लखनऊ (सोमवार, 19 जनवरी 2026)। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को दुरुस्त और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को तेज कर दिया गया है। रविवार को प्रदेश के सभी मतदान केंद्रों पर दावे और आपत्तियां लेने के लिए विशेष अभियान चलाया गया। इस दौरान बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) ने मतदाता सूची पढ़कर सुनाई, ताकि मतदाता स्वयं अपने नाम और विवरण की जांच कर सकें।
यह अभियान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बुनियाद को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
UP Voter List SIR के तहत 6 फरवरी तक मिलेगा मौका
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची से जुड़े दावे और आपत्तियां 6 फरवरी 2026 तक जमा की जा सकती हैं। उन्होंने बताया कि इस अवधि में कोई भी पात्र मतदाता अपने नाम से जुड़ी त्रुटियों को सुधार सकता है या छूटे हुए नाम को सूची में शामिल करा सकता है।
रविवार की शाम मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने गाजियाबाद की साहिबाबाद विधानसभा के एक पोलिंग बूथ का निरीक्षण कर मौके पर चल रहे अभियान का जायजा लिया। उनके साथ अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे।
बूथों पर क्या-क्या किया गया
विशेष अभियान के दौरान बूथों पर व्यवस्थाएं सामान्य दिनों से अलग रहीं।
- बीएलओ ने निर्धारित समय पर उपस्थित होकर मतदाता सूची पढ़कर सुनाई
- मृतक, स्थानांतरित या दोहरी प्रविष्टि वाले नामों को स्पष्ट रूप से चिह्नित किया गया
- अनुपस्थित या संदिग्ध प्रविष्टियों की जानकारी मतदाताओं के साथ साझा की गई
- मतदान केंद्रों पर मौजूद अधिकारियों ने बीएलओ के कार्य की गुणवत्ता की समीक्षा की
जिलों में तैनात प्रशासनिक अधिकारियों ने भी स्थलीय भ्रमण कर यह सुनिश्चित किया कि अभियान सही दिशा में और पारदर्शी तरीके से चल रहा है।
“कोई भी पात्र मतदाता छूटे नहीं” – सीईओ
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने कहा कि UP Voter List SIR अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिकतम शुद्ध, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र की मजबूती तभी संभव है, जब हर पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में दर्ज हो।
उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे:
- अपने बूथ की मतदाता सूची अवश्य जांचें
- नाम न होने, गलत उम्र, पता या फोटो जैसी त्रुटियों पर तुरंत कार्रवाई करें
- फॉर्म-6 (नया नाम जोड़ने), फॉर्म-7 (नाम हटाने) और फॉर्म-8 (संशोधन) के जरिए ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन करें
समय रहते किए गए सुधार न केवल मतदाता सूची को विश्वसनीय बनाते हैं, बल्कि चुनाव प्रक्रिया में नागरिकों की भागीदारी को भी मजबूत करते हैं।
लोकतंत्र की तैयारी, नागरिकों की जिम्मेदारी
विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान यह याद दिलाता है कि मतदाता सूची केवल सरकारी दस्तावेज नहीं, बल्कि लोकतंत्र की पहली सीढ़ी है। चुनाव आयोग की यह पहल तभी सफल होगी, जब मतदाता खुद आगे आकर सूची की जांच करेंगे और आवश्यक सुधार कराएंगे।







