लखनऊ (बुधवार, 21 जनवरी 2026): लोकतांत्रिक संवाद, संसदीय मर्यादा और भविष्य की विकास-दृष्टि—इन तीनों का संगम बुधवार को लखनऊ में साफ दिखाई दिया, जब 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का समापन गरिमामय वातावरण में हुआ। इस मंच से उत्तर प्रदेश के विजन 2047 डॉक्यूमेंट को देशभर के लिए एक प्रेरक मॉडल बताते हुए राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने खुलकर सराहना की।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश ने जिस गंभीरता, व्यापक संवाद और दीर्घकालिक सोच के साथ विजन 2047 तैयार किया है, वह केवल एक सरकारी दस्तावेज नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक सहभागिता से गढ़ी गई विकास-योजना है—जिससे अन्य राज्य भी दिशा ले सकते हैं।
विजन 2047: संवाद से विकास की रूपरेखा
समापन सत्र को संबोधित करते हुए हरिवंश ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह सम्मेलन केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश की विधायी संस्थाओं के अनुभवों और नवाचारों का साझा मंच बना। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा तैयार विजन 2047 को लोकतांत्रिक विमर्श का उत्कृष्ट उदाहरण बताया—जहाँ सरकार, विधायिका और समाज की भागीदारी से भविष्य की तस्वीर गढ़ी गई है।
उनके अनुसार, ऐसे दस्तावेज शासन को लक्ष्य देते हैं और लोकतंत्र को भरोसा। “चाहे विधानमंडल हो या सरकार, सबका लक्ष्य एक है—जनहित और देश का संतुलित विकास,” उन्होंने कहा।
योगी के नेतृत्व में बदला यूपी का प्रशासनिक चेहरा
सम्मेलन के दौरान उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि अनुशासन, त्याग और जनता से सीधे संवाद ने उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक पहचान को नया आकार दिया है।
महाना ने कहा कि बीते वर्षों में सरकार ने प्रभावी और परिणामोन्मुखी कार्यसंस्कृति विकसित की है। अलग-अलग राज्यों के एजेंडे भले भिन्न हों, लेकिन उद्देश्य एक ही है—जनता का कल्याण और विकास की निरंतरता।
संसद से विधानसभा तक—नवाचारों की साझा सीख
राज्यसभा के उपसभापति ने कर्नाटक, मध्य प्रदेश और राजस्थान की विधानसभाओं में विधायकों की उपस्थिति बढ़ाने और सोशल मीडिया के माध्यम से सदन की कार्यवाही को आमजन तक पहुँचाने की पहलों को भी सराहा। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयोग संसदीय प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और जनोन्मुखी बनाते हैं।
विधायिका लोकतंत्र की मजबूत धुरी
अपने संबोधन में सतीश महाना ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के मार्गदर्शन को सभी पीठासीन अधिकारियों के लिए प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने कहा कि विधायिका लोकतंत्र का सबसे मजबूत स्तंभ है, जहाँ जनता द्वारा चुना गया प्रतिनिधि जनहित की आवाज बनता है।
“यहाँ उठने वाले सवाल, यहाँ होने वाला संवाद—सरकार को दिशा देता है,” महाना ने कहा। साथ ही उन्होंने सम्मेलन में आए सुझावों को भविष्य में विधायी कार्यवाही को और प्रभावी बनाने वाला बताया।
उत्तर प्रदेश का अनुभव, देश के नाम संदेश
सम्मेलन के समापन पर यह संदेश साफ था कि उत्तर प्रदेश की कार्यसंस्कृति, प्रशासनिक मॉडल और लोकतांत्रिक परंपराएँ अब केवल राज्य तक सीमित नहीं रहीं। विजन 2047 के माध्यम से यूपी ने विकास की वह रूपरेखा सामने रखी है, जिसे देश के अन्य राज्य भी अपनाने की दिशा में देख रहे हैं।








