंद्र सरकार की तर्ज पर अधिक विस्तृत प्रारूप में संकलित किया गया है, ताकि हर प्रमुख क्षेत्र का गहन विश्लेषण एक ही दस्तावेज़ में उपलब्ध हो।

क्यों अहम है यह रिपोर्ट?

आम तौर पर लोग बजट भाषण पर ध्यान देते हैं, लेकिन उससे पहले आने वाली आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट ही असल आधार तैयार करती है। यही दस्तावेज बताता है कि राज्य की अर्थव्यवस्था किस दिशा में बढ़ रही है, सरकार की कमाई और खर्च का संतुलन कैसा है, और विकास की रफ्तार किन कारकों से प्रभावित हो रही है।

सरल शब्दों में, यह रिपोर्ट बताती है—उपलब्धियां कहाँ हैं, दबाव कहाँ है, और अवसर कहाँ छिपे हैं। विधानमंडल के बजट सत्र में होने वाली आगे की चर्चाओं के लिए यही दस्तावेज संदर्भ बिंदु बनेगा।

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